पंचगव्य और हमारा स्वास्थ्य

राकेश कुमार आर्य
पंचगव्य हमारे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक है। कैंसर जैसे भयंकर रोग को पंचगव्य का नियमित सेवन करने से रोकने में पूर्ण सफलता मिलती है। जबकि कैंसर के रोगी को तुलसी के 30-40 पत्तों को चटनी की भांति पीसकर गोदधि के मट्ठे में मिलाकर प्रात: सायं सेवन कराने से लाभ होता है। रोगी को चिकित्सा काल में डेढ़ किलो तक दूध या गोदधि ही दिया जाए।
-खांसी : खांसी भी एक ऐसा रोग है जो अक्सर हमें आ घेरता है। इससे मुक्ति पाने के लिए 20 ग्राम गोघृत में 10 ग्राम गुड़ मिलाकर खिलाने से सूखी खांसी भी समाप्त हो जाती है।
-गाय के गर्म दूध में 100 ग्राम गरमागरम जलेबी डालकर खिलाने से भी खांसी दूर हो जाती है।
-फिटकरी सफेद 10 ग्राम और चीनी 100 ग्राम दोनों को मिलाकर पीस लें और इस चूर्ण की 14 पुड़ियां बना लें। यदि सूखी खांसी हो तो गुनगुने गोदुग्ध के साथ सेवन करायें तथ तर खांसी हो तो पानी के साथ दें। यह बहुत लाभदायक योग है।
–संधिवात:-संधि:वात, संधि: शूल या जोड़ों का दर्द आजकल बहुत अधिक लोगों को हो रहा है। कार्यशैली में भारी परिवर्तन, आहार विहार में प्रमाद और जीवन शैली को सुविधाभोगी बनाने से यह रोग अधिक फेेल रहा है। यदि हम नित्य व्यायाम, प्राणायाम करें और अपने खानपान पर भी उचित ध्यान दें तो इस रोग को दूर रखने में सहायता मिलती है। परंतु कई बार सुविधा बरतते हुए भी कुछ रोग आ ही घेरते हैं। गठिया रोग उनमें से एक है।
इस रोग में अरण्ड के बीजों की गिरी 25 ग्राम को आधा किलो गोदुग्ध में खीर की भांति पकाकर और इसमें एक ग्राम सोंठ मिलाकर प्रतिदिन खिलाने से गठिया का रोग दूर हो जाता है।
-गर्भधारक योग : कायफल और खांड दोनों को समभाग लें और बारीक पीसकर मिला लें। इसमें से छह ग्राम औषधि गोदुग्ध के साथ मासिक धर्म आरंभ होने के दिन से 8 दिन तक खिलायें। गर्भाशय के दोष दूर होकर गर्भ ठहर जाता है।
-नागकेसर को बारीक पीसकर 4 ग्राम दवा बछड़े वाली गाय के दूध के साथ मासिक धर्म आरंभ होने के दिन से 8 दिन तक खिलायें। गर्भ ठहर जाता है। इस दूध को गर्म करके उसमें चीनी डाल लें।
-गंजापन : गोदधि को तांबे के पात्र में तांबे के टुकड़े से इतना काटें कि हरे रंग का हो जाए। इस दवा को गंज पर लगाने से बाल शीघ्र उग आते हैं। यह दवा अनुभवी लोगों द्वारा कितनी ही बार की परीक्षित है। फोड़े, फुंसी, घाव के लिए भी यह अद्भुत योग है।
–घाव, फोड़ा-फुंसी : ऐसे रोगों के लिए आकाश बेल और सोंठ को बराबर मात्रा में लेकर बारीक पीस लें। फिर घी में मिलाकर इतना घोंटें कि मरहम बन जायें।
पूर्व घाव को नीम के पानी से धोकर फिर यह मरहम लगा दें। कुछ ही दिनों में पुराने से पुराना घाव भी ठीक हो जाता है। बहुत ही उपयोगी और लाभकारी योग है।
-चेचक के दाग : मसूर की दाल और तरबूज के बीज की मींगी दोनों समभाग लेकर गोदुग्ध में पीस लें और चेहरे पर लेप करायें। यह क्रिया रात्रि में करें। प्रात: नागरमोथा के जोशांदे से चेहरा धो लें। इस क्रिया से चेचक के दाग दूर हो जाते हैं।
