28 वर्षों तक चले मुकदमे का महज तीन मिनट मे निर्णायक फैसला

images (19)

अजय कुमार

बताया जाता है कि 06 दिसंबर 1992 को जब अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने की खबरें आ रही थीं तब तत्कालीन प्रधानमंत्री राव पूजा कर रहे थे। दोपहर 1 बजकर 40 मिनट पर बाबरी मस्जिद का पहला गुंबद गिराया जा चुका था।

सीबीआई की विशेष अदालत ने अपने फैसले में बिल्कुल सही कहा कि 06 दिसंबर 1992 को अयोध्या में विवादित ढांचा पूर्व नियोजित साजिश के तहत नहीं गिराया गया था। सब कुछ अचानक हुआ था। इसी आधार पर विवादित ढांचा विध्वंस मामलें में माननीय न्यायाधीश ने सभी 32 आरोपियों को बाइज्जत बरी कर दिया। कोर्ट के आदेश पर संदेह की गुंजाइश इसलिए नहीं है क्योंकि उस समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी का शाीर्ष नेतृत्व बिल्कुल भी यह नहीं चाहता था विवादित ढांचा गिरे। तब की भाजपा अयोध्या विवाद को लम्बे समय तक जीवित रखना चाहती थी, ताकि इस विवाद के सहारे वह हिन्दुत्व का कार्ड खुलकर खेल सके। यही वजह थी विवादित ढांचा गिराए जाने की घटना से भाजपा के दिग्गज नेता सन्न रह गए थे। मुसलमानों का तो कथित बाबरी मस्जिद ढहाए जाने पर गुस्सा स्वाभाविक था, लेकिन उदारवादी हिन्दुओं का बड़ा धड़ा भी इससे बिफर गया था। भाजपा और संघ मुंह दिखाने लायक नहीं रह गए थे। विवादित ढांचा गिराए जाने के मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह जैसे कुछ दिग्गज नेताओं को सीबीआई ने भले आरोपी बनाया था, परंतु उस समय के भाजपा के सबसे बड़े नेता अटल बिहारी वाजपेयी भी इस घटना से आहत बताए गए थे। कांग्रेस नेता और तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव ने यह बयान देकर कि बाबरी मस्जिद का दोबारा निर्माण कराया जाएगा, भाजपा नेताओं को नया जीवनदान दे दिया।

बताया जाता है कि 06 दिसंबर 1992 को जब अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने की खबरें आ रही थीं तब तत्कालीन प्रधानमंत्री राव पूजा कर रहे थे। दोपहर 1 बजकर 40 मिनट पर बाबरी मस्जिद का पहला गुंबद गिराया जा चुका था। इसके 20 मिनट बाद करीब दो बजे तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के पास उस समय के केंद्रीय मंत्री और कद्दावर कांग्रेस नेता माखनलाल फोतेदार का फोन आया। फोतेदार ने नरसिम्हा राव से कहा, ‘राव साहब, कुछ तो कीजिए, क्या हम फैजाबाद में तैनात वायुसेना के चेतक हेलिकॉप्टर से कारसेवकों पर आंसू गैस के गोले नहीं दगवा सकते हैं? जवाब में नरसिम्हा राव ने सवाल किया, ‘क्या मैं ऐसा कर सकता हूं?’ फोतेदार ने विनती के स्वर में राव से कहा, ‘राव साहब, कम-से-कम एक गुंबद तो बचा लीजिए। ताकि बाद में हम उसे एक शीशे के केबिन में रख सकें और भारत के लोगों को बता सकें कि बाबरी मस्जिद को बचाने की कांग्रेस ने अपनी तरफ से पूरी कोशिश की थी। माखनलाल फोतेदार अपनी आत्मकथा ‘द चिनार लीव्स’ में लिखते हैं कि उनके इस सुझाव के जवाब में प्रधानमंत्री चुप रहे। लंबे ठहराव के बाद उन्होंने बुझी हुई आवाज में कहा, ‘फोतेदार जी, मैं थोड़ी देर में आपको फोन करता हूं। फोतेदार प्रधानमंत्री के रुख से काफी खफा थे। बाबरी मस्जिद का ढांचे गिरने के साथ राव पर आरोपों की झड़ी लग गई थी।

बहरहाल, 1992 में विवादित ढांचा गिरने के साथ ही देश की सियासत भी बदल गई। मुसलमानों ने कांग्रेस के नेृतत्व वाली नरसिम्हा राव की सरकार को विवादित ढांचा गिराये जाने की साजिश का हिस्सा मान लिया। इसके बाद कांग्रेस का मजबूत वोट बैंक समझे जाना वाले मुसलमान वोटरों ने यूपी में मुलायम सिंह यादव तो बिहार में लालू प्रसाद यादव की पार्टी का दामन थाम लिया। मुस्लिम वोट बैंक के सहारे मुलायम-लालू ने लम्बे समय तक सत्ता सुख उठाया तो कांग्रेस को यूपी-बिहार ही नहीं अन्य कई राज्यों में भी मुसलमानों की नाराजगी का शिकार होना पड़ा था। कांग्रेस हाशिये पर चली गई और आज तक इससे उबर नहीं पाई है। वहीं भाजपा ने विवादित ढांचा गिराये जाने के बाद अयोध्या में भगवान श्रीराम का मंदिर बनाये जाने का संकल्प और तेज कर दिया। अयोध्या विवाद के सहारे भारतीय जनता पार्टी आज की तारीख में 02 सीटों से 303 सीटों पर पहुंच चुकी है।

