केंद्र और राज्य सरकारों ने कोरोना की दूसरी लहर से सबक लेते हुए मजबूत किए स्वास्थ्य तंत्र

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प्रह्लाद सबनानी

सरकार ने स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए अपना पूरा जोर लगा दिया था। देश के जिन इलाकों में ऑक्सिजन एवं दवाईयों की कमी महसूस की गई थी वहां रेल्वे एवं हवाई मार्ग से बहुत ही तेजी के साथ इन पदार्थों को उपलब्ध कराया गया था।

कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान देश के अस्पतालों पर स्पष्ट रूप से अधिक दबाव देखा गया था। कई शहरों के अस्पतालों में कोरोना से संक्रमित मरीजों के लिए बिस्तरों का अभाव होने लगा था तो कई शहरों में ऑक्सिजन उपलब्धता में कमी हो गई थी, रेमिडिसिवेर नामक दवाई का भी अभाव हुआ था तथा प्लाज़्मा की मांग एकाएक बढ़ने से इसकी उपलब्धता में भी कमी हो गई थी। कुल मिलाकर ऐसा महसूस होने लगा था कि देश में उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाएं शायद पर्याप्त नहीं हैं। ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य क्षेत्र में और अधिक सुविधाएं उपलब्ध कराना अब आवश्यक हो गया है। इस उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने दिनांक 5 मई 2021 को कुछ विशेष घोषणाएं की हैं ताकि देश में कोविड महामारी से संबंधित स्वास्थ्य सम्बंधी बुनियादी ढांचे को तेजी के साथ विकसित किया जा सके।

इन घोषणाओं के अनुसार, अब बैंकों द्वारा स्वास्थ्य सम्बंधी बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाने के उद्देश्य से अधिक ऋण उपलब्ध कराया जा सकेगा और इस हेतु भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा 50,000 करोड़ रुपए की राशि विभिन्न बैंकों को रेपो दर पर (वर्तमान में 4 प्रतिशत) तीन वर्षों के लिए उपलब्ध कराई जाएगी एवं बैंक इस व्यवस्था का लाभ 31 मार्च 2022 तक उठा सकेंगे। इस योजना के अंतर्गत प्राथमिकता वाले चिकित्सा उपरकणाों के आयातकों व आपूर्तिकर्ताओं, अस्पतालों, डिस्पेंसरियों, पैथोलॉजी लैब, ऑक्सीजन एवं वेंटिलेटर विनिर्माताओं और आपूर्तिकर्ताओं तथा कोविड की दवाओं के आयातकों और लॉजिस्टिक फर्मों एवं मरीजों को उपचार के लिए बैंकों द्वारा ऋण उपलब्ध कराया जा सकता हैं। इस प्रकार के ऋणों को प्राथमिक क्षेत्र के ऋण की श्रेणी में रखा जाएगा। प्राथमिक क्षेत्र के ऋण के लिए बैंकों को नकदी आरक्षी अनुपात या सांविधिक तरलता अनुपात बरकरार रखने की जरूरत नहीं होती है और यह कर्ज रियायती दर पर उपलब्ध होता है।

साथ ही, भारतीय रिजर्व बैंक ने लघु वित्त बैंकों को लम्बी अवधि के विशेष रेपो संचालन में भाग लेने की छूट प्रदान कर दी है ताकि ये बैंक सूक्ष्म, लघु एवं असंगठित क्षेत्र के संस्थानों को वित्तीय सहायता प्रदान करने में सक्षम हो सकें। इस सुविधा के साथ अब लघु वित्त बैंक, लघु सूक्ष्म वित्त संस्थाओं, जिनकी परिसंपतियों का आकार 500 करोड़ रुपए का है, को भी वित्त प्रदान करने के लिए अधिकृत किया गया है। भारतीय रिजर्व बैंक विशेष रूप से लघु वित्त बैंकों के लिए 10,000 करोड़ रुपए का, रेपो की दर (वर्तमान में 4 प्रतिशत) पर, 3 वर्ष की लम्बी अवधि का एक विशेष रेपो संचालन करेगा।

