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आतंकवाद

‘बस नाम रहेगा अल्लाह का , हम देखेंगे हम देखेंगे’- नारे के सही अर्थ और संदर्भ

👉बस नाम रहेगा अल्लाह का !
👉👉हम देखेंगे, हम देखेंगे !!

एक संभोग क्रिया होती है,इसे निषेचन अथवा मैथुन भी कहते हैं। यही संभोग जब पति पत्नी के बीच होता है तो मंगल,शुभदायक और वंशवृद्धि हेतु आवश्यक माना जाता है।
यही संभोग जब किसी वेश्या से किया जाता है तो वह नीच और अशुभ माना जाता है।

लेकिन यही संभोग का प्रयोग जब किसी स्त्री या पुरुष के साथ ज़ोर जबरदस्ती के साथ किया जाता है तो वह बलात्कार अधम, पतित और दंडनीय होता है ।

देखिये संभोग की क्रिया एक ही है, कोई अंतर नहीं,पर मंशा और उद्देश्य अलग हैं।एक वंश को बढाने के लिए और शुभदायक है और दूसरा अमंगलकारक है ।

उद्देश्य ….

एक हत्या होती है ,यह हत्या जब कोई सैनिक अपने देश या किसी की जान बचाने के लिए करता है तो उसको वीरता और शौर्यता से सम्मानित किया जाता है
और यही हत्या जब कोई आतंकवादी करता है तो उसको दंड भोगना पड़ता है ।गीता में आतंकी अथवा धर्म विरोधी की हत्या को मोक्ष प्रदान करना अथवा वध करना कहा है।

देखिये क्रिया एक ही है पर उद्देश्य और मंशा अलग अलग है ।

एक व्यक्ति भौतिकी या रसायन पढ़कर नाभिकीय ऊर्जा का प्रयोग सृजनात्मक उद्देश्य से कर रहा है और वहीं दूसरा व्यक्ति वही पढ़कर नाभिकीय ऊर्जा का प्रयोग बम बनाकर विनाशकारी उद्देश्य से कर रहा है ।

बच्चा जब माँ की गोद में माँ को लात मारता है तो माँ को कोई फ़र्क नहीं पड़ता पर वही उसी का बच्चा जब बड़ा होकर वही लात मारता है तो निंदनीय है ।

अब देखिए उपरोक्त सभी उदाहरण में क्रिया एक ही है रंचमात्र भी अंतर नहीं है , परंतु नियम, काल , परिस्थिति और उद्देश्य के अनुसार उसके प्रभाव में परिवर्तन आ गया और वही क्रिया एक जगह निंदनीय हो गयी तो एक जगह सम्मानीय ।

तो ठीक इसी प्रकार किसी भी कविता या शायरी को समझने से पहले यह देखना चाहिए कि उसको लिखने वाला कौन , किस भाव का , किस गुण ( सात्विक , राजसिक , तामसिक ) , किस परिस्थिति , किस समय ,किस परिवेश में ,किस निमित्त लिख रहा है ,उस पर निर्भर करता है ।

अगर सूरदास जी अथवा कोई साधु कहें कि तेरे मुखारविंद पर मैं पूरा जीवन न्योछावर कर दूँ तो ज़ाहिर सी बात है लोग भक्ति में डूब जायेंगे और यही वाक्य शशि थरूर या कोई वेश्यागामी प्रवृत्ति का व्यक्ति बोले तो अंतर सुस्पष्ट है तो एकमात्र उद्देश्य या मंशा ही मुख्य है ।

इसी तरह सी०ए०ए० के विरोध में “FUCK HINDUSIM” , “सब बुत उठवाए जायेंगे बस नाम रहेगा अल्लाह का” ,चूड़ी बिंदी और भारतीय परिधानों का विरोध परंतु गैरमुस्लिम युवती व महिला से निकाह और फिर मतांतरण, हिंदू देवी देवताओं का अपमान , भगवा का अपमान , शास्त्रों का विरोध इत्यादि यह दर्शाता है कि यह जो विरोध हो रहा है उसका मूल उद्देश्य सी०ए०ए० न होकर कुछ और ही है ।
चाकू सही है पर उसका उपयोग करने वाला किस तरह उपयोग कर रहा है , यह मायने रखता है ।
चाकू से वह हत्या कर रहा है या फल सब्जियाँ छील रहा है ,यह उद्देश्य उस चाकू को सही गलत बताता है ।

इसलिए किसी भी कवित्त ,शायरी , नज़्म का प्रयोग करने वाला कौन है , किसलिए कर रहा है ,किस उद्देश्य से किया जा रहा है , यही उसके ग़लत सही का परिमाप है ।
अतः यह नज़्म ,इसको प्रयोग करने वाले लोग,परिस्थिति और समय के हिसाब से पूर्णतया हिन्दू और देश विरोधी है ।

कृष्ण कुमार सिंह

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