‘उगता भारत’ का संपादकीय : तेजस्वी भारत के नायक मोदी का भाषण और पड़ोसी शत्रु जाए

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लाल किले की प्राचीर से निरंतर सातवीं बार देश को संबोधित करने वाले प्रधानमंत्री के रूप में मोदी ने फिर एक इतिहास रचा है । क्योंकि अब उनके पश्चात केवल 3 कांग्रेसी प्रधानमंत्री ऐसे हैं , जिन्होंने 7 से अधिक बार लाल किले पर निरंतर झंडा फहराया है , और यह प्रधानमंत्री हैं – पंडित जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और सरदार मनमोहन सिंह ।

भारत के 74वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से प्रधानमंत्री ने देश की अपेक्षाओं के अनुसार फिर एक बार अपना जोशीला और गर्मी का भाषण देकर देश के जनमानस का दिल जीत लिया। उन्होंने अपने भाषण में कहा कि सीमा रेखा से लेकर वास्तविक नियंत्रण रेखा तक, देश की संप्रभुता पर जिस किसी ने आंख दिखाई है, देश ने, देश की सेना ने उसका उसी भाषा में जवाब दिया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की संप्रभुता का सम्मान हमारे लिए सर्वोच्च है । इस संकल्प के लिए हमारे वीर जवान क्या कर सकते हैं, देश क्या कर सकता है, ये लद्दाख में दुनिया ने देखा है। स्पष्ट है कि प्रधानमंत्री ने अपने इन शब्दों से पाकिस्तान और चीन को स्पष्ट संदेश दे दिया है कि यदि उन्होंने 2020 के भारत की ओर आंख उठाने का साहस किया तो उन्हें उन्हीं की भाषा में फिर जवाब दिया जाएगा। निसंदेह प्रधानमंत्री के ओजस्वी और तेजस्वी भाषण को सारी दुनिया ने बड़ी गौर से सुना है , क्योंकि इस समय का भारत सारी दुनिया के लिए आश्चर्य , कौतूहल और जिज्ञासा का केन्द्र बन चुका है। जब प्रधानमंत्री देश को संबोधित कर रहे थे तो उनकी भाव भंगिमा बिल्कुल वैसी ही थी जैसी भाव भंगिमा की देश उनसे अपेक्षा करता है। निश्चय ही पाकिस्तान और चीन हमारे देश के प्रधानमंत्री के इस तेजस्वी भाषण से घबरा गए होंगे।
हमारा ऐसा कहने का एकमात्र कारण यही है कि हमने वह दौर भी देखा है जब देश के प्रधानमंत्री लाल किले से बोलकर तो गए , परंतु शत्रु को किसी भी प्रकार की चेतावनी देना वह या तो भूल गए या उनके बस की बात नहीं रही । परंतु अब प्रधानमंत्री मोदी ने दिखा दिया है कि हम अब बिना किसी हिचकिचाहट के लाल किले की प्राचीर से शत्रु को ललकारने की स्थिति में आ चुके हैं । आज का लाल किला बलिदानी भाषा बोल रहा है और बलिदानों का सम्मान करना भी अपने लिए गौरव का विषय मानता है । बहुत दिनों से देश के लोगों को यह इंतजार था कि लाल किला कब बलिदानी भाषा बोलेगा ? हमारे देश का इतिहास बलिदानियों का इतिहास रहा है। जब देश के लोग पराधीनता के काले दिनों में अपने बलिदान दे रहे थे तो वह तेजस्वी ,ओजस्वी व प्रतापी भारत के निर्माण के लिए ऐसा कर रहे थे । आज वही तेजस्वी ,ओजस्वी और प्रतापी भारत संसार के सामने है । जिसके लिए सावरकर जी का ‘राजनीति का हिंदू करण और हिंदुओं का सैनिकीकरण’ – का सपना साकार और बलवती होता जा रहा है।
पीएम ने लाल किले से कहा कि इतनी आपदा के बाद भी सीमा पर देश के सामर्थ्य को चुनौती देने की गंदी कोशिश हुई है । भारत की संप्रभुता की रक्षा के लिए पूरा देश एक जोश से भरा हुआ है। संकल्पों से प्रेरित है और सामर्थ्य पर अटूट श्रद्धा से आगे बढ़ रहा है। इस संकल्प के लिए हमारे वीर जवान क्या कर सकते हैं, देश क्या कर सकता है ये लद्दाख में दुनिया ने देख लिया है। प्रधानमंत्री के इन शब्दों में देश की सशस्त्र सेनाओं के प्रति देश का विश्वास झलकता है। वास्तव में सारा देश अपनी सशस्त्र सेनाओं पर गर्व और गौरव अनुभव करता है। जिनकी बलिदानी भावना के कारण सारा देश रात को निश्चिंत होकर सोता है । आज हमारे इन्हीं शेरों के कारण सारी दुनिया भारत का नेतृत्व स्वीकार करने के लिए लालायित खड़ी है।
