कांग्रेस अध्यक्ष पद के लिए राहुल गांधी को फिर लाये जाने की तैयारी अपने अंतिम चरण में

images (28)

अजय कुमार

कांग्रेस आलाकमान द्वारा भले ही जून में कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव कराने की घोषणा की गई है, लेकिन इस पर किसी को विश्वास नहीं है। वैसे भी जून में चुनाव कराने का फैसला गांधी परिवार ने काफी दबाव में लिया है।

2019 लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी हार के बाद पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाले राहुल गांधी एक बार फिर कांग्रेस की कमान संभालने के इच्छुक दिख रहे हैं। हालांकि इस सवाल पर अभी कोई कांग्रेसी सार्वजनिक रूप से अपनी जुबान खोलने को तैयार नहीं है, लेकिन कांग्रेसियों की भाव भंगिमा यही बता रही है कि पार्टी के नये अध्यक्ष की खोज पूरी हो गई है। राहुल गांधी ही कांग्रेस के अगले अध्यक्ष होंगे। यह सच है कि कांग्रेस को 2019 लोकसभा चुनाव में मिली ‘ऐतिहासिक’ हार के बाद तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने नैतिकता के आधार पर अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था और यहां तक कह दिया था कि कांग्रेस का अगला अध्यक्ष गांधी परिवार से नहीं होगा, लेकिन राहुल के इस्तीफे के तुरंत बाद ही सोनिया गांधी ने कांग्रेस का अंतरिम अध्यक्ष पद संभाल कर यह साफ संकेत दे दिया कि गांधी परिवार कहता कुछ और करता कुछ और है।

उधर, सोनिया के अंतरिम अध्यक्ष बनने के करीब दो वर्ष के बाद भी कांग्रेस को नया गैर गांधी अध्यक्ष नहीं मिल पाया है। बल्कि तब से लेकर आज तक राहुल गांधी ही पर्दे के पीछे से पार्टी की कमान संभाले हुए हैं। उनकी मर्जी के बिना कांग्रेस में कोई बड़ा बदलाव नहीं होता है। अब तो राहुल गांधी के सुर भी बदल गए हैं। वह एक बार फिर यू-टर्न लेते हुए पार्टी की बागडोर संभालने को तैयार लग रहे हैं। परंतु इसके लिए वह कोई रिस्क नहीं लेना चाहते हैं। इसीलिए कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव जून में कराए जाने की बात कहकर गांधी परिवार पांच राज्यों के चुनाव से अपना ‘पल्ला’ झाड़ने की कोशिश में लगा है। पांच राज्य जहां चुनाव होने हैं, उसमें पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और केन्द्र शासित पुडुचेरी शामिल हैं, वहां कांग्रेस की स्थिति बिल्कुल भी अच्छी नहीं है। कांग्रेस क्षेत्रीय दलों के सहारे अपनी नैया पार लगाने की कोशिश में है। फिर भी कांग्रेस अपनी नाक और साख नहीं बचा पाई तो राहुल गांधी के अध्यक्ष होने के नाते हार का ठीकरा भी उनके सिर ही फूटेगा।

बहरहाल, कांग्रेस आलाकमान द्वारा भले ही जून में कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव कराने की घोषणा की गई है, लेकिन इस पर किसी को विश्वास नहीं है। वैसे भी जून में चुनाव कराने का फैसला गांधी परिवार ने काफी दबाव में लिया है। हकीकत में गांधी परिवार स्वयः चुनाव के लिए तैयार नहीं दिख रहा है कि कामचलाऊ व्यवस्था खत्म हो और पार्टी को नये गैर-गांधी अध्यक्ष के हाथों सौंप दिया जाए। कहा जाता है कि यदि पार्टी के 23 वरिष्ठ नेता बगावती अंदाज में कांग्रेस अध्यक्ष पद का चुनाव कराये जाने की बात पर अड़ते तो अध्यक्ष के लिए चुनाव की पहल इतनी भी आगे नहीं बढ़ी होती। यह मानने के अच्छे-भले कारण हैं कि पार्टी नेताओं का एक समूह नेतृत्व के मामले में कामचलाऊ व्यवस्था को बनाए रखना चाहता है। यह समूह उन नेताओं का विरोध भी कर रहा है, जो संगठन के साथ अध्यक्ष के चुनाव जल्द से जल्द चाह रहे हैं। इसकी झलक कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में देखने को भी मिली थी, जब राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और चुनाव की मांग कर रहे वरिष्ठ कांग्रेस नेता आनंद शर्मा में तीखी नोंकझोंक हो गई थी। हालात बिगड़ते इससे पहले राहुल गांधी ने दोनों वरिष्ठ नेताओं को समझा-बुझाकर शांत करा दिया।