इसी तरह के उपाय, कोरोनो महामारी की प्रथम लहर के दौरान, 27 मार्च 2020 को भी भारतीय रिजर्व बैंक ने किए थे। उस समय पर भारतीय रिजर्व बैंक ने आर्थिक गतिविधियों को चुस्त दुरुस्त बनाए रखने के उद्देश्य से सिस्टम में तरलता बनाए रखने के लिए एक लाख करोड़ रुपए से अधिक की राशि के पैकेज की घोषणा की थी। यह अपने आप में बहुत बड़ी घोषणा थी। अब फिर से कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान, विशेष रूप से स्वास्थ्य क्षेत्र को 50000 करोड़ रुपए की तरलता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह घोषणा की गयी है।

देश में तरलता की स्थिति में सुधार होने के बाद अक्सर बैंकों में आत्मविश्वास का स्तर बढ़ता है एवं वे अधिक ऋण प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित होते हैं। विशेष रूप से इस नाजुक समय में देश में आपूर्ति प्रबंधन को बनाए रखना जरूरी है अन्यथा देश में मुद्रा स्फीति की दर बढ़ सकती है। अतः यदि विभिन्न उत्पादों का उत्पादन करने वाली इकाईयों को धन की कमी नहीं आने दी जाती है तो इन उत्पादों का उत्पादन पर्याप्त मात्रा में होता रहेगा एवं इनकी आपूर्ति सुनिश्चित होती रहेगी। कोविड महामारी की दूसरी लहर का अर्थव्यवस्था पर कम से कम विपरीत प्रभाव हो इस हेतु केंद्र सरकार एवं भारतीय रिज़र्व बैंक द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। किसी भी महामारी के बाद उत्पादन क्षमता को बढ़ाना आवश्यक होता है, ऐसा दूसरे विश्व युद्ध के दौरान वर्ष 1945 में भी देखा गया था, अतः पूंजी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहे इसका प्रयास सरकार एवं केंद्रीय बैंक मिलकर रहे हैं।

भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा किए जा रहे उक्त उपायों के चलते देश के स्वास्थ्य क्षेत्र में निश्चित ही सुधार होगा क्योंकि वित्त की उपलब्धता आसान होने से इस क्षेत्र में निजी निवेश भी बढ़ेगा। वर्ष 2021 के जून एवं जुलाई माह में स्वास्थ्य क्षेत्र में निवेश का एक माहौल तैयार हो सकता है, क्योंकि इस क्षेत्र में पर्याप्त मांग भी देश में ही उपलब्ध है। ऑक्सिजन की समस्या हल करने के लिए नए उत्पादन केंद्र विकसित किए जाएंगे। केंद्र सरकार ने इस तरह के कारखाने स्थापित करने की अनुमति पहिले से ही दे दी है, अब भारतीय रिजर्व बैंक पूंजी उपलब्ध करने का प्रयास कर रहा है।

