Categories
इतिहास के पन्नों से

आर एस एस का इतिहास और उसकी देश भक्ति

बाल मुकुन्द ओझा

आरोप लगाने वाले जरा RSS का इतिहास पढ़ लें तो राष्ट्रभक्ति से उनका भी परिचय हो जायेगा
कांग्रेस सहित कई संगठन संघ पर गाँधी की हत्या सहित देश के विभाजन का आरोप लगाने में नहीं चूक रहे हैं। संघ पर गांधी हत्या में लिप्त होने का आरोप एक फैशन बन गया है। संघ के पुरजोर खंडन के बाद भी आजादी के बाद से ही लगातार यह मामला गर्माता रहा है।

आजादी के बाद से ही कांग्रेस के निशाने पर रहा है राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ। लाख प्रयासों के बावजूद कांग्रेस संघ को समाप्त करना तो दूर हाशिये पर लाने में सफल नहीं हुई। संघ को खत्म करने के चक्कर में खुद कांग्रेस अपना वजूद समाप्त करने की ओर अग्रसर है। बापू की हत्या के आरोप सहित कई बार प्रतिबन्ध की मार झेल चुका यह संगठन आज भी लोगों के दिलों में बसा है और यही कारण है की इसका एक स्वयं सेवक प्रधानमंत्री के पद पर है और अनेक स्वयं सेवक राज्यों के मुख्यमंत्री है। संघ सांप्रदायिक है या देशभक्त यह दंश आज भी सियासत पाले हुए है मगर यह सच है की देश की बहुसंख्यक जनता के दिलों में संघ अपना स्थान बना चुका है। समाजवादी नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया के बाद जयप्रकाश नारायण अकेले व्यक्ति हैं जिन्होंने आरएसएस को देश की मुख्यधारा में वैधता दिलाने और ‘गांधी के हत्यारे’ की छवि से बाहर निकालने में सबसे अहम भूमिका निभाई। बाद में यही कार्य जॉर्ज फर्नांडीज ने किया। जेपी ने तो यहाँ तक कह दिया ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यदि फासिस्ट संगठन है तो जयप्रकाश भी फासिस्ट है’। संघ को वैधता दिलाने में पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी पीछे नहीं रहे। परिवार और कांग्रेस के भारी विरोध के बावजूद वे नागपुर में संघ मुख्यालय गए। यह पहला अवसर था कि इतने बड़े कद के किसी कांग्रेसी नेता को संघ मुख्यालय में जाते देखा गया। कांशीराम, नीतीश कुमार और रामविलास पासवान भी संघ को अछूत नहीं मानते थे। देश में अनेक विपदाओं के दौरान संघ के कार्यकर्ताओं ने समाज सेवा की अनूठी मिसाल कायम की, यह किसी से छिपा नहीं है।

कांग्रेस सहित कई संगठन संघ पर गाँधी की हत्या सहित देश के विभाजन का आरोप लगाने में नहीं चूक रहे हैं। संघ पर गांधी हत्या में लिप्त होने का आरोप एक फैशन बन गया है। संघ के पुरजोर खंडन के बाद भी आजादी के बाद से ही लगातार यह मामला गर्माता रहा है और नेता लोग गाहे बगाहे चिंगारी लगाते रहते हैं। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ इस समय विश्व के सबसे बड़े सांस्कृतिक और स्वयंसेवी संगठन के रूप में स्थापित है। संघ की स्थापना 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी। महाराष्ट्र के नागपुर में पांच स्वयंसेवकों से प्रारम्भ होने वाला संगठन आज समूचे देश में लाखों−करोड़ों स्वयं सेवकों के साथ विस्तारित रूप में विद्यमान है। वर्तमान में संघ की देशभर में 57 हजार से अधिक शाखाएँ नियमित रूप से संचालित हैं। संघ के अनुसार समाज में देशभक्त, अनुशासित, चरित्रवान और निस्वार्थ भाव से काम करने वाले लोगों की आवश्यकता रहती है। संघ ऐसे लोगों को तैयार कर संगठित करने का कार्य करता है। उनमें देशभक्ति की भावना जगाता है। संघ का कहना है कि संघ समाज में एक संगठन ना बनाकर सम्पूर्ण समाज को ही संगठित करने का प्रयास करता है।