-चेहरे के दाग : तुलसी के सूखे पत्तों को गाय के दूध में पीसकर लगाने से चेहरे के काले दाग दूर हो जाते हैं।
-जौ का उत्तम और साफ आटा 100 ग्राम, मुलहठी 100 ग्र्र्र्राम, पठानी लोध 100 ग्राम लें। मुलहठी और पठानी लोध को कूट पीस कर चूर्ण कर लें, फिर तीनों को मिलाकर एक कर लें। इसमें से 15 ग्राम औषधि लेकर गोदधि में घोलें और रात्रि में चेहरे पर लेप करें। निरंतर प्रयोग से 15 दिन में ही चेहरे का रंग निखर आएगा।
-हल्दी को बारीक पीसकर और गाय के दूध में मिलाकर रात्रि में मुखमंडल पर लेप करने से मुख की छीप सफेद और काले दाग, तथा मुंहासे दूर होकर चमड़ी स्वच्छ मुलायम और चमकदार हो जाती है।
-बादाम की गिरी को गाय के दूध में घिसकर लगाने से भी लाभ होता है।
-आम की गुठली की गिरी अथवा जायफल को गाय के दूध में घिसकर लगायें।
-चोट : विजयसार की लकड़ी को बारीक कूटपीसकर चूर्ण बना लें। इस तैयार शुदा दवा को प्रात: सायं गाय के गुनगुने दूध के साथ दें। इसके प्रयोग से टूटी हुई हड्डी भी जुड़ जाती है। चोट में यथाशीघ्र लाभ होता है।
-पित्त उछलना : इस रोग में राल और चीनी को बराबर मात्रा में लेकर बारीक पीस लें। तत्पश्चात इसमें से छह ग्राम दवा गुनगुने गो दुग्ध के साथ लेने से पित्त उछलने में तत्काल लाभ होता है।
-जिगर के रोग : इस रोग के लिए गुलबनफ्शा 25 ग्राम लेकर उसे आधा किलो गोदुग्ध और आधा किलो पानी में पकायें। जब सारा पानी जलकर केवल दूध रह जाए, तब उतार लें ठंडा होने पर इसे खूब मल और छानकर इसमें 15 ग्राम शहद और 10 ग्राम मिश्री मिलाकर पिलाने से कुछ ही दिनों में अत्यधिक बढ़ा हुआ जिगर भी यथाशीघ्र ठीक हो जाता है।
-जुकाम : गाय का दूध एक कप लें। इस दूध में एक चम्मच हल्दी डालकर गर्म करें। इसके पश्चात इसमें थोड़ी सी शक्कर डालकर रोगी को दें। जुकाम की बहुत ही उत्तम औषधि है।
-टांसिल : इस रोग के रोगियों के लिए 50 ग्राम अलसी के बीज लें, गाय का घी एक चम्मच पानी 500 ग्राम। अलसी के बीजों को कूट लें। तत्पश्चात सबको मिलाकर पुलटिस बना लें। सुहाती सुहाती सी गले पर बांधे। गले में कैसा ही दर्द हो, सूजन हो, आवाज बैठ चुकी हो, टांसिल बढ़ गये हों, सभी के लिए अद्वितीय है। खुश्क खांसी तो पहले दिन ही समाप्त हो जाती है। 5-6 दिन के बांधने से ही रोग समाप्त हो जाता है।
-तपेदिक (क्षय रोग): गाय का मक्खन 10 ग्राम, शहद 20 ग्राम, दोनों को मिलाकर दिन में दो बार चाटें। इसके सेवन से क्षयरोग (टी.बी.) बहुत शीघ्र नष्ट हो जाता है।
-शहद 200 ग्राम, मिश्री कुंजा 200 ग्राम, गाय का घी 100 ग्राम तीनों को मिला लें। इसमें से 6-6 ग्राम दवा दिन में कई बार चटायें, ऊपर से गाय का दूध पिलायें। इस रोग के लिए रामवाण औषधि है।
-पत्थर के कोयले की राख आधा ग्राम मक्खन मलाई या दूध से प्रात: सायं खिलाओ। खून की उल्टी के लिए भी अति उत्तम औषधि है। टी.बी. के जिन रोगियों को फेफ ड़ों से खून आता है हो उनके लिए अत्यंत प्रभावी है।
