Categories
मुद्दा

सरकारों को अपने विकास का एजेंडा बदल कर उसमें स्वास्थ्य को सबसे ऊपर रखना होगा

रमेश सर्राफ धमोरा

कोरोना संक्रमण के दौर में लोगों को समुचित रूप से उपचार नहीं मिल पाना हमारी सरकारों की असफलता को दर्शाता है। सरकार चाहे देश की हो या प्रदेश की, सभी कोरोना महामारी का मुकाबला करने के मोर्चे पर असफल रही हैं।

देश में चल रही कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने पूरे देशवासियों को हिला कर रख दिया है। लोगों में भय व्याप्त है। हर कोई अपने को असुरक्षित महसूस कर रहा है। कोरोना संक्रमित मरीजों के आने की संख्या बहुत अधिक होने के कारण उनके उचित इलाज की व्यवस्था नहीं हो पा रही है। इससे मरने वाले लोगों की संख्या में भारी इजाफा हो रहा है। मौत के बढ़ते आंकड़े लोगों को डरा रहे हैं।

कोरोना संक्रमण के दौर में लोगों को समुचित रूप से उपचार नहीं मिल पाना हमारी सरकारों की असफलता को दर्शाता है। सरकार चाहे देश की हो या प्रदेश की, सभी कोरोना महामारी का मुकाबला करने के मोर्चे पर असफल रही हैं। कोरोना से पीड़ित लोगों को भर्ती करने के लिए अस्पतालों में जगह ही नहीं बची है। गंभीर रूप से बीमार लोगों को ऑक्सीजन नहीं मिलने से देश में बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो रही है। लोगों की मौत का यह सिलसिला अनवरत जारी है। 135 करोड़ की आबादी वाले देश में ऑक्सीजन व दवा की कमी से लोगों का मरना एक ऐसा बदनुमा दाग है जो शायद ही कभी मिट पाएगा।

देश में कोरोना की पहली लहर आने के बाद केंद्र व राज्य सरकारों ने भविष्य में ऐसी महामारी से बचने की दिशा में कोई विशेष तैयारियां नहीं कीं। सभी लोग कोरोना की पहली लहर के बाद कोरोना समाप्त हो गया, यह मानकर निश्चिंत हो गये तथा पूर्व की तरह अपने कामों में लग गये। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि कोरोना की दूसरी लहर भी आएगी। जो इतनी खतरनाक होगी कि पूरे देश को हिला कर रख देगी।

कोरोना संकट की इस घड़ी में केंद्र व राज्य सरकारें इस महामारी से छुटकारा पाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं। मगर उनके प्रयास सफल नहीं हो रहे हैं। क्योंकि मौजूदा समय में सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयास प्यास लगने पर कुआं खोदना जैसा ही प्रतीत हो रहे हैं। कोरोना की पहली लहर के बाद समय रहते यदि सरकारें सचेत होकर भविष्य की रणनीति बनाकर उस पर अमल करतीं तो हमें आज के बुरे दौर से नहीं गुजरना पड़ता। इतने दिनों तक सरकारें हाथ पर हाथ धरे बैठी रहीं। चिकित्सा के क्षेत्र में कुछ विशेष काम नहीं किया। जब महामारी सर पर आ खड़ी हुयी तो आपस में एक दूसरे पर बयानबाजी कर राजनीति करने में लग गए। जिसका खामियाजा देश की जनता को ही उठाना पड़ रहा है।

पिछले वर्ष कोरोना महामारी आने के बाद केंद्र व राज्य सरकारों ने इस वर्ष के अपने बजट में चिकित्सा के क्षेत्र में ऐसी कोई नयी योजना शुरू नहीं की जो आगे चलकर देश, प्रदेश के लोगों का ऐसी महामारी से बचाव करने में सहायक सिद्ध हो पाती। इस वर्ष के बजट में भी सरकारों ने सड़क, पुल, भवन, बिजली जैसे क्षेत्रों के कामों को ही प्राथमिकता में रखा है। चिकित्सा के क्षेत्र के लिए तो बजट में बहुत कम राशि का प्रावधान किया गया है।

भारत गांवों का देश है। चिकित्सा की दृष्टि से आज भी गांव में स्थिति बहुत खराब मानी जा रही है। इस समय कोरोना का सबसे अधिक प्रसार-प्रभाव गांव में हो रहा है। जहां ना तो कोरोना की जांच की कोई सही व्यवस्था है। ना ही उपचार के कोई साधन हैं। सरकार का पूरा ध्यान शहरों की तरफ रहने से वहां की छोटी घटना को भी मीडिया में प्रमुखता से स्थान मिलता है। जबकि गांवों में बड़ी से बड़ी घटना घट जाए तो भी मीडिया का ध्यान नहीं जाता है। कोरोना से सबसे अधिक मौतें भी ग्रामीण क्षेत्रों में हो रही हैं। मगर उनमें से अधिकांश को तो प्रशासन कोरोना से मौत होना स्वीकार ही नहीं कर रहा है। चिकित्सा विभाग द्वारा उनको सामान्य मौत बताकर उनका अंतिम संस्कार करवा दिया जाता है।

