आजम खान की दबंगई कानून के शासन में नतमस्तक

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अजय कुमार

पिछले सवा साल से जेल में बंद सपा नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला दोनों एक मई को कोरोना संक्रमित पाए गए थे। पहले उनका जेल में इलाज चलता रहा, लेकिन ऑक्सीजन लेवल कम होने के बाद उन्हें लखनऊ के मेदांता अस्पताल में शिफ्ट करना पड़ गया।

समाजवादी पार्टी के नेता और रामपुर के सांसद आजम खान करीब सवा साल से सीतापुर के जिला जेल में बंद हैं। आजम खान के कारनामे किसी से छिपे नहीं हैं। समाजवादी पार्टी की सरकार के समय आजम अपने आप को ‘बेताज बादशाह’ न समझते तो आज उन्हें यह दिन नहीं देखना पड़ता, लेकिन सत्ता चीज ही ऐसी होती है जो बड़े-बड़ों का दिमाग खराब कर देती है। सत्ता में रहते आजम जो ठान लेते थे, उसे पूरा करके दिखाते थे। यहां तक कि मुख्यमंत्री रहते अखिलेश यादव तक उनके सामने जुबान नहीं खोल पाते थे, यह और बात है कि अब अखिलेश ने आजम से पूरी तरह से पल्ला झाड़ लिया है। आजम के कारनामे छोटे-मोटे नहीं थे। जब भी वह जुबान खोलते थे तो उसमें साम्प्रदायिकता का जहर घुला होता था। आजम की जिद्द के चर्चे दिल्ली तक में होते थे, जिसे वह पूरा करके ही दम लेते थे। सत्ता में रहते आजम ने रामपुर में जौहर विश्वविद्यालय खोलने का सपना देखा तो उसे पूरा करने के लिए पूरी ताकत लगा दी। सही-गलत कुछ नहीं देखा। सरकारी अधिकारी और मशीनरी उनके इशारों पर काम करती थी। इसलिए उन्हें अपना हुक्म पूरा कराने में कोई परेशानी भी नहीं होती थी। आजम जिसके पीछे पड़ जाते उसका जीना मुश्किल हो जाता था। कई सरकारी अधिकारी आज भी आजम के उत्पीड़न के गवाही देते मिल जाते हैं।

आजम ने व्यक्तिगत दुश्मनी लेने से भी परहेज नहीं किया। 2014 के लोकसभा चुनाव में वह भाजपा प्रत्याशी जयाप्रदा के वस्त्रों को लेकर दिए गए विवादित बयान के चलते काफी अपमानित किए गए थे। आजम की हनक का यह हाल था कि जब उन्हें जौहर विवि का सपना पूरा करने के लिए जमीन की जरूरत पड़ी तो उन्होंने कई सरकारी दस्तावेजों को पलट के रख दिया ताकि विवि के लिए जमीन की कोई कमी नहीं रहे। जहां उनके सपनों के विवि की स्थापना होनी थी, वहां के आसपास की जमीन हथियाने के लिए आजम ने अपने गुंडे लगाकर दशकों से रह रहे लोगों को दर-बदर कर दिया। इसी प्रकार 2013 में अखिलेश सरकार के रहते हुए मुजफ्फरनगर में हुए दंगों को कौन भूल सकता है। जब आजम लखनऊ में बैठ कर मुजफ्फरनगर प्रशासन और पुलिस को बता रहे थे कि किसको पकड़ना है और किसे छोड़ना है। इतना ही नहीं दंगा पीड़ितों को मुआवजा तक उनका धर्म देखकर बांटा गया।

आजम की सनक का यह आलम था कि वह सेना को भी जातीय आधार पर बांट कर देखते थे। मोदी के लिए आजम जितनी घटिया भाषा इस्तेमाल कर सकते थे, उन्होंने इसमें परहेज नहीं किया। यहां तक कि भारत माता के लिए भी अपशब्द प्रयोग करने से भी आजम ने कभी गुरेज नहीं किया। आजम खान को गर्ममिजाजी के चलते खामियाजा भी भुगतना पड़ा था। आजम के सामने अखिलेश बोलने की हिम्मत नहीं करते थे तो आजम को राजनीति का ककहरा सिखाने वाले मुलायम सिंह पूरी छूट दिए रहते थे, इसी छूट के चलते आजम पूर्व सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के सबसे करीबी रहे अमर सिंह तक को चुनौती देने लगे थे। आजम-अमर की दुश्मनी को कौन भूल सकता है। दोनों के बीच छत्तीस का आंकड़ा था। एक बार तो आजम को अमर सिंह पर की गई विवादित टिप्पणी के चलते मुलायम ने समाजवादी पार्टी से बाहर तक का रास्ता दिखा दिया गया था। आजम अपने आप को मुसलमानों का रहनुमा समझते थे, परंतु मुसलमानों ने उन्हें कभी तवज्जो नहीं दी। इसीलिए आजम खान की गिरफ्तारी से लेकर आज उनके कोरोना संक्रमित होने के बाद अति गंभीर अवस्था में पहुंच जाने तक कोई आजम के साथ दिखाई नहीं दे रहा है, न ही किसी तरह की सियासी या कौमी हलचल दिखाई दे रही है।