-तिल्ली रोग : छोटी पीपल 6 ग्राम को बारीक पीसकर प्रतिदिन गो दुग्ध के साथ खिला दें। कुछ दिन खिलाने से तिल्ली का रोग दूर हो जाएगा।
-शरपुंखा के बीज 6 ग्राम को अत्यंत बारीक पीसकर गाय की छाछ के साथ खिलाने से बहुत बड़ी हुई तिल्ली भी कुछ ही दिन में ठीक हो जाती है।
-दांतों के रोग : नागर मोथा, हरड़ का छिलका, सोंठ, काली मिर्च, छोटी पीपल, बायबिडंग, नीम के पत्ते सभी वस्तुएं बराबर-बराबर लेकर बारीक पीस लें। फिर गोमूत्र में दो तीन दिन तक खरल करके 1-1 ग्राम की गोली बना लें। रात्रि में सोते समय एक गोली मुंह में रखने से हिलते हुए दांत दृढ़ हो जाते हैं। कितनी ही बार की अनुभव की गयी उत्तम औषधि है।
-दमा : गर्म करके ठंडा किया गो दुग्ध 400 ग्राम छोटी दुद्घि जल से धोकर स्वच्छ की हुई 10 ग्राम। दुद्घि को कूट पीसकर दूध में मिला दें, और इस दूध को दमा के रोगी को पिला दें। दूध में चीनी आदि न डालें। औषधि दिन में दो बार दें।
-गंधक आंवलासार शुद्घ, काली मिर्च दोनों 3-3 ग्राम लेकर अत्यंत बारीक पीस लें। इसे 10 ग्राम गोघृत में अच्छी प्रकार मिलाकर रोगी को चटायें। 15 दिन तक निरंतर सेवन करने से रोग के नष्ट करने में सफलता मिलती है।
-हृदय रोग : अर्जुन की छाल का बारीक चूर्ण 4 ग्राम, खांड 20 ग्राम, गाय का दूध उबला हुआ आधा किलो, तीनों वस्तुओं को खूब मिलाकर निराहार सेवन करायें। हृदय रोगों के लिए यह अत्यंत उत्तम औषधि है। प्रयोग कुछ दीर्घकाल तक करें। लगभग एक वर्ष तक प्रयोग करने से सभी प्रकार के हृदय रोग शांत होते हैं। टूटी हुई हड्डियों को जोड़ने में भी अनुपम योग है।
-निशास्ता (गेंहूं का सत) और अर्जुन की छाल का चूर्ण समभाग लेकर गाय के घी में भून लें। तत्पश्चात इसमें तीन गुणा शहद डाल दें। यह अवलेह 6 ग्राम से 10 ग्राम तक गाय के दूध के साथ सेवन करने से भयंकर से भयंकर हृदय रोग भी दूर हो जाता है।
-गाय का 10 ग्राम ताजा मक्खन, दाना निकला हुआ भुट्टा लेकर जलायें और पीसकर रख लें। इस भस्म को उक्त मक्खन के साथ केवल आधा ग्राम की मात्रा में सेवन करायें। दिल की धड़कन और दुर्बलता के लिए अति उत्तम है।
-दुबलापन : असंगध आधा किलो लेकर कूट पीसकर कपड़छन कर लें। 10 ग्राम चूर्ण को आधा किलो गोदुग्ध में डालकर उबालें। ठंडा होने पर शहद मिलाकर रोगी को पिलायें। प्रात: सायं दोनों समय प्रयोग करायें। जैसे वर्षा से धान के खेत लहलहा उठते हैं, उसी प्रकार असगंध के प्रयोग से दुबले व्यक्ति मोटे हो जाते हैं। शक्तिवृद्घि के साथ साथ मुखमंडल का रंग भी सुर्ख हो जाता है। 40 दिन तक सेवन करें।
-बिनौला : 50 ग्राम को भूनकर कूट लें। फिर 50 ग्राम मूसली सफेद कूटकर इसमें मिला दें। 3-3 ग्राम दवा प्रात: सायं दूध के साथ दें। पुरूषों के लिए शक्तिवर्धक है। वीर्य उत्पन्न करता है, मसाने को शक्ति देता है। स्त्रियों के श्वेत प्रदर के लिए अत्यंत प्रभावशाली है। 2-3 मास सेवन कर इसके लाभ देखे जा सकते हैं।
-मालकांगनी 250 ग्राम लेकर गोघृत में भून लें। इसमें समभाग खांड मिला लें। 6 ग्राम दवा प्रतिदिन प्रात: सायं गोदुग्ध के साथ 40 दिन तक सेवन कराने से अति लाभ होगा।
