Categories
महत्वपूर्ण लेख

पाकिस्‍तान का आंखों देखा हाल

इस्‍लामाबाद से डॉ. वेदप्रताप वैदिक

navaj

मुझे पाकिस्तान आए एक हफ्ता हो गया है। हम लोग आए थे, एक भारत-पाक संगोष्ठी में भाग लेने ताकि नरेंद्र मोदी और नवाज शरीफ ने जो पहल की है, उसे आगे बढ़ाया जा सके, लेकिन इस समय पाकिस्तान की राजनीति में अचानक दो बड़े तहलके मच गए हैं। एक तो सरकार ने आतंकवादियों के विरुद्ध युद्ध छेड़ दिया है और दूसरा लाहौर के मॉडल टाउन में भयंकर रक्तपात हो गया है। यहां सभी टीवी चैनलों और अखबारों में पिछले तीन-चार दिन से लाहौर छाया हुआ है। उत्तरी वजीरिस्तान में पाकिस्तानी फौज जिस बहादुरी से आतंकवादियों को खदेड़ रही है, यह ऐतिहासिक और अपूर्व घटना भी फिलहाल हाशिए में चली गई है।
ऐसा क्यों हो रहा है? ऐसा इसलिए कि ऐसा होने की दूर-दूर तक कोई संभावना नहीं थी। सारा पाकिस्तान मियां नवाज शरीफ और फौज का दीवाना हो रहा था कि उन्होंने आखिरकार आतंकवादियों को खत्म करने के लिए बाकायदा युद्ध छेड़ दिया है। लगभग सभी पार्टियों और संसद ने शरीफ के इस कठोर निर्णय पर मुहर लगा दी थी। शरीफ खुद इतने आश्वस्त थे कि इस युद्ध की घोषणा करके वे ताजिकिस्तान-यात्रा पर चले गए, लेकिन लाहौर के प्रसिद्ध मोहल्ले मॉडल टाउन में शरीफ का पुराना घर है और उनके पास ही डॉ. ताहिरुल कादिरी का भी घर है। कादिरी के घर के आस-पास सड़कों पर कुछ बाड़ लगी हुई थीं, जैसी कि अन्य बड़े लोगों के घर के आस-पास लगी हुई हैं।

कादिरी ‘पाकिस्तान अवामी तहरीक’ पार्टी के नेता हैं। कनाडा में रहते हैं और जबर्दस्त वक्ता हैं। उनकी सभाओं में लाखों लोग जमा हो जाते हैं, जैसे कि अन्ना हजारे के अनशन में होते थे। वैसे अन्ना और कादिरी की कोई तुलना नहीं है। कादिरी 23 जून को पाकिस्तान आने वाले हैं। पता नहीं क्यों, पंजाब सरकार ने कादिरी के घर के सामने की बाड़ें हटाने का फैसला किया और रात दो बजे पुलिस टूट पड़ी। कादिरी के सैकड़ों समर्थकों ने विरोध किया। पुलिस ने बेरहमी से गोलियां चलाईं। अब तक 14 लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए हैं। लाहौर रामलीला मैदान से भी बदतर बन गया। अब यहां सबको चिंता है कि 23 जून को क्या होगा?
यदि 23 जून का दिन शांतिपूर्वक निकल गया तो नवाज शरीफ और उनके छोटे भाई शहबाज शरीफ (मुख्यमंत्री, पंजाब) का सितारा फिर बुलंद होते देर नहीं लगेगी, क्योंकि सारे देश का ध्यान वजीरिस्तान पर लगा हुआ है। शरीफ ने हामिद करजई से भी बात की है। करजई से पाकिस्तान के विदेश सचिव एजाज चैधरी और प्रधानमंत्री के विशेष दूत महमूद अचकजई भी मिल आए हैं। यदि ये दोनों देश एकजुट हो जाएं तो दहशतगर्दों का सफाया संभव है। उन्होंने हिंदुस्तान से कहीं ज्यादा पाकिस्तान को नुकसान पहुंचाया है। अब तक वे 53 हजार बेकसूर लोगों को मौत के घाट उतार चुके हैं। सारी दुनिया में पाकिस्तान आतंकवाद के अड्डे के तौर पर कुख्यात हो चुका है। यदि शरीफ अपने इस अभियान में सफल हो गए तो वे पाकिस्तान के महानायक बन जाएंगे। उन्हें मोहम्मद अली जिन्ना के बाद सबसे बड़ा नेता माना जाएगा। उनके विरोधी भी उनके प्रशंसक बन जाएंगे।

