गुरुकुल मुर्शदपुर में चल रहे कोरोना निवारक गायत्री महायज्ञ में स्वामी चित्तेश्वरानंद जी बोले – एक ईश्वर ही हमारा सदा – सदा का साथी है

ग्रेटर नोएडा। यहां गुरुकुल मुर्शदपुर में कोरोना निवारक गायत्री महायज्ञ के पहले दिन संध्याकाल में श्रोताओं को संबोधित करते हुए आर्य जगत के सुप्रसिद्ध सन्यासी स्वामी चित्तेश्वरानंद जी महाराज ने कहा कि एक ईश्वर ही ऐसा है जो हमारा सदा सदा का साथी है । उन्होंने कहा कि संसार के शेष सभी संबंध क्षणभंगुर हैं। न जाने कब कौन कहां बिछुड़ जाए ? कुछ कहा नहीं जा सकता। संसार में जो लोग आज हमें अपने दिखाई दे रहे हैं यह सब भी कुछ देर के साथी हैं । हमारा शाश्वत सनातन और सदा सदा का साथी तो केवल परमपिता परमेश्वर है। इसलिए हमें सांसारिक ऐश्वर्य और प्रलोभन में अपने आप को भटकाना नहीं चाहिए और परमपिता परमेश्वर की भक्ति में जीवन को लगाना चाहिए । क्योंकि परमपिता परमेश्वर की भक्ति ही हमें मोक्ष की ओर ले जाती है।
स्वामी जी महाराज ने कहा कि भारत की वैदिक परंपरा के अनुसार जब तक संसार की सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था काम करती रही तब तक
संसार सार्थक जीवन का बहुत करता रहा ,परंतु जब इसमें भटकाव की स्थिति आई तो संसार में नाना पंथ व संप्रदायों का प्रादुर्भाव हुआ। भारत को भी उस समय गुलामी का दौर देखना पड़ा, परंतु महर्षि दयानंद जैसी पुण्य आत्मा के आविर्भाव से हम फिर वेदों की ओर लौटे और अपनी वैदिक संस्कृति के शाश्वत मूल्यों को अंगीकार कर देश को आजाद कराने के लिए उठ खड़े हुए।

उन्होंने कहा कि वेद मार्ग ही वह सच्चा मार्ग है जो मानव जीवन को सफल कर सकता है। वैदिक मार्ग में यज्ञ की परंपरा त्याग की परंपरा है। जिसको अपना कर परिवार से लेकर समाज और राष्ट्र का कल्याण किया जा सकता है । उन्होंने कहा कि वैश्विक शांति और उन्नति के लिए वेद मार्ग को अपनाना समय की आवश्यकता है।

पूज्य पाद स्वामी जी महाराज ने कहा कि मनुष्य का जीवन मुक्ति से प्रारंभ होकर मुक्ति में ही विलीन हो जाता है। जो लोग संसार में मुक्ति की खोज में लगे हुए हैं उनकी भी पुनरावृति है । जिससे स्पष्ट होता है कि मुक्ति से पुनरावृत्ति के पश्चात फिर मुक्ति की खोज आरंभ हो जाती है । परंतु यह मुक्ति की अवस्था शाश्वत आनंद को प्रदान करने वाली है। जो बहुत सौभाग्य से परंतु दीर्घकालिक साधना के पश्चात सुलभ हो पाती है । उन्होंने कहा कि मुक्ति की इस अवस्था को प्राप्त करना ही हमारे जीवन का परम लक्ष्य है। जिसके लिए महर्षि दयानंद जी के दिखाए मार्ग पर चलना न केवल आर्य समाज का बल्कि संसार के प्रत्येक मनुष्य का परम धर्म है।
स्वामी जी ने कहा कि इस आकाशगंगा में और खरबों ग्रह उपग्रह हैं और ऐसी आकाशगंगा अभी असंख्य हैं। ऐसे में उस परमपिता परमेश्वर के साम्राज्य का अनुमान भी नहीं लगाया जा सकता है । इसीलिए वैदिक ऋषि उसकी सत्ता को अनंत कहते आए हैं। उसकी सत्ता के समक्ष मनुष्य की सांसारिक सत्ता कुछ भी नहीं । जिसका संबंध उस अनंत सत्ता के स्वामी परमपिता परमेश्वर से हो जाता है वह अनंत आकाश में उड़ान भरने लगता है, अर्थात सांसारिक ऐषणाओं से मुक्त होकर परमानंद की प्राप्ति का जतन करने लगता है।
ज्ञात रहे कि गुरुकुल मुर्शदपुर में यह यज्ञ आर्य प्रतिनिधि सभा जनपद गौतमबुद्ध नगर के तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। जिसके बारे में जानकारी देते हुए आर्य प्रतिनिधि सभा के युवा कर्मठ कार्यकर्ता आर्य सागर खारी ने हमें बताया कि इस यज्ञ के ब्रह्मा देव मुनि जी महाराज और संयोजक सरपंच रामेश्वर सिंह है। यह यज्ञ 11 नवंबर तक निरंतर चलेगा। जिसमें समाज के गणमान्य लोग समय समय पर उपस्थित होते रहेंगे। समाज व देश के लिए समर्पित प्रतिभाओं को इस यज्ञ के माध्यम से सम्मानित भी किया जाएगा।

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