पीएम ने कहा कि मैं आज मातृभूमि पर न्योछावर उन सभी वीर जवानों को आदरपूर्वक नमन करता हूं। आतंकवाद हो या विस्तारवाद भारत आज इसका डटकर मुकाबला कर रहा है। प्रधानमंत्री का यह शब्द भी बहुत महत्वपूर्ण है उन्होंने ऐसा कह कर आतंकवाद को पाकिस्तान के साथ और विस्तारवाद को चीन के साथ सफलतापूर्वक जोड़ दिया है और संसार को यह संकेत व संदेश दे दिया है कि भारत आतंकवाद और विस्तारवाद के इन दोनों नागों से खेल रहा है । इसके अतिरिक्त भाषा की स्पष्टता और मजबूती के सहारे प्रधानमंत्री ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि हम इन दोनों नागों का फन कुचलने की स्थिति में है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा भारत के जितने प्रयास शांति और सौहार्द के लिए हैं, उतनी ही प्रतिबद्धता अपनी सुरक्षा के लिए, अपनी सेना को मजबूत करने की है। इससे पता चलता है कि वह देश के सैनिकीकरण की उस प्रबल इच्छाशक्ति से अभिभूत हैं , जो किसी भी देश की सफलता और मजबूती के लिए वीर सावरकर जी ने संकल्पित की थी ।उन्होंने कहा कि भारत अब रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता के लिए भी पूरी क्षमता से जुट गया है। देश की सुरक्षा में हमारे बॉर्डर और कोस्टल इंफ्रास्ट्रक्चर की भी बहुत बड़ी भूमिका है।पीएम ने कहा कि हिमालय की चोटियां हों या हिंद महासागर के द्वीप, आज देश में रोड और इंटरनेट कनेक्टिविटी का अभूतपूर्व विस्तार हो रहा है, तेज़ गति से विस्तार हो रहा है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत ने असाधारण समय में असंभव को संभव किया है। इसी इच्छाशक्ति के साथ प्रत्येक भारतीय को आगे बढ़ना है। वर्ष 2022, हमारी आजादी के 75 वर्ष का पर्व, अब बस आ ही गया है। उन्होंने कहा कि हमारी Policies, हमारे Process, हमारे Products, सब कुछ सर्वश्रेष्ठ होने चाहिए, तभी हम एक भारत-श्रेष्ठ भारत की परिकल्पना को साकार कर पाएंगे।
रक्षा विशेषज्ञ शंकर प्रसाद ने कहा कि पीएम ने पड़ोसी देशों को लेकर भी अपनी नीति स्पष्ट कर दी है, जिन देशों से हमारे मत मिलते हैं उनसे अच्छे संबंध रखने में हमें गुरेज नहीं है। शंकर प्रसाद के मुताबिक पीएम मोदी ने रक्षा क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को लेकर खासा जोर दिया है. उन्होंने कहा कि इसी कड़ी में भारत ने अपने जरूरत के रक्षा सामानों को खुद बनाने का फैसला किया है।देश के सभी गांवों में फाइबर ऑप्टिक्स बिछाने के फैसले का रक्षा विशेषज्ञ शंकर प्रसाद ने स्वागत किया और कहा कि इसका फायदा सीमा पर स्थित गांवों को भी मिलेगा। इसके अलावा पीएम बॉर्डर एरिया में बुनियादी सुविधाएं जैसे कि सड़क, मोबाइट नेटवर्क और बिजली के विस्तार पर भी जोर दिया।
रक्षा विशेषज्ञ लेफ्टिनेंट जनरल शंकर प्रसाद (रि) ने एनसीसी पर जोर दिया और उन्हें ज्यादा जिम्मेदारियां देने पर जोर दिया है। इससे देश की रक्षा में एनसीसी की भागीदारी बढ़ेगी। नेवी और एयरफोर्स में महिलाओं को युद्ध के मोर्चे पर तैनात करने की घोषणा को शंकर प्रसाद ने अहम फैसला बताया। उन्होंने कहा कि आर्मी में अभी महिला सैनिक कॉम्बैट रोल में नहीं आई हैं, लेकिन असम राइफल्स की महिला सैनिक जम्मू-कश्मीर में तैनात हैं। उन्होंने कहा कि पीएम ने संदेश दिया है कि महिलाओं को भविष्य में कॉम्बैट रोल भी मिलेगा। रक्षा विशेषज्ञ शंकर प्रसाद ने कहा कि पीएम 80 से 90 फीसदी भाषण विकास, स्वास्थ्य और कोरोना पर केंद्रित था लेकिन पीएम ने संतुलित तरीके से चीन और पाकिस्तान को संदेश दे दिया कि ये दोनों देश चौकन्ने हो जाएं, लद्दाख में हमने करके दिखा दिया है और अगर धृष्टता करने की कोशिश की गई तो भारत और भी ताकतवर तरीके से दुश्मनों का जवाब देगा।
इस प्रकार यही कहा जा सकता है कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देश की अंतरात्मा को छूते हुए और अंतश्चेतना को झंकृत करते हुए जिस प्रकार तेजस्वी और ओजस्वी भाषण दिया है , उससे राष्ट्र की चेतना शक्ति और प्रबल होगी तथा जिस बलिदानी और क्रांतिकारी भावना से प्रेरित होकर हमें आजादी दिलाने के लिए हमारे क्रांतिकारियों ने अपने बलिदान दिए थे , उसकी रक्षा के लिए हम और भी अधिक सचेत , जागरूक और सावधान होकर आगे बढ़ेंगे।

डॉ राकेश कुमार आर्य
संपादक : उगता भारत

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