‘द लांसेट’ मेडिकल जगत की प्रतिष्ठा साप्ताहिक पत्रिका ने किसके इशारे पर की भारत की आलोचना

images (1)

डॉ. संजय वर्मा

करीब 200 साल पहले अंग्रेज सर्जन थॉमस वैक्ले ने ‘द लांसेट’ का पब्लिकेशन शुरू किया। मेडिकल जगत में इस साप्ताहिक शोध पत्रिका की खूब प्रतिष्ठा है, लेकिन क्या इसमें छपे हर वाक्य को गीता, बाइबल या कुरान जैसी महिमा मिलनी चाहिए? इधर, द लांसेट ने अपने संपादकीय में कोविड-19 महामारी की हैंडलिंग को लेकर भारत सरकार की आलोचना की है। उसने लिखा है कि मोदी सरकार की दिलचस्पी महामारी को नियंत्रित करने में कम, ट्विटर से अपनी आलोचनाएं हटाने में अधिक थी। यह भी लिखा गया कि इसके लिए भारत सरकार को ‘माफ नहीं किया जा सकता’।

लांसेट की पॉलिटिक्स
कोरोना की पहली लहर के बाद महामारी पर जीत का ऐलान करने और उसके बाद पश्चिम बंगाल की चुनावी रैलियों से लेकर हरिद्वार में महाकुंभ के आयोजन की छूट देने जैसे फैसलों पर सुप्रीम कोर्ट तक ने सवाल उठाए हैं। शीर्ष अदालत ने यहां तक कहा कि हम आपकी तरह शुतुरमुर्ग की मानिंद रेत में सिर छिपाकर नहीं रह सकते। बेशक, इस मामले में केंद्र सरकार कठघरे में है और उसकी जवाबदेही भी बनती है।

लेकिन क्या द लांसेट को भी इन्हीं बातों को दोहराना चाहिए? आखिर उसकी राजनीति क्या है? क्या आप जानते हैं कि इस जर्नल का प्रकाशन लंदन के अलावा न्यू यॉर्क और चीन की राजधानी पेइचिंग से भी होता है। चीन के शहर वुहान से यह महामारी दुनिया भर में फैली। इसकी पड़ताल की कोशिशों को चीन ने भरसक दबाने का प्रयास किया। और हाल में एक ऑस्ट्रेलियाई अखबार ने तो यह दावा तक किया है कि चीन ने एक जैविक हथियार के रूप में कोरोना का विकास किया है।

अब सवाल यह है कि एक मेडिकल जर्नल क्या करता है? द लांसेट के संपादकों को बखूबी मालूम है कि पत्रिका की भूमिका मेडिकल, प्री-क्लिनिकल और क्लिनिकल रिसर्च को सामने लाना, इलाज के तरीकों की समीक्षा करना और प्रमुख अध्ययनों के हवाले से उनके नतीजों को प्रकाशित करने तक सीमित है। लेकिन हाल के कुछ वर्षों में उसके रवैये से ऐसा लग नहीं रहा कि जिंदगी बचाने में चिकित्सा जगत की खूबियों को सामने लाना उसका मुख्य उद्देश्य है। इसके उलट वह चंद देशों के इशारे पर उनके अजेंडे को आगे बढ़ा रही है। उदाहरण के तौर पर, पिछले साल द लांसेट में एक लाख के करीब कोरोना मरीजों पर की गई शोध पर आधारित एक रिपोर्ट छपी। इसमें दावा किया गया कि हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन (एचसीक्यू) नामक दवा से कोविड-19 मरीजों में मौत का खतरा बढ़ जाता है। इस शोध की वजह से विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कोविड-19 के मरीजों पर एचसीक्यू के क्लिनिकल ट्रायल्स रोक दिए। बाद में इस जर्नल ने एक आंतरिक जांच को आधार बताते हुए एचसीक्यू वाली स्टडी को वापस ले लिया।

अब सवाल उठता है कि अगर शोध कार्य में गड़बड़ियां थीं, तो उसे इस जर्नल में प्रकाशित ही क्यों किया गया? साथ ही, एचसीक्यू से मौत के ज्यादा खतरे वाले दावे किसी के इशारे पर किए गए थे? इस मामले में उंगली चीन की तरफ उठी। कहा गया कि चीन नहीं चाहता था कि उससे पहले यूरोप, अमेरिका या भारत कोरोना की वैक्सीन बना ले क्योंकि इसमें एक विशाल बाजार की संभावना है।