दरअसल, कांग्रेस का भला हो इसकी चिंता पार्टी के भीतर कम ही नेताओं को दिखाई दे रही है। इसके उलट पार्टी में वह खेमा ज्यादा सशक्त है जो गांधी परिवार की चाटुकारिता में लगा रहता है। ये चाटुकार नेता अपने स्वार्थों को सिद्ध करने के लिए यथास्थिति कायम रखना चाह रहे हैं, सबसे दुखद यह है कि जो नेता विधायिका का चुनाव तक नहीं जीत पाते हैं, वह गांधी परिवार के ‘तारणहार’ बने हुए हैं। इसकी पुष्टि इससे होती है कि कांग्रेस कार्यसमिति में शामिल इस तरह के नेता पार्टी हित में कोई फैसला लेने की बजाय सब कुछ सोनिया गांधी पर छोड़ देते हैं। चाटुकार नेताओं को इस बात का अच्छी तरह से अहसास है कि गांधी परिवार की कथनी और करनी में काफी अंतर है। परिवार पार्टी की बागडोर अपने हाथ से निकलने नहीं देना चाह रहा है। यहां तक कि सोनिया गांधी बेटी प्रियंका वाड्रा पर भी इतना भरोसा नहीं करती हैं कि उन्हें अध्यक्ष का पद सौंप दिया जाए, जबकि प्रियंका को अध्यक्ष बनाये जाने की मांग पार्टी के भीतर लंबे समय से चल रही है। क्या यह संभव है कि सोनिया और राहुल गांधी मन बना लें तो कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव न हो ? गांधी परिवार को भी यथास्थिति रास आ रही है। बस, इंतजार इस बात का है कि कहीं से चुनाव के नतीजे वैसे ही कांग्रेस के पक्ष में आ जाएं जैसे मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में आए थे, तब इन चुनावों में जीत का श्रेय राहुल गांधी को देते हुए उनकी कांग्रेस अध्यक्ष के पद पर ताजपोशी कर दी गई थी। इसीलिए कांग्रेस को पांच राज्यों में होने वाले चुनाव से काफी उम्मीद है।

अगर कांग्रेस की इच्छानुसार नतीजे नहीं आए तो यह कहना कठिन है कि कांग्रेस अध्क्षय का सवाल कब और कैसे सुलझेगा ? समस्या केवल यह नहीं है कि अध्यक्ष के चुनाव को टाला जा रहा है, बल्कि उन मुद्दों का कहीं कोई समाधान होता नहीं दिखता, जो 23 नेताओं ने अपनी चिट्ठी में उठाए थे। निःसंदेह कांग्रेस के लिए गांधी परिवार मजबूरी भी है और जरूरी भी, लेकिन यह भी सही है कि राजनीतिक दल का संचालन सरकारी विभाग की तरह नहीं किया जा सकता। बेहतर होगा कि गांधी परिवार कांग्रेस की कमजोर होती स्थिति का खुले मन से आकलन करें। अभी तो कांग्रेस को यही नहीं पता है कि उसे किस लाइन पर चलना है और कौन-सी लाइन को नहीं छूना है। कांग्रेस जब तक देशहित में फैसले लेने की जगह मोदी विरोध की आग में झुलसती रहेगी, तब तक कांग्रेस का उद्धार होने वाला नहीं है। लब्बोलुआब यह है राहुल गांधी पार्टी की कमान तो संभालना चाहते हैं, लेकिन मोदी के सामने अपने आप को कमजोर नहीं दिखाना चाहते हैं। उधर, राहुल जैसे ही अध्यक्ष पद संभालते हैं, कांग्रेस को मिली हार का ठीकरा भाजपाई राहुल गांधी के सिर फोड़ना शुरू कर देते हैं। इसीलिए मोदी से सामने से मोर्चा लेने की बजाए राहुल अपना चेहरा छिपा कर उनसे लड़ने को ज्यादा आतुर दिखते हैं।

Comment:

betpark giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
savoycasino giriş
savoycasino giriş
savoycasino giriş
savoycasino giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
holiganbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
holiganbet güncel giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
holiganbet güncel
holiganbet giriş
bettilt giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
klasbahis giriş
klasbahis giriş
klasbahis
holiganbet güncel
imajbet güncel
bettilt giriş
bettilt giriş
holiganbet güncel giriş
betpark giriş
betpark giriş
bettilt giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
grandpashabet giriş