-गोदुग्ध के साथ प्रात: सायं 3-3 ग्राम हल्दी का चूर्ण सेवन कराने से भी शरीर का दुबलापन दूर हो जाता है।
-गोघृत और शहद क्रमश: 20 व 30 ग्राम भोजन के पश्चात मिलाकर खाने से मनुष्य की आयु बढ़ती है और अंत समय तक उसकी शारीरिक शक्ति और स्मरण शक्ति स्थायी बनी रहती हैं।
-दाल चीनी को बारीक पीस लें। इसे कपड़छन करके सुरक्षित रखें। रात्रि में गरमागरम दूध में 2 ग्राम चूर्ण डालकर 15 मिनट पश्चात इस दूध में शहद मिलाकर पिलाने से शारीरिक शक्ति बढ़ती है। कम से कम 10 दिन पिलायें। ओज और तेज बढ़ता है।
-चने की दाल 50 ग्राम को 100 ग्राम गोदुग्ध में भिगो दें। प्रात: इस फूली हुई दाल को चबा चबाकर खायें। साथ में किशमिश या गुड़ का प्रयोग भी किया जा सकता है। कम से कम चालीस दिन तक प्रयोग करने से शारीरिक शक्ति में अति वृद्घि हो जाती है।
-ढाक के बीज 50 ग्राम, बाय बिडंग 25 ग्राम, आंवला गुठली रहित 100 ग्राम तीनों को कूट पीस कर बारीक चूर्ण बना लें। 3 ग्राम दवा शहद में मिलाकर गोदुग्ध के साथ सेवन करने से 40 दिन में ही वृद्घ मनुष्य भी जवानी का अनु350px-Panchagavyaभव करने लगेगा।
-नकसीर:गाय के गोबर का रस सूंघने अथवा उसकी नसवार लेने से नकसीर बंद हो जाती है।
-नपुंसकता : तुलसी के बीज 250 ग्राम, गुड़ पुराना 250 ग्राम दोनों को घोट पीसकर डेढ़-डेढ़ ग्राम की गोली बना लें। प्रतिदिन प्रात: सायं एक-एक गोली धारोष्ण गोदुग्ध के साथ लें। नपुंसकता को नष्ट करने के लिए अद्भुत है। 5-6 सप्ताह तक सेवन करें।
-मालकांगनी के साफ बड़े दाने 50 ग्राम, चीनी 25 ग्राम दोनों को गाय के आधा किलो दूध में डालकर हल्की अग्नि पर पकायें। जब सारे दूध का खोया बन जाए तब उतार लें, और अच्छी प्रकार घोटकर जंगली बेर के बराबर गोलियां बना लें। 1-1 गोली प्रात: सायं गोदुग्ध से खिलायें। ये गोलियां अत्यंत शक्तिवर्धक और यौवनावस्था को पुन: लौटाने वाली हैं।
-200 ग्राम भिलावों की टोपियां उतार दें, फिर उन्हें लोहे की गर्म संडासी से दबाकर उनका तेल निकाल दें। तत्पश्चात इन्हें गोघृत में इतना भूनें कि धुंआ निकलना बंद हो जाए। अत्यंत शक्तिवर्धक है। गुड, तेल, खटाई और गर्म वस्तुओं का परहेज करें। घी, दूध, मक्खन का प्रयोग अधिक मात्रा में करें।
-कुलिंजन के डेढ़ ग्राम बारीक चूर्ण को 10 ग्राम शहद में मिलाकर चटायें, ऊपर से गाय के दूध में शहद मिलाकर पिलायें। यह योग अत्यंत शक्तिवर्धक है।
-असगंध नागौरी के दस ग्राम बारीक चूर्ण को आधा किलो गोदुग्ध में उबालें। जब दूध 400 ग्राम रह जाए तब शहद मिलाकर चालीस दिन तक पिलायें, अत्यंत शक्तिवर्धक है।
-मूसली सफेद 250 ग्राम लेकर कूटपीस लें, कपड़छन कर दो किलो गोदुग्ध में डालकर खोया बनायें। खोया बन जाने पर इसे 250 ग्राम गोघृत में भूनें। ठंडा होने पर आधा किलो बूरा मिलाकर थाली में जमा दें। 20-20 ग्राम प्रात: सायं सेवन करें। अत्यंत शक्तिवर्धक है।
क्रमश:

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