बाबरी ढांचा गिराए जाने के मुकदमे पर फैसला सुनाते समय सीबीआई की विशेष अदालत ने जो कुछ कहा वह कानूनी और सियासी रूप से काफी महत्वपूर्ण और आंख खोलने वाला है। 28 साल से चल रहे इस मुकदमे पर विशेष जज एसके यादव ने अपने कार्यकाल का अंतिम फैसला सुनाते हुए लालकृष्ण आडवाणी, डॉ. मुरली मनोहर जोशी, उमा भारती, महंत नृत्य गोपाल दास, कल्याण सिंह समेत सभी आरोपितों को बरी कर दिया। विशेष जज ने कहा कि तस्वीरों से किसी को आरोपित नहीं ठहराया जा सकता है। अयोध्या विध्वंस पूर्व नियोजित नहीं था। घटना के प्रबल साक्ष्य नहीं हैं। सिर्फ तस्वीरों से किसी को दोषी नहीं कहा जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि सीबीआई कोई निश्चयात्मक सुबूत नहीं पेश कर सकी। इस मामले के मुख्य आरोपितों में एक स्व. अशोक सिंहल को कोर्ट ने यह कहते हुए क्लीन चिट दे दी कि वह तो खुद कारसेवकों को विध्वंस से रोक रहे थे, क्योंकि वहां भगवान की मूर्तियां रखी हुई थीं।

28 वर्षों तक चले मुकदमे का महज तीन मिनट में जज साहब ने फैसला सुनाते हुए कहा कि अखबारों में छपी खबरों को प्रामाणिक सुबूत नहीं माना जा सकता क्योंकि उनके मूल नहीं पेश किए गए। फोटोज की निगेटिव नहीं प्रस्तुत किए गए और न ही वीडियो फुटेज साफ थे। कैसेट्स को भी सील नहीं किया गया था। अभियोजन ने जो दलील दी, उनमें मेरिट नहीं थी। कोर्ट ने कहा कि विध्वंस के लिए कोई षड्यंत्र नहीं किया गया। घटना पूर्व नियोजित नहीं थी। एलआईयू की रिपोर्ट थी कि छह दिसंबर 1992 को अनहोनी की आशंका है किंतु इसकी जांच नही कराई गई। अभियोजन पक्ष की तरफ से जो साक्ष्य पेश किए वो दोषपूर्ण थे। जिन लोगों ने ढांचा तोड़ा उनमें और आरोपियों के बीच किसी तरह का सीधा संबंध स्थापित नहीं हो सका। इस आधार पर कोर्ट ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। अयोध्या विध्वंस केस का निर्णय 2300 पेज का था।

उक्त मामले में कुल 49 लोगों के खिलाफ मुकदमा चला था, जिसमें से 17 की सुनवाई के दौरान मौत भी हो गई थी। जिनको आरोपी बनाया गया था उसमें भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती, विनय कटियार, साध्वी ऋतंभरा, महंत नृत्य गोपाल दास, डॉ. राम विलास वेदांती, चंपत राय, महंत धर्मदास, सतीश प्रधान, पवन कुमार पांडेय, लल्लू सिंह, प्रकाश शर्मा, विजय बहादुर सिंह, संतोष दुबे, गांधी यादव, रामजी गुप्ता, ब्रज भूषण शरण सिंह, कमलेश त्रिपाठी, रामचंद्र खत्री, जय भगवान गोयल, ओम प्रकाश पांडेय, अमर नाथ गोयल, जयभान सिंह पवैया, साक्षी महाराज, विनय कुमार राय, नवीन भाई शुक्ला, आरएन श्रीवास्तव, आचार्य धमेंद्र देव, सुधीर कुमार कक्कड़ व धर्मेंद्र सिंह गुर्जर थे। खैर, बाबरी मस्जिद ढांचा विध्वंस मामले का फैसला आने के साथ ही प्रभु रामजन्म भूमि विवाद से जुड़े सभी मुकदमों का निस्तारण हो चुका है। बात जहां तक भाजपा की है तो वह कभी नहीं चाहती थी कि विवादित ढांचा गिरे क्योंकि उसकी सियासत के लिए तो ढांचे का खड़ा रहना ज्यादा मुफीद था। बाबरी मस्जिद विवाद का निस्तारण होने के साथ ही अयोध्या में रामज्मभूमि/बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर अब किसी कोर्ट में कोई मुकदमा पैडिंग नहीं रह गया है।

Comment:

betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
vaycasino
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark
kolaybet
betgaranti
betpark
kolaybet
betpark
betpark
casibom giriş
casibom giriş
casibom
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
betpark
betpark
kolaybet giriş
betpark
betpark
betgaranti
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark
betpark
kolaybet
kolaybet
vaycasino
vaycasino
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
harbiwin giriş
harbiwin giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betbox giriş
betbox giriş
vaycasino
vaycasino
vaycasino
vaycasino
Hitbet giriş
xbahis
xbahis
vaycasino
vaycasino
bettilt giriş
bettilt giriş
Hitbet giriş
millibahis
millibahis
betnano giriş
bahisfair giriş
betnano giriş
bahisfair giriş