कार्ल मार्क्स : शैतान पूजा से साम्यवाद तक (अंतिम भाग)

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(सीताराम येचुरी के रामायण, महाभारत के संदर्भ से हिंदुओं को हिंसक बताये जाने पर वामपंथियों को दर्पण दिखाती तीन वर्ष पुरानी मेरी पोस्ट पुन: प्रस्तुत है।)

सोवियत यूनियन मामलों के विशेषज्ञ सोलज़ेनेत्सिन और ऐंटोनोफ ने इन आंकड़ों को बहुत कम माना है।ऐंटोनोफ के पिता , जिनके नेतृत्व में बोलशिविक क्रांति के दौरान

1917 में विंटर प्लेस पर धावा किया था , ने अपनी पुस्तक ‘ द टाइम औफ स्टालिन- पोर्ट्रेट औफ टिरनी’ में गणना कर बताया है कि शैतानी साम्यवाद ने देश में दस करोड़ लोगों का बेरहमी से कत्ल किया।अत: इस सीधे सवाल कि क्यों साम्यवाद कत्ल करता है का सीधा जवाब है कि मार्क्स ने 1848 में लिखे कम्युनिस्ट मैनिफेस्टो में साफ साफ लिखा कि साम्यवाद के मूलभूत उद्देश्यों को हासिल करने के लिये आबादी एक बड़े हिस्से को कत्ल कर दिया जाये।इसीकारण दुनियाभर के साम्यवादी , चाहें किसी भी मुखौटे के पीछे छिपे हों , कत्ल को अपना दायित्व मानते हैं।चूंकि मार्क्स दुनिया की हर वस्तु को मात्र गतिमान पदार्थ ही मानता है इसलिये नैतिकता , भावनाओं , शील , संस्कार का इसके लिये कोई महत्व नही है।मार्क्स का मानना था कि विचार और भावनायें पदार्थ की यानी मस्तिष्क की उपज हैं इसलिये इन्हें नियंत्रित करने के लिये जरूरी है कि मस्तिष्क को वश में कर लिया जाये।मार्क्स का यही पदार्थवाद है जो मनुष्य के विचार और प्रवित्ति को वश में कर उसके स्वभाव को गुलाम बना लेना चाहता है।देश और दुनियाभर में युवाओं को इसीलिये गुमराह किया जाता रहा है। यही शैतान पूजा के भी नियम और कार्यविधि है।

साम्यवाद तक पहुंचने के छ: चरण हैं।

1- क्रांति :

इस प्रथम चरण में हिंसक क्रांति के जरिये पूंजीवाद को नष्ट करना आवश्यक है।

2-सर्वहारा की तानाशाही :

क्रांति का उद्देश्य है कि वर्तमान बोर्जुआ व्यवस्था को उखाड़ कर असीमित तानाशाही के जरिये सर्वहारा की तानाशाही कायम की जाये।ऐसा होने पर सर्वहारा तो बस नाम भर का रह जाता है वास्तविक तानाशाह साम्यवादी नेतृत्व बन जाता है।

3- पूंजीवदी राज्य सत्ता का विध्वंश :

सफल क्रांति के बावजूद अनेक पूंजीवादी संस्थायें बची रह जाती हैं जैसे सेना ,पोलीस, न्यायालय , नौकरशाही और शिक्षा तंत्र।अगर इनको रहने दिया जाये तो ये प्रतिक्रांति द्वारा सर्वहारा की तानाशाही के लिये खतरा बन सकती हैं।इसलिये इस चरण में इन सबका ( मध्यम वर्ग का) संपूर्ण विध्वंश जरूरी है। सेना को समाप्त कर लाल सेना कायम करना ही उचित है। इसी वजह से वामपंथी सेना के खिलाफ जहर उगलते हुये इसे बलात्कारी और न्यायालय को कातिल कहते हैं।

4- संपूर्ण मध्यम वर्ग का खात्मा :

मार्क्स का मानना था कि सफल क्रांति के बाद भी यह वर्ग बड़ी संख्या में बचा रह जाता है और इसका खात्मा साम्यवाद की प्राप्ति के लिये अनिवार्य है।इसीलिये वामपंथी कत्ल करते हैं। इस चरण में पहुंचते ही कंबोडिया के वामपंथियों ने 24 घंटों के अंदर शहर.के.शहर खाली करवा दिये और करोडों लोगों को मौत के घाट उतार दिया।

5- समाजवाद का सृजन :

साम्यवाद के अंतिम आदर्श लक्ष को प्राप्त करने से पहले इस चरण से गुजरना जरुरी है।

6- साम्यवाद :

यह एक काल्पनिक चरण है और इसमें शैतान पूजक ने मुंगेरीलाल के हसीन सपनो का वादा किया है।व्यक्ति अपनी सारी कमजोरियों लालच , द्वेष आदि से मुक्त हो जाता है।इस चरण में कोई भी देश आजतक नहीं पहुंच पाया है। साम्यवाद एक झुनझुना ही साबित हुआ है।

अभी हिंदुस्तान में प्रथम चरण में ही वामपंथी उलझकर हजारों लोगों की हत्या में नित्य जुटे हैं।इनकी कल्पना है कि चौथे चरण तक पहुंचते हुये देश की आधी आबादी को कत्ल कर दिया जाये एक शैतान पूजक के नाम पर।

क्या हम आप इसके लिये तैयार हैं ?

संदर्भ :
1-Marx and Satan
-Richard Wurmbrand

2- Communist Manifesto
– Marx and Engels

3- The Schwarz Report- Essays

4- Why Communism Kills: The Legacy of Karl Marx.
– Dr Fred C Schwarz

…समाप्त
– अरुण लवानिया

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