राजस्थान के झुंझुंनूं जिले के सूरजगढ़ उपखंड के एक छोटे से गांव श्यालू में एक ही दिन में 89 कोरोना संक्रमित मरीज मिलते हैं। जिसके वास्तविक कारणों को जानने की किसी को फुर्सत नहीं है। खीरवा, बलारा, मंगलूणा, दिसनाउ, तूनवा, रोरू सीकर जिले के लक्ष्मणगढ़ क्षेत्र के गांव हैं जहां हर गांव में मौत का आंकड़ा दो दर्जन से अधिक है। मगर वहां भी प्रशासन बीमारी को आगे और अधिक फैलने से रोकने के लिए कोई प्रभावी कदम नहीं उठा पाया है। खीरवा गांव की सरपंच राशिदा बानो कहती हैं कि गांव में जिला कलेक्टर अविचल चतुर्वेदी सिर्फ आश्वासन देकर चले गये किया कुछ नहीं। खाटू गांव में श्याम बाबा मेले के दौरान लाखों लोगों की भीड़ जुटी थी। मेले के दौरान 23 मार्च को वहां पहला पॉजिटिव केस मिला था। उसके बाद से अब तक 244 लोग पॉजिटिव आ चुके हैं। यहां पांच लागों की मौत होने से गांव में सन्नाटा पसरा हुआ है।

देश के अधिकांश गांवों में बीमारी से उपचार के लिए छोटे चिकित्सालय हैं। जहां एक डॉक्टर, कंपाउंडर या नर्स तैनात है। मगर उनके पास समुचित साधन व दवाइयों का अभाव रहता हैं। जिस कारण वो गांव वालों का समुचित उपचार नहीं कर पाते हैं। यदि गांव के सभी प्राथमिक व सामुदायिक चिकित्सालय केंद्रों पर कोरोना उपचार की व्यवस्था करवा दी जाए तथा ऑक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध करवा दिया जाए तो बहुत से कोरोना मरीजों का गांव में ही उपचार हो जाएगा, जिससे शहरों पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ेगा। मगर ना जाने क्यों सरकार ऐसा नहीं कर पा रही है। कोरोना वैक्सीन लगाने में भी गांव की बजाय शहरों को प्राथमिकता दी जा रही है। जिससे बड़ी संख्या में ग्रामीण आबादी कोरोना वैक्सीन लगवाने से वंचित है। सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि आबादी के अनुपात में कोरोना वैक्सीन का वितरण हो। जिससे सभी क्षेत्रों में समान रूप से कोरोना की वैक्सीन पहुंच सके।

देश में एम्स जैसे बड़े चिकित्सा संस्थान, मेडिकल कॉलेज, बड़े चिकित्सा रिसर्च केंद्रों की संख्या बहुत कम है। जो है वहां भी मरीजों का दबाव इतना अधिक रहता है कि और अधिक मरीजों को भर्ती करने की स्थिति में नहीं रहते हैं। ऐसी स्थिति में सरकार को हर जिले में बड़े चिकित्सा संस्थान भी बनवाने चाहिए ताकि लोगों को अपने जिले में ही समुचित उपचार मिल सके। लोगों को उपचार के लिये महानगरों की तरफ नहीं जाना पड़े।

अभी भी समय है सरकार को जिला, उपखंड व तहसील स्तरीय स्वास्थ्य केंद्रों को पर्याप्त संसाधन उपलब्ध करवाने चाहिये। प्रदेशों में जहां भी मेडिकल कॉलेज स्वीकृत हैं उनका निर्माण कार्य तुरंत प्रारम्भ करवाना चाहिये। केंद्र व राज्य सरकारें अपने पिछले बजट में शामिल विकास योजनाओं में कटौती कर स्वास्थ्य संबंधित योजनाओं पर ही अधिकांश पैसा खर्च करें ताकि आने वाले समय में देश इससे भी बड़ी महामारी का मुकाबला करने में खुद को सक्षम बना पाए। लोगों को भी अपने नेताओं से पुल, सड़क, भवन बनवाने के स्थान पर सबसे पहले अस्पताल बनवाने की मांग करनी होगी। तभी आये दिन विभिन्न प्रकार की बीमारियों से होने वाली अकाल मौतों को रोका जा सकेगा।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking güncel giriş
betnano güncel giriş
betnano güncel giriş
betnano giriş
meritking giriş
meritbet giriş
meritbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
betasus giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
betnano giriş
betnano giriş
hitbet giriş
hitbet giriş
betcio giriş
meritbet giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
maritbet giriş
norabahis giriş
maritbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
vdcasino
vdcasino
bettilt giriş
bettilt giriş
vdcasino
holiganbet
holiganbet
holiganbet
holiganbet
holiganbet
sonbahis
casinolevant
holiganbet
sonbahis
holiganbet
sonbahis
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino
betist
tipobet
holiganbet
betist giriş
holiganbet
holiganbet giriş
sonbahis giriş
sonbahis giriş
sonbahis
Hititbet Giriş
Hititbet Güncel Giriş
holiganbet
matadorbet
betist
tipobet
betist giriş
matadorbet
tipobet
sonbahis
holiganbet
matadorbet
tipobet
tipobet
betist
tipobet
betist
holiganbet
betist
holiganbet
matadorbet
betist
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betyap giriş
vdcasino
vdcasino giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
vipslot giriş
vdcasino giriş
betist
matadorbet
casinolevant
holiganbet
sonbahis
bettilt giriş
hilbet giriş
bettilt giriş
tipobet
betist
vipslot giriş
matadorbet
betist giriş
matadorbet giriş
betist
betist
matadorbet giriş
holiganbet giriş
sonbahis giriş
betist
matadorbet
betist
matadorbet
holiganbet
betist giriş
betist
holiganbet
sonbahis
matadorbet
betist
sonbahis
matadorbet giriş
hititbet giriş
betist giriş
betist güncel giriş
maritbet giriş
meritbet
nakitbahis giriş
vdcasino
bettilt
betpark giriş
nakitbahis giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş