अहिल्या के पत्थर बनने का सच

images (46)

अहिल्या के पत्थर बनना
शंका – क्या वह सत्य है?
समाधान
स्वामी दयानन्द ने इस शंका का समाधान किया है।
“इन्द्रा गच्छेति । गौरावस्कन्दिन्नहल्यायै जारेति । तधान्येवास्य चरणानि तैरेवैनमेंत्प्रमोदयिषति ।।”
शत. का. ३ अ. ३ । ब्रा. ४ । कं. १८
“रेतः सोम ।।”
शत. का. ३ । अ. ३ । ब्रा. २ । कं. १
“रात्रिरादित्यस्यादित्योददयेर्धीयते” निरू. अ.१२ । खं. ११
“सुर्य्यरश्पिचन्द्रमा गन्धर्वः।।
इत्यपि निगमो भवति ।
सोअपि गौरुच्यते।।”
निरू. अ. २ । खं. ६
“जार आ भगः जार इव भगम्।।
आदित्योअत्र जार उच्यते,
रात्रेर्जरयिता।।”
निरू. अ. ३ । खं. १६

 


(इन्द्रागच्छेती.) अर्थात उनमें इस रीति से है कि सूर्य का नाम इन्द्र ,रात्रि का नाम अहल्या तथा चन्द्रमा का गोतम है। यहाँ रात्रि और चन्द्रमा का स्त्री-पुरुष के समान रूपकालंकार है। चन्द्रमा अपनी स्त्री रात्रि के साथ सब प्राणियों को आनन्द कराता है और उस रात्रि का जार आदित्य है। अर्थात जिसके उदय होने से रात्रि अन्तर्धान हो जाती है। और जार अर्थात यह सूर्य ही रात्रि के वर्तमान रूप श्रंगार को बिगाड़ने वाला है। इसीलिए यह स्त्री पुरुष का रूपकालंकार बांधा है, कि जिस प्रकार स्त्री पुरुष मिलकर रहते हैं, वैसे ही चन्द्रमा और रात्रि भी साथ-साथ रहते हैं।
चन्द्रमा का नाम गोतम इसलिए है कि वह अत्यन्त वेग से चलता है। और रात्रि को अहल्या इसलिये कहते हैं कि उसमें दिन लय हो जाता है । तथा सूर्य रात्रि को निवृत्त कर देता है, इसलिये वह उसका जार कहाता है।
इस उत्तम रूपकालंकार को अल्पबुद्धि पुरुषों ने बिगाड़ के सब मनुष्य में हानिकारक मिथ्या सन्देश फैलाया है। इसलिये सब सज्जन लोग पुराणोक्त मिथ्या कथाओं का मूल से ही त्याग कर दें ।
ऋग्वेदादिभाष्यभूमिका के ‘ग्रन्थप्रामाण्याप्रामाण्यविषयः’ अध्याय में महर्षि दयानन्द लिखते हैं कि इन्द्र और अहल्या की कथा मूढ़ लोगों ने अनेक प्रकार से बिगाड़ कर लिखी है। उन्होंने ऐसा मान रखा है कि ‘देवों का राजा इन्द्र देवलोक में देहधारी देव था। वह गौतम ऋषि की स्त्री अहल्या के साथ छल से जारकर्म किया था । जब दोनों को गौतम ने देख लिया, तब इस प्रकार शाप दिया कि, “इन्द्र ! तू हजार भगवाला हो जा।”
अहल्या को शाप दिया, “तू पाषाणरूप हो जा।”
परन्तु जब उन्होंने गौतम की प्रार्थना की कि हमारे शाप का मोक्ष कैसे वा कब होगा?
तब इन्द्र से तो कहा कि तुम्हारे हजार भग के स्थान में हजार नेत्र हो जायं, और अहल्या को वचन दिया कि जिस समय रामचन्द्र अवतार लेकर तुझ पर अपना चरण लगावेंगे, उस समय तू फिर अपने स्वरूप में आजावेगी ।
महर्षि दयानन्द लिखते हैं कि इस प्रकार से पुराणों में यह कथा बिगाड़ कर लिखी गई है । सत्य ग्रन्थों में ऐसा नहीं है । सत्यग्रन्थों में इस कथा का स्वरूप निम्न प्रकार है ।
सूर्य का नाम इन्द्र है, रात्रि का नाम अहल्या है तथा चन्द्र का नाम गौतम है। यहां रात्रि और चन्द्रमा का स्त्री-पुरूष के समान रूपक अलंकार है। चन्द्रमा अपनी स्त्री रात्रि से सब प्राणियों को आनन्द कराता है और उस रात्रि का जार आदित्य है। अर्थात् जिस (सूर्य) के उदय होने से (वह) रात्रि के वर्तमान रूप श्रृंगार को बिगाड़ने वाला है । इसलिये यह स्त्री पुरूष का रूपकालंकार बांधा है । जैसे स्त्री-पुरूष मिल कर रहते हैं, वैसे ही चन्द्रमा और रात्रि भी साथ-साथ रहते हैं। चन्द्रमा का नाम ‘गौतम’ इसलिये है कि वह अत्यन्त वेग से चलता है और रात्रि को ‘अहल्या’ इसलिये कहते हैं कि उसमें दिन का लय हो जाता है। सूर्य (इन्द्र) रात्रि को निवृत्त कर देता है, इसलिए वह उसका ‘जार’ कहलाता है । इस उत्तम रूपकालंकार विद्या को अल्प बुद्धि पुरूषों ने बिगाड़ के सब मनुष्यों में हानिकारक फल धर दिया है। इसलिये सब सज्जन लोग पुराणों की मिथ्या कथाओं का मूल से ही त्याग कर दें।
ऐसी अनेक मिथ्या कथायें पुराणों में दी गई हैं जिन्हें विवेकशील मनुष्यों को स्वीकार नहीं करना चाहिये । रामायण में यह कथा वैदिक ग्रन्थों से आयातित है।
वाल्मीकि रामायण ४९/१९ में लिखा है कि राम और लक्ष्मण ने अहिल्या के पैर छुए। यही नहीं राम और लक्ष्मण को अहिल्या ने अतिथि रूप में स्वीकार किया और पाद्य तथा अधर्य से उनका स्वागत किया । यदि अहिल्या का चरित्र सदिग्ध होता तो क्या राम और लक्ष्मण उनका आतिथ्य स्वीकार करते ?
विश्वामित्र ऋषि से तपोनिष्ठ अहिल्या का वर्णन सुनकर जब राम और लक्ष्मण ने गौतम मुनि के आश्रम में प्रवेश किया तब उन्होंने अहिल्या को जिस रूप में वर्णन किया है, उसका वर्णन वाल्मीकि ऋषि ने बाल कांड ४९/१५-१७ में इस प्रकार किया है |
“स तुषार आवृताम् स अभ्राम् पूर्ण चन्द्र प्रभाम् इव |
मध्ये अंभसो दुराधर्षाम् दीप्ताम् सूर्य प्रभाम् इव ||”
४९-१५
“सस् हि गौतम वाक्येन दुर्निरीक्ष्या बभूव ह |
त्रयाणाम् अपि लोकानाम् यावत् रामस्य दर्शनम् |”
(४९-१६)
तप से देदिप्तमान रूप वाली, बादलों से मुक्त पूर्ण चन्द्रमा की प्रभा के समान तथा प्रदीप्त अग्नि शिखा और सूर्य से तेज के समान अहिल्या तपस्या में लीन थी।
सत्य यह हैं की देवी अहिल्या महान तपस्वी थी जिनके तप की महिमा को सुनकर राम और लक्ष्मण उनके दर्शन करने गए थे । विश्वामित्र जैसे ऋषि राम और लक्ष्मण को शिक्षा देने के लिए और शत्रुओं का संहार करने के लिए वन जैसे कठिन प्रदेश में लाये थे। और किसी सामान्य महिला के दर्शन कराने हेतु नहीं लाये थे।
…. संजय कुमार

Comment:

betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti güncel giriş
Kolaybet Giriş
ngsbahis giriş
artemisbet güncel
bettilt giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti
kolaybet giriş
bettilt giriş
betgaranti giriş
betnano güncel giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
hititbet
sahabet
sahabet
kolaybet giriş
Kolaybet Giriş
betgaranti giriş
casibom giriş
betgaranti giriş
holiganbet
sahabet
sahabet
onwin
sahabet
sahabet
sahabet
sahabet
holiganbet
onwin
onwin
onwin
grandpashabet giriş
sahabet giriş
onwin giriş
bettilt giriş
Betgaranti
sahabet giriş
sahabet giriş
betgaranti
norabahis giriş
norabahis giriş
betgaranti giriş
tipobet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
Kolaybet Giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
onwin giriş
onwin giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
onwin giriş
onwin giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
grandpashabet giriş