उत्तर प्रदेश के रामपुर से सांसद और समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान को 9 मई को कोरोना संक्रमित होने के बाद गंभीर हालत में सीतापुर जेल से लखनऊ के मेदांता अस्पताल लाया गया था और दूसरे ही दिन सांस लेने में ज्यादा दिक्कत होने के बाद डॉक्टर्स ने उन्हें आईसीयू में शिफ्ट कर दिया था। आज स्थिति यह है कि सत्ता में रहते हुए जिस आजम खान के सामने बड़े-बड़ों की सांसें रूक जाती थीं, वह आजम आईसीयू में एक-एक सांस के लिए संघर्ष कर रहे हैं। हॉस्पिटल ने बताया कि 72 साल के आजम खान को ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है।

पिछले सवा साल से जेल में बंद सपा नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला दोनों एक मई को कोरोना संक्रमित पाए गए थे। पहले उनका जेल में इलाज चलता रहा, लेकिन ऑक्सीजन लेवल कम होने के बाद उन्हें लखनऊ के मेदांता अस्पताल में शिफ्ट करना पड़ गया। आजम के साथ उनके बेटे अब्दुल्ला को भी मेदांता में ही भर्ती कराया गया है। आजम मार्च 2020 में पत्नी-बेटे के साथ जेल भेजे गए थे। आजम, उनकी पत्नी रामपुर सदर से विधायक तंजीन फातिमा और बेटे अब्दुल्ला के खिलाफ फरवरी 2020 में रामपुर के अपर जिला न्यायाधीश धीरेंद्र कुमार की अदालत ने कुर्की का वारंट जारी किया था। यह वारंट पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाणपत्र बनवाने से संबंधित मुकदमें में जारी किए गए थे। अदालत में पेश न होने के कारण तीनों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी हुए थे। इसके बाद तीनों ने अपर जिला न्यायाधीश की अदालत में समर्पण किया था। जहां उन्हें 2 मार्च 2020 तक के लिए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया था।

सांसद आजम समेत तीनों नेताओं को रामपुर जेल में रखा गया था। लेकिन कानून व्यवस्था का हवाला देकर तीनों को सीतापुर जेल में शिफ्ट कर दिया गया था। इससे पहले 20 दिसंबर को फातिमा जेल से रिहा हुई थीं। हालांकि, उनके बेटे अब्दुल्ला और खुद सांसद आजम खान जेल में रहे। दरअसल, रामपुर के गंज थाने में आकाश सक्सेना ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप लगाया गया था कि अब्दुल्ला आजम खान ने 28 जनवरी 2012 और 21 अप्रैल 2015 को नगर निगम रामपुर से दो जन्म प्रमाण पत्र जारी कराये। इसमें अलग-अलग जन्म तिथि है, एक में उनकी जन्म तिथि 1 जनवरी 1993 है, तो दूसरे में 30 सितंबर 1990 है। ऐसा उनके द्वारा सरकारी लाभ व चुनाव लड़ने के लिए किया गया। उनके इस धोखाधड़ी में उनके पिता आजम खान व उनकी मां डॉ. तंजीन फातिमा शामिल हैं। इसी जन्म प्रमाणपत्र के आधार पर अब्दुल्ला आजम खान की विधायकी भी रद्द की जा चुकी है।

बहरहाल, आजम खान के ऊपर करीब पांच दर्जन मुकदमे चल रहे हैं, लेकिन अभी तक किसी मामले में गुनाहागार नहीं साबित हुए हैं। अभी लम्बी प्रक्रिया चलेगी तब कहीं आजम के गुनाहों का फैसला हो पाएगा। योगी सरकार आजम के खिलाफ सख्त पैरवी कर रही है ताकि उनके गुनाहों की सजा मिल जाए, वहीं समाजवादी नेता ही नहीं कांग्रेस तक के नेता यह मानते हैं कि आजम खान बीजेपी सरकार के राजनैतिक उत्पीड़न के शिकार हुए हैं। अब सच क्या है यह फैसला तो कोर्ट से ही होगा, लेकिन इतना तय है कि योगी सरकार को यह नहीं भूलना चाहिए कि आजम खान कुछ मामलों में आरोपी होने के साथ-साथ सीनियर सिटीजन होने के अलावा जनप्रतिनिधि यानी सांसद भी हैं। ऐसे में योगी सरकार की यह जिम्मेदारी हो जाती है कि वह बिना किसी रार के आजम को वह सुविधाएं मुहैया कराए जिसके वह हकदार हैं, इसमें चिकित्सीय और अन्य सुविधाएं हो सकती हैं।

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