राहुल पर भारी पड़ रहे हैं मोदी?

इक़बाल हिंदुस्तानी
कांग्रेस के ना चाहते हुए भी 2014 में होने जा रहे आम चुनाव में पीएम पद का मुकाबला नरेंद्र मोदी बनाम राहुल गांधी हो चुका है। इसके साथ ही सेकुलर कहे जाने वाले अनेक दलों और लोगों की चाहत के खिलाफ मोदी का ग्राफ दिन ब दिन ना केवल राहुल और उनकी कांग्रेस से कहीं ऊंचा जा रहा है बल्कि उनकी विशाल सभाओं और जानी मानी गायिका लता मंगेशकर व रेटिंग एजेंसी गोल्डमैन सैक्श जैसे लोगों व संस्थाओं के उनके पक्ष में आये समर्थन से उत्तर भारत और हिंदी भाषी राज्यों में विशेषरूप से हवा का रूख़ पता लग रहा है। उधर मोदी को फूटी आंख ना देखने वाले अल्पसंख्यक समाज के दो मौलानाओं महमूद मदनी और कल्बे सादिक के बयान सीधे ना सही लेकिन कांग्रेस सहित सेकुलर दलों से नाराज़गी और भाजपा के मुस्लिम विरोधी एजेंडा छोड़कर सबका विकास करने के वादे से हालात यूपीए के खिलाफ और भाजपा के पक्ष में होते नज़र आ रहे हैं।
हालांकि शुरू में जब बिहार के सीएम नीतीश कुमार जैसे राजनेताओं ने मोदी को भाजपा की तरफ से पीएम पद का प्रत्याशी बनाने का जमकर विरोध किया था तो ऐसा लगता था कि खुद भाजपा में इस फैसले के विरोध में इतना बवाल मचेगा कि आडवाणी ही पीएम पद के प्रत्याशी हो सकते हैं लेकिन समय के साथ साथ आरएसएस की यह सोच सही साबित होती नज़र आ रही है कि मोदी ही भाजपा हैं। आज मोदी की वजह से भाजपा का जनाधर दिन ब दिन बढ़ रहा है। उनकी विशाल सभाओं में जो जनसैलाब उमढ़ रहा है वह भाजपा और संघ परिवार का समर्थक हो या ना हो लेकिन वह राहुल और मनमोहन के मुकाबले मोदी से इतनी उम्मीदें बांध चुका है कि मोदी अगर किसी चमत्कार से सत्ता में आ भी जायें तो वर्तमान आर्थिक नीतियों और बिना व्यवस्था आमूलचूल बदले शायद ही कुछ ठोस बदलाव कर पायें, जिससे जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरा जा सके।
यूपीए और कांग्रेस को यह समझ में नहीं आ रहा कि वह गुजरात के मुख्यमंत्राी की राज्य में जीत की हैट्रिक, गुजरात का कथित विकास मॉडल और बोलने का इतना प्रभावशाली लहजा कहां से लायें? मोदी ने अपने भाषणों में राममंदिर हिंदुत्व और मुस्लिम विरोधी बातों से पूरी तरह किनारा करके हिंदुओं के उस बहुत बड़े वर्ग को विकास का सपना दिखाकर जोड़ने में कामयाबी हासिल करने का प्रयास किया है जो अब तक भाजपा की दंगों साम्प्रदायिक और हिंदू मुस्लिम अलगाव की राजनीति से दूरी रखता था। मोदी ने विकास सबका तुष्टिकरण किसी का नहीं नारा देकर गुजरात के मुसलमानों की सम्पन्नता का हज जाने के लिये राज्य के 6000 कोटे की जगह 40 हज़ार दरख़्वास्तें आने का उदाहरण देकर बिहार में 7500 के कोटे के बदले मात्र 6500 आवेदन आने का सटीक तर्क इस्तेमाल किया है। ऐसे ही उन्होंने गुजरात पुलिस में मुसलमानों को उनकी आबादी 9 प्रतिशत होने के बाद भी लगभग 10 फीसदी कोटा दिये जाने का अकाट्य आंकड़ा प्रस्तुत कर कांग्रेस, सपा और जनतादल यूनाइटेड के मुस्लिम मसीहा होने के दावे को चुनौती दी है। हालांकि राहुल कांग्रेस के नीतिकारों और रणनीतिज्ञों द्वारा लिखकर दिये गये भाषणों और अपने गुस्से वाले हावभाव से कभी कभी मोदी को उनकी ही शैली में जवाब देने का असफल प्रयास करते हैं लेकिन मीडिया से लेकर जनता में कांग्रेस के वंशवाद, भ्रष्टाचार और महंगाई के प्रति आक्रोश और घृणा इतनी अधिक बढ़ चुकी है कि वे समर्थन हासिल करने की बजाये हंसी और उपेक्षा का पात्र बनकर रह जाते हैं। संयोग देखिये कि मनमोहन सरकार अपने दूसरे कार्यकाल में अपने कारनामों से इतनी बदनाम, अलोकप्रिय और बेलगाम हो चुकी है कि उसको राहुल के नेतृत्व में भी जनता तीसरा अवसर देने के लिये किसी कीमत पर तैयार नहीं है जबकि राहुल के पास किसी राज्य का या केंद्र का शासन चलाने का कोई अनुभव या सराहनीय रिकॉर्ड भी नहीं है।