संघ देशभक्त संगठन है या विभाजनकारी, इस पर विवेचन से पहले हमें संघ के इतिहास पर गौर करने की आवश्यकता है। संघ के संस्थापक और प्रथम सरसंघ चालक डॉ. हेडगेवार कांग्रेस के सदस्य और स्वतंत्रता सेनानी रहे हैं। उन्हें 1921 में खिलाफत आंदोलन के दौरान एक साल की सजा हुई थी। अतः यह कहना या आरोपित करना सत्य नहीं है कि संघ स्वतंत्रता आंदोलन का पक्षधर नहीं था। डॉ. हेडगेवार (1925−40), माधव सदाशिव गोलवलकर (1940−73), बाला साहब देवरस (1973−93), प्रोफेसर राजेन्द्र सिंह (1993−2000), के.सी. सुदर्शन (2000−2009) और डॉ. मोहनराव भागवत 2009 से अब तक संघ चालक के पद पर कार्यरत हैं।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर पहली विपदा महात्मा गांधी की हत्या के दौरान आई जब हत्यारे नाथूराम गोडसे को संघ का स्वयंसेवक बताकर संघ पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया था। बाद में एक जांच समिति ने संघ पर लगे आरोपों को सही नहीं बताया तब संघ से प्रतिबन्ध हटा लिया गया और एक बार फिर संघ ने स्वतंत्र होकर अपना कार्य शुरू किया। संघ पर इस दौरान यह आरोप लगाया गया कि वह हिन्दू अधिकारों की वकालत करता है। मगर संघ का कहना है कि हिन्दुत्व एक जीवन पद्धति है। भारत एक धर्म निरपेक्ष राष्ट्र है तो इसका कारण यह है कि यहाँ हिन्दू बहुमत में हैं। बताया जाता है कि 1962 में भारत−चीन युद्ध के दौरान संघ के अप्रतिम सेवाभावी कार्यों से प्रभावित होकर तत्कालीन प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू ने 1963 में गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने का संघ को निमंत्रण दिया। दो दिन की अल्प सूचना के बावजूद तीन हजार गणवेशधारी स्वयं सेवक उस परेड में शामिल हुए। यहाँ यह प्रश्न उत्पन्न होता है कि संघ गांधी हत्यारा था तो पं. नेहरू ने उसे देशभक्त संगठन मानकर परेड में शामिल क्यों किया।

संघ पर दूसरी विपदा 1975 में तब आई जब आपातकाल के दौरान उस पर प्रतिबन्ध लगाकर हजारों स्वयंसेवकों को कारागार में डाल दिया गया। आपातकाल के बाद संघ से प्रतिबन्ध हटाया गया और संघ ने पुनः अपना कार्य प्रारम्भ किया।

संघ विचारकों का मानना है कि डॉ. राममनोहर लोहिया और लोक नायक जय प्रकाश नारायण सरीखे देश भक्तों ने कभी संघ का विरोध नहीं किया और समय−समय पर संघ कार्यों की प्रशंसा की। विभिन्न गुटों में बंटे उनके कथित समाजवादी अनुयायी अपने राजनैतिक लाभों को हासिल करने के लिए उनका विरोध करते हैं। पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी भी संघ के नागपुर में आयोजित एक कार्यक्रम में भाग लेकर कांग्रेस को झटका दे चुके हैं। उन्होंने संघ के संस्थापक हेडगेवार को बड़ा देशभक्त बताया था।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
kolaybet giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark güncel giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark güncel giriş
jojobet güncel
betgaranti giriş
betgaranti güncel giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meritbet giriş
meritbet giriş
jojobet
jojobet
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet giriş
favorisen
betpark giriş
hitbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpas giriş
bettilt giriş
hitbet giriş
hitbet
interbahis giriş
hitbet giriş
betpark