भारतीय रिजर्व बैंक हमेशा ही प्रयास करता रहा है कि देश में पर्याप्त मात्रा में तरलता बनी रहे और बैंक अधिक से अधिक मात्रा में और आसानी से, उद्योगों को ऋण उपलब्ध कराए, इस हेतु समय-समय पर बैंकों को अन्य प्रकार के प्रोत्साहन भी दिए जाते रहे हैं। पिछले वर्ष भी भारतीय रिजर्व बैंक ने, कोरोना महामारी के चलते ऋणियों को अपनी किस्तें एवं ब्याज चुकाने के लिए, अधिस्थगन योजना को मंजूर किया था। इस वर्ष भी कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौर में पुनः यह सुविधा प्रदान की जा रही है। कर्ज अधिस्थगन योजना के तहत ऋणियों की वित्तीय देनदारियों के भुगतान की शर्तों को आसान बनाया जायेगा। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल के अनुसार लगभग 3,400 कंपनियां कर्ज अधिस्थगन योजना का लाभ लेने के लिए पात्र होंगी। इन कंपनियों ने बैंकों से लगभग 50,000 करोड़ रुपये का कर्ज ले रखा है। हालांकि, कर्ज अधिस्थगन का विकल्प चुनने वाली कंपनियों की तादाद काफी कम भी रह सकती है, क्योंकि अभी तक कोरोना महामारी की दूसरी लहर का असर कुछ खास क्षेत्रों तक ही सीमित है, लेकिन छोटे कारोबारियों को नुकसान होने की बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। चूंकि, छोटे कारोबारी अभी तक महामारी की पहली लहर से उबर ही नहीं पाये हैं, ऐसे में दूसरी लहर उन्हें ज्यादा तकलीफ दे सकती है। क्रिसिल के मुताबिक खुदरा, आतिथ्य, वाहन डीलरशिप, पर्यटन, रियल एस्टेट क्षेत्र की कंपनियों आदि पर महामारी का सबसे अधिक असर पड़ेगा। दूसरी तरफ रसायन, दवा, डेरी, सूचना व प्रौद्योगिकी और एफएमसीजी क्षेत्र की कंपनियों पर महामारी का कोई खास असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि इन क्षेत्रों की कंपनियों के उत्पादों की मांग में कमी नहीं आई है, इसलिए इन क्षेत्रों की कंपनियां कर्ज अधिस्थगन के विकल्प का चुनाव नहीं भी कर सकती हैं।

हालांकि देश में इस वर्ष अच्छे मानसून की सम्भावनाओं के साथ ही कृषि उत्पादन की स्थिति ठीक रहने की सम्भावनाएं अब बढ़ गई हैं और इस तरह खाद्य पदार्थों की आपूर्ती की अधिक चिंता नहीं होगी जिसके कारण अंततः मुद्रा स्फीति पर अंकुश बना रहेगा और भारतीय रिज़र्व बैंक को रेपो रेट में वृद्धि करने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी। अतः देश में अब सुगम मौद्रिक नीति जारी रहने की प्रबल सम्भावनाएं बन रही हैं।

कोरोना महामारी के काल में केंद्र सरकार ने भी देश में नागरिकों को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए अपना पूरा जोर लगा दिया था। देश के जिन इलाकों में ऑक्सिजन एवं दवाईयों की कमी महसूस की गई थी वहां रेल्वे एवं हवाई मार्ग से बहुत ही तेजी के साथ इन पदार्थों को उपलब्ध कराया गया था। विश्व के अन्य कई देशों ने भी आगे आकर भारत को इस दौरान ऑक्सिजन, दवाईयां एवं वैक्सीनेशन उपलब्ध कराने में सराहनीय योगदान दिया है। साथ ही केंद्र सरकार गरीब लोगों के लिये मुफ्त राशन की योजना भी चला रही है, ताकि देश के गरीब नागरिकों को इस आपदा के दौरान खाद्य सामग्री की कोई कमी नहीं हो। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के माध्यम से वर्ष 2020 के 8 महीनों तक गरीबों को मुफ्त राशन प्रदान कराया गया था। इस साल भी देश के 80 करोड़ से ज्यादा जरूरतमंदों को मुफ्त में राशन उपलब्ध कराया जा रहा है। इसी प्रकार 14 मई 2021 को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की आठवीं किस्त का वितरण किया गया। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत केंद्र सरकार प्रत्येक किसान परिवार को हर साल 6,000 रुपए प्रदान करती है। यह राशि 2,000 रुपए की तीन समान किस्तों में उपलब्ध करायी जाती है। प्रत्येक 4 महीने के बाद यह सम्मान राशि सीधे किसानों के बैंक खाते में अंतरित की जाती है। इस योजना के अंतर्गत अब तक 11 करोड़ किसानों के खातों में 1.35 लाख करोड़ रुपए की राशि अंतरित की जा चुकी है।

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