अन्ना हज़ारे के आंदोलन के दौरान अगर राहुल पहल करके आगे आते और दागियों की सदस्यता वाले विधेयक की तरह बगावती तेवर दिखाकर जनलोकपाल पास कराने की अपनी सरकार को हिदायत देते तो उनकी छवि कुछ अलग और उम्मीद जगाने वाले युवा की बन सकती थी लेकिन आज राहुल की छवि यूपीए कांग्रेस और अयोग्य वंशवादी से अलग कुछ भी नहीं है। जानकारों का यह सवाल भी सही है कि राहुल और सोनिया गांधी मनमोहन सरकार में किंगमेकर की स्थिति में रहे हैं लिहाज़ा वह जो चाहते हैं।
सरकार वही करती है तो इससे अलग वह पीएम बनकर और क्या कर सकते हैं? राहुल को कांग्रेस और यूपीए की वर्तमान किसी नीति से कोई नाराज़गी या विरोध नहीं है, ऐसे में लोग उनकी कांग्रेस को एक बार फिर मनमानी, भ्रष्टाचार और महंगाई बढ़ाने का लाइसेंस पांच साल के लिये देकर अपने हाथों अपने पैरों पर कुल्हाड़ी क्यों मारना चाहेगी? जहां तक मोदी का सवाल है वह सेकुलर दलों के नेताओं द्वारा खुद को चाय बेचने वाला बताये जाने पर भी नहीं चिढ़ते और पलट वार करते हुए कहते हैं कि देश बेचने वालों से चाय बेचने वाला पीएम बनेगा तो बेहतर ही साबित होगा।
वह देवालय बाद में शौचालय पहले जैसा बयान देकर भी एक संकेत दे चुके हैं कि अब बड़ी ज़िम्मेदारी सामने आने पर उनकी सोच में बड़ा बदलाव भी आ सकता है। मोदी ने यूपी के उन्नाव में एक संत के सपने के आधार पर 1000 टन सोने की खुदाई के लिये यूपीए सरकार की एएसआई द्वारा बिना किसी ठोस आधार के खुदाई शुरू कराने पर सरकार की देश दुनिया में जगहंसाई का बयान देने का साहस दिखाया था यह अलग बात है कि संतों की नाराज़गी से बचने के लिये उनको सोने का सपना देखने वाले संत को प्रणाम करना पड़ा लेकिन आज मोदी की बात सही साबित होती नज़र आ रही है। 2002 के बाद गुजरात में कोई बड़ा दंगा नहीं हुआ और ना ही मुस्लिमों का कोई फर्जी एनकाउंटर पुलिस ने किया है, अगर मोदी निष्पक्ष सुशासन का भरोसा दिला सकें तो राहुल के मुकाबले मोदी के लिये तो यही कहा जा सकता है।

Comment:

Latest Posts

hititbet giriş
betgaranti giriş
hititbet giriş
hititbet güncel giriş
hititbet giriş
Hititbet Giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
tuzla cilt bakım merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Hititbet
hititbet giriş
Tuzla Cilt Bakım
Tuzla Cilt Bakım Merkezi
Tuzla İpek Kirpik
Tuzla İpek Kirpik
hititbet giriş
hititbet
betgaranti giriş
Hititbet Giriş
Hititbet
Hititbet Güncel Giriş
Hititbet Yeni Giriş
Hititbet Resmi Gİriş
betyap giriş
hititbet giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
hititbet
hititbet giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti
betgaranti güncel giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
xslot giriş
betkom giriş
hitbet giriş
hitbet giriş
betbox giriş
betbox giriş
betpas giriş
betpas giriş
betkom giriş
betpas giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet
betgaranti giriş
betgaranti güncel giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betgaranti güncel giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
xslot giriş
betpark giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vdcasino
vdcasino
vdcasino
vdcasino
hititbet giriş
meritbet
meritbet
kolaybet giriş
betkom giriş
betgaranti giriş
betpark giriş