इस अभियान से उन्हें कई अन्य ठोस फायदे भी होंगे। पहला, इधर पिछले कुछ माह से फौज और शरीफ के बीच दूरियां बढऩे लगी थीं। फौज को यह पसंद नहीं था कि शरीफ तालिबान से बातचीत करें। फौज उनके विरुद्ध कार्रवाई करने के लिए कुलबुला रही थी। अब फौज और शरीफ एक ही पायदान पर खड़े हैं। सूचना मंत्री परवेज़ रशीद ने आज साफ-साफ कहा है कि फौजी कार्रवाई का फैसला सरकार ने किया है और फौज उस पर निष्ठापूर्वक अमल कर रही है। दूसरा, इस दौर में सिर्फ पंजाब प्रांत में शरीफ की मुस्लिम लीग की सरकार है। शेष तीन प्रांतों में तीनों अलग-अलग पार्टियों की सरकार है। यदि यह फौजी अभियान सफल हो गया तो इन तीनों प्रांतों- सिंध, बलूचिस्तान और खैबर-पख्तूनख्वाह में भी शरीफ की लोकप्रियता बढ़ेगी। तीसरा, यदि आतंकवादियों का सफाया होता है तो तालिबानी कमजोर पड़ेंगे। इसका सीधा लाभ अफगान-सरकार को मिलेगा। अमेरिकी वापसी के बाद वहां अराजकता फैलने का डर कुछ कम हो जाएगा। चैथा, शरीफ की इस पहल का अंतरराष्ट्रीय महत्व भी कम नहीं है। इस अभियान से चीन और भारत भी खुश होंगे, क्योंकि चीन के सिंच्यांग प्रांत और भारत में आतंकवादियों ने काफी नुकसान पहुंचाया है। ईरान और मध्य एशिया के पांचों मुस्लिम गणतंत्रों में भी पाकिस्तान की छवि सुधरेगी। पांचवां, यदि आतंकवाद को काबू किया जा सका तो भारत-पाक सहयोग बढ़ेगा, मध्य एशिया तक थल-मार्ग खुलेगा और क्षेत्रीय व्यापार में अपूर्व वृद्धि होगी। नरेंद्र मोदी ने जैसी पहल अभी की है, उसे देखते हुए मैं कह सकता हूं कि ये सब राष्ट्र अगले पांच साल में साझा बाजार खड़ा कर सकते हैं। कुछ ही वर्षों में हम यूरोप की तरह साझी संसद भी बना सकते हैं।

जहां तक भारत-पाक संबंधों का सवाल है, पिछले 40-45 साल में मेरा यह पहला अनुभव है कि भारत-पाक संगोष्ठी में किसी भी वक्ता ने कोई भी अप्रिय बात नहीं कही। मेरे साथ पूर्व मंत्री सलमान खुर्शीद और मणिशंकर अय्यर के अलावा कुछ पत्रकार और प्रोफेसर भी थे और पाकिस्तान की तरफ से तीन पूर्व मंत्री, पूर्व सेनापति, पूर्व गुप्तचर, प्रमुख नेतागण और पत्रकार भी थे। सभी पाक जनरलों और नेताओं का मानना था कि दोनों देशों के बीच युद्ध का विकल्प खत्म हो चुका है। अब तो बातचीत ही एक मात्र विकल्प है। भारत की यह मांग कि पाकिस्तान उसके खिलाफ आतंकवाद बंद करे और पाकिस्तान की यह मांग कि भारत पहले कश्मीर उसके हवाले करे, तभी दोनों देशों के बीच बात होगी, अव्यावहारिक है। दोनों देशों के बीच बातचीत जारी रहे और व्यापारिक तथा जनसंपर्क बढ़ते चले जाएं, जैसे कि सीमा-विवाद के बावजूद भारत और चीन के संबंध बढ़ते चले जा रहे हैं। यह संगोष्ठी पूर्व विदेशमंत्री खुर्शीद कसूरी की संस्था ‘रीजनल पीस इंस्टीट्यूट’ ने आयोजित की थी।

पाकिस्तान के विदेश मंत्री सरताज अजीज के साथ भोजन और लंबी बात हुई। वे मेरे पुराने मित्र हैं। अन्य पार्टियों के शीर्ष नेताओं और बड़े अफसरों से भी भेंट हुई। यहां लोग यह महसूस कर रहे हैं कि हमारी विदेश सचिव सुजाता सिंह ने मोदी-शरीफ भेंट पर अजीब-सा ‘आक्रामक’ और ‘असत्य’ बयान तत्काल जारी कर दिया, जिसके कारण पाकिस्तान में यह छवि बनी कि मोदी से शरीफ दब गए। शरीफ ने संयम रखा व वहीं जवाब नहीं दिया, लेकिन वे अपनी भारत-यात्रा से संतुष्ट हैं। आतंकवादियों से निपटने के बाद शरीफ भारत-पाक मोर्चे पर जमकर काम करेंगे, ऐसा मुझे विश्वास है।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
İmajbet giriş
İmajbet giriş
Safirbet giriş
Safirbet giriş
İmajbet giriş
Hitbet giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
vaycasino
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark
kolaybet
betgaranti
betpark
kolaybet
betpark
betpark
hitbet giriş
casibom giriş
casibom giriş
casibom
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
betpark
betpark
kolaybet giriş
betpark
betpark
betgaranti
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark
betpark
kolaybet
kolaybet
vaycasino
vaycasino
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet
bettilt giriş
bettilt giriş
harbiwin giriş
harbiwin giriş