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थार का गहना बिश्नोई समुदाय

* भारत की आंचलिक संस्कृति*___________________

आज से 500 वर्ष पूर्व 15 वी शताब्दी में पूज्य जंभोजी ( जंभेश्वर) नामक संत ने राजस्थान के जोधपुर बीकानेर क्षेत्र में एक ऐसे अनूठे हिंदू पंथ की स्थापना की.. जहां जात पात को छोड़कर 29 नियमों को अपनाकर कोई भी व्यक्ति बिश्नोई बन सकता है विश्नोई कोई जाति नहीं एक विचारधारा को मानने वाले सुधार उन्मुख पर्यावरण हितैषी व्यक्तियों का समुदाय है..|

जलवायु परिवर्तन पर्यावरण संकट व जैव विविधता के खतरे को 500 वर्ष पहले ही पूज्य जंभोजी संत ने भाप लिया था… वन्य जीवों का शिकार व पेड़ों को काटना इस पंथ में घोर पाप माना जाता है बिश्नोई समाज अपनी जान पर खेलकर पेड़ों व वन्यजीवों की रक्षा करते हैं… 18वीं शताब्दी में खेजरी के वृक्षों को बचाने के लिए जोधपुर महाराज की खेजड़ी पेड़ काटने की आज्ञा के विरोध में बिश्नोई समाज की माता अमृता देवी पेड़ों से चिपक गई थी..363 से अधिक बिश्नोई समाज के लोगों का बलिदान हो गया था.. इतने बड़े बलिदान नरसंहार के पश्चात जोधपुर महाराज की सेना को वापस लौटना पड़ा था… इतना ही नहीं काले हिरण मामले में बिश्नोई समाज ने ही अभिनेता सलमान खान को 20 वर्ष चले लंबे मुकदमे में जोधपुर न्यायालय से सजा दिलवाई है हालांकि वह जमानत पर चल रहे हैं… विश्नोई समाज काले हिरण को विष्णु का अवतार मानता है बिश्नोई समाज की महिलाएं हिरण को पालती हैं अपना दूध पिलाती हैं.. एक बार फिर स्पष्ट करना चाहूंगा बिश्नोई कोई जाति नहीं 20 प्लस 9 अर्थात( बीस + नौ = बिश्नोई )29 नियमों को मानने वाला बिश्नोई कहलाता है… यह नियम वैदिक सनातन धर्म से अलग नहीं है उन्हीं का निचोड़ है इन नियमों पर चलकर बिश्नोई समाज ने अभूतपूर्व प्रगति की है आज बिश्नोई समाज शिक्षा और राजनीति प्रशासन आदि क्षेत्रों में अग्रणी उन्नति शील है बिश्नोई समाज राजस्थान हरियाणा मध्य प्रदेश में पाया जाता है 15 लाख से अधिक इनकी आबादी है…. दलित जाट गुर्जर बनिया आदि जातियां विश्नोई पंथ में शामिल होकर विश्नोई कहलाए… आर्य समाज के पश्चात जाति विहीन समाज की स्थापना में विश्नोई पंथ का अमूल्य योगदान है…|

बिश्नोई समाज के 29 नियम इस प्रकार हैं……….

तीस दिन सूतक
२. पंच दिन का रजस्वला
३. सुबह स्नान करना
४. शील, संतोष, शुचि रखना
५. प्रातः-शाम संध्या करना
६. साँझ आरती विष्णु गुण गाना
७. प्रातःकाल हवन करना
८. पानी छान कर पीना व वाणी शुद्ध बोलना
९. ईंधन बीनकर व दूध छानकर पीना
१०. क्षमा सहनशीलता रखे
११. दया-नम्र भाव से रहे
१२. चोरी नहीं करनी
१३. निंदा नहीं करनी
१४. झूठ नहीं बोलना
१५. वाद विवाद नहीं करना
१६. अमावस्या का व्रत रखना
१७. भजन विष्णु का करना
१८. प्राणी मात्र पर दया रखना
१९. हरे वृक्ष नहीं काटना
२०. अजर को जरना
२१. अपने हाथ से रसोई पकाना
२२. थाट अमर रखना
२३. बैल को बंधिया न करना
२४. अमल नहीं खाना
२५. तम्बाकू नहीं खाना व पीना
२६. भांग नहीं पीना
२७. मद्यपान नहीं करना
२८. मांस नहीं खाना
२९ नीले वस्त्र नहीं धारण करना
विश्नोई समाज में शवों को दफनाने की की प्रथा है… | गुरु जंभेश्वर के 120 उपदेश जिन्हें शब्द कहा जाता है उनका प्रत्येक शुभ अवसरों पर बिश्नोई समाज के लोग पाठ करते हैं जो वेदों की उदार शिक्षाओं का ही सरल सहज रुप है .!

सचमुच बिश्नोई समाज भारत का अनूठा समाज है जो पाखंड पोप लीला में विश्वास नहीं करता आचरण व पर्यावरण की सुचिता में विश्वास रखता है.. पौराणिक हिंदुओं की भांति बिश्नोई समाज में मूर्ति पूजा नहीं होती |

*आर्य सागर खारी* ✍️✍️✍️

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