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आज का चिंतन

विश्व का सबसे प्रथम व्यवसाय शिक्षा प्रदान करना है

दार्शनिक विचार

आप किसी विदेशी द्वारा लिखी पुस्तक उठा कर देखिये। उसमें लिखा है कि विश्व का सबसे प्रथम व्यवसाय वेश्या वृति है। अचरज मत करे। आप इंटरनेट पर खोज करके देखे। सत्य आपके समक्ष आ जायेगा। पश्चिम की इस मान्यता का अनुसरण हमारे भारत के वामपन्थी आँख बंद कर करते हैं। पर कभी किसी ने विचार किया कि इस भ्रामक मान्यता का आधार क्या हैं। शोध करने पर ज्ञात हुआ कि इस मान्यता का प्रारम्भ बाइबिल से हुआ हैं।

बाइबिल के 1 kings 11 में सुलेमान नामक राजा का वर्णन मिलता है जिसकी 700 पत्नियां और 300 दासियाँ रखेल थी। यह राजा इतना कामुकी था कि इनसे भी कभी संतुष्ट नहीं हुआ। उसकी दुर्गति का कारण भी बना। वैसे बाइबिल में रखेल रखने का वर्णन अनेक स्थानों पर मिलता हैं। जैसे Abraham (Genesis 25:6), Jacob (Genesis 35:22), Caleb (1 Chronicles 2:46), Saul (2 Samuel 3:7), David (2 Samuel 5:13), and Rehoboam (2 Chronicles 11:21) इससे हमें उस काल की सामाजिक अवस्था के दर्शन होते है। पर खेद यह है कि इस पतन काल को आधार बनाकर ईसाइयों ने वेश्या वृति को विश्व का प्रथम व्यवसाय घोषित कर दिया।

अब पाठक को इस गन्दगी से बाहर निकालकर सत्य के दर्शन करवाते है। वैदिक मान्यता के अनुसार विश्व का सर्वप्रथम व्यवसाय शिक्षा प्रदान करना है। सृष्टि के आदि में चार ऋषि अग्नि, वायु, आदित्य और अंगिरा के हृदय में ईश्वर ने चारों वेदों का ज्ञान प्रकाशित किया। उस ज्ञान को उन्होंने मनुष्य समाज को सिखाया। इससे यही सिद्ध होता है कि सृष्टि का सर्वप्रथम व्यवसाय शिक्षा प्रदान करना है।

सृष्टि के आरम्भ में वेद वाणी के पति परमात्मा ने पवित्र ऋषियों की आत्मा में अपनी प्रेरणा से विभिन्न पदार्थों का नाम बताने वाली वेद वाणी को प्रकाशित किया।-बृहस्पते प्रथमं वाचो अग्रं यत्प्रैरत नामधेयं दधानाः । यदेषां श्रेष्ठं यदरिप्रमासीत्प्रेणा तदेषां निहितं गुहाविः।-ऋग्वेद 10/71/1

वैदिक परम्परा कितने श्रेष्ठ है। आप इस उदाहरण से समझ सकते है।

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