चीन की मुश्किल
फर्जी डेटा और मनमाने विश्लेषण के बल पर साइंस और फार्मा के क्षेत्र में सुपर पावर बनने का सपना देख रहे चीन के लिए ऐसी गड़बड़ियां कराना कोई नई बात नहीं। चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग अपने देश को 2049 तक ग्लोबल साइंटिफिक ऐंड टेक्नॉलजी पावरहाउस बनाने का सपना देख रहे हैं। लेकिन यह कैसे होगा, इस पर खुद चीन में भारी उलझन है। 2017 में ऐसे कई फर्जीवाड़े सामने आने पर शियान जियाओतोंग यूनिवर्सिटी में अप्लायड फिजिक्स के प्रफेसर झांग ली ने माना था कि इस क्षेत्र में ग्लोबल लीडर बनने की मंशा पाल रहे चीन को पता नहीं है कि वह इस मंजिल तक कैसे पहुंचेगा। बेशक, चीन ने साइंस, रिसर्च और टेक्नॉलजी के क्षेत्र में काफी प्रगति की है, लेकिन उसे शोध कार्यों में पाइरेसी और खराब गुणवत्ता की समस्या से भी जूझना पड़ रहा है।

रिसर्च पेपर्स पर नजर रखने वाले ब्लॉग- रिट्रैक्शन वॉच के मुताबिक फेक पियर रिव्यू के कारण बहुत से चीनी शोधकर्ताओं को अपने रिसर्च पेपर्स वापस लेने पड़े। अप्रैल, 2017 में एक साइंटिफिक जर्नल ने दुनिया भर के जिन 107 बायॉलजी रिसर्च पेपर्स को खराब क्वॉलिटी और फर्जीवाड़े के आधार पर वापस किया था, उनमें से ज्यादातर के लेखक चीनी थे। उसी साल चीन के एक ऐसे जीन साइंटिस्ट ने अपना रिसर्च पेपर वापस लिया, जिसे देश में सिलेब्रिटी का स्टेटस मिल चुका था। एक समय तो उस वैज्ञानिक को नोबेल पुरस्कार का हकदार भी माना जाने लगा था। उसकी रिसर्च वापस हुई क्योंकि दूसरे वैज्ञानिक उसकी रिसर्च के आधार पर शोध के नतीजे नहीं दोहरा सके।

रिसर्च पेपर का ब्लैक मार्केट
उसी दौरान एक सरकारी जांच से पता चला कि चीन में रिसर्च पेपर्स का ऑनलाइन ब्लैक मार्केट चल रहा है, जहां पॉजिटिव पियर रिव्यू से लेकर पूरे-पूरे रिसर्च आर्टिकल तक बिकते हैं। आज कोई इस पर आसानी से यकीन न करे कि द लांसेट वाले ताजा मामले में चीन का कोई रोल हो सकता है, लेकिन देर-सबेर इन आशंकाओं पर दुनिया में चर्चा अवश्य छिड़ेगी कि आखिर जिन रिसर्च पेपरों के बल पर चीन साइंस-फार्मा के क्षेत्र में छा जाना चाहता है, उनकी सचाई क्या है।

हालांकि कठघरे में अकेले चीन नहीं है। पूरी दुनिया में ऐसे शोधपत्रों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। कहीं उनकी क्वॉलिटी को संदिग्ध बताया जाता है, तो कहीं उन्हें पूरी तरह कॉपी-पेस्टिंग का कमाल भर बताया जाता है। शोध कार्यों के मामले में भारत की स्थिति और भी खराब है। यहां तो शोध करने और रिसर्च पेपर लिखने को वक्त की बर्बादी ही माना जाता है।

(लेखक टाइम्स स्कूल ऑफ मीडिया, बेनेट यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं)

Comment:

betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
jojobet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti güncel giriş
onwin giriş
Kolaybet Giriş
casinolevant
ngsbahis giriş
artemisbet güncel
grandpashabet giriş
bettilt giriş
sahabet
sahabet
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
betgaranti
bettilt giriş
betgaranti giriş
betgaranti
betgaranti giriş
betgaranti
kolaybet giriş
casibom giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
betgaranti giriş
betnano güncel giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş