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भारतीय संस्कृति

बाल्मीकि रामायण बालकांड का ऐतिहासिक , सांस्कृतिक , तथ्यात्मक सार

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रघुकुल शिरोमणि मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र के जीवनी लेखक रामायण महाकाव्य के रचयिता महर्षि वाल्मीकि इस पुनीत कार्य को करने के प्रथम व अंतिम अधिकारी थे| वाल्मीकि रामायण के प्रथम बालकांड में अयोध्या अयोध्या वासियों ,अयोध्या की वास्तुकला, सांस्कृतिक आर्थिक ,संपन्नता का जितना सटीक सारगर्भित सूक्ष्म मनोवैज्ञानिक वर्णन तथ्य अन्वेषी वर्णन किया गया है वह दुरुह कार्य वाल्मीकि जैसा ऋषि ही कर सकता था| आप सभी आदरणीय मित्रों के लिए मैंने वाल्मीकि संस्कृत रामायण के बालकांड से चुनिंदा 20 बिंदुओं में इन सभी ऐतिहासिक सांस्कृतिक तथ्यों को आपके सामने प्रस्तुत समावेशन का प्रयास किया है | आप पाएंगे अतीत का रामायण कालीन वैदिक भारत कितना भव्य संपन्न सुशिक्षित था| आप अनुभव करेंगे राम की स्मृति में बनाए जाने वाला कोई भी मंदिर राम की अयोध्या से ज्यादा दिव्य भव्य नहीं हो सकता| वाल्मीकि रामायण बालकांड से संग्रहित कुछ तथ्य इस प्रकार है|

(1) अयोध्या कौशल देश की नगरी थी जिसे महाराज मनु ने बसाया था| (श्लोक संख्या 12 तीसरा सर्ग बालकांड)

(2) अयोध्या 60 मील लंबी 15 मील चौड़ी आयताकार थी| (श्लोक संख्या 2 तीसरा सर्ग बालकांड)

(3) अयोध्या के राज भवनों का रंग सुनहरा था| महाराजा दशरथ के मुख्य राजभवन का रंग सफेद था| अयोध्या नगरी के सभी राजभवन सात मंजिला ऊंचे थे |( श्लोक संख्या 8 9 10 तीसरा सर्ग)

(4) अयोध्या में हमेशा सांस्कृतिक उत्सव होते थे वेद गान प्रतियोगिताएं होती थी स्त्रियों की नाटक समितियां थी| (श्लोक संख्या 11 तीसरा सर्ग)

(5) कोई भी अयोध्यावासी कामी क्रोधी कंजूस नहीं था कोई भी ऐसा नहीं था जो बाजूबंद ना पहनता हो सभी के हाथों में सोने के कड़े थे कोई ऐसा मनुष्य नहीं था जो चोरी करता हो या वर्णसंकर हो दीन पागल मानसिक विकलांग कोई नहीं था सभी गृहस्थ धन-धान्य गाय बैल घोड़े से युक्त थे|( श्लोक संख्या 5, 6 ,7 ,8 चौथा सर्ग)

(6) महाराज दशरथ के आठ मंत्री थे जिनके नाम इस प्रकार थे| धरष्टि ,जयंत, विजय, सिद्धार्थ ,अर्थसाधक अशोक, मंत्रपाल, सुमंत्र महाराज दशरथ इनकी सलाह के बगैर कोई कार्य नहीं करते थे| (श्लोक संख्या 5,6, पांचवा सर्ग)

(7) वशिष्ठ और वामदेव दो प्रधान ऋत्विक थे|

(8) पुत्र प्राप्ति के लिए महाराज दशरथ ने सरयू नदी के किनारे पुत्रष्टि यज्ञ कराया, यज्ञ ऋषि श्रंग ने कराया उनकी पत्नी शांता भी यज्ञ में शामिल रही|( श्लोक संख्या 10 ,11 छठवां सर्ग )

(9) बसंत ऋतु में यह यज्ञ कराया गया |यज्ञ कुंड में सोने के पात्र में पीपल के वृक्ष पर चढ़े हुए खेजड़ी के वृक्ष से निर्मित विशेष पंचांग से निर्मित खीर चारों रानियों को दी गई |छह ऋतु बीतने के पश्चात 12 मास में चैत्र मास की नवमी तिथि में पुनर्वसु नक्षत्र में जब पांच ग्रह सूर्य मंगल बृहस्पति शुक्र सनीचर अपने उच्च स्थान में स्थित थे कर्क लग्न में चंद्रमा के साथ बृहस्पति के उदय होने पर कौशल्या जी के गर्भ से राम का जन्म हुआ| भरत का जन्म पुष्य नक्षत्र और मीन लग्न में हुआ| लक्ष्मण और शत्रुघ्न का जन्म अश्लेषा नक्षत्र और कर्क लग्न के सूर्य उदय होने पर हुआ सुमित्रा के गर्भ से| (श्लोक संख्या 5 6 7 8 नवम सर्ग)

(महर्षि वाल्मीकि द्वारा चारों राजकुमारों के जन्म की यह बालकांड में वर्णित यह तिथियां इतना सटीक प्रमाणित वर्णन यह सिद्ध करता है महर्षि वाल्मीकि आदि कवि होने के साथ-साथ खगोलशास्त्री भी थे |)

(10) 60 वर्ष की उम्र में महाराज दशरथ को चारों पुत्र की प्राप्ति हुई| (श्लोक संख्या 19 11 वा सर्ग)

(11) जन्म के 11 दिन चारों राजकुमारों का नामकरण संस्कार महर्षि वशिष्ठ ने कराया|

(12) 15 वर्ष की सुकुमार किशोर अवस्था में महर्षि विश्वामित्र विधिवत अध्ययन ऋषि-मुनियों यज्ञ की रक्षा के लिए राम और लक्ष्मण को महाराज दशरथ से मांग कर ले गए| श्लोक संख्या (3 13 वा सर्ग)

(13) महर्षि विश्वामित्र के सानिध्य में राम लक्ष्मण 10 वर्ष रहे| इन 10 वर्षों के दौरान अधिकतर समय ऋषि मुनियों के यज्ञ की रक्षा में दोनों राजकुमारों का गुजरात 10 वर्षों के दौरान महर्षि विश्वामित्र ने राम को बला ,अति बला नामक विद्या प्रदान की इन विद्याओं से भूख प्यास पर नियंत्रण , थकावट पर विजय, बुखार ना आना संभव हो सका| (श्लोक संख्या 5, 14 वा सर्ग)

[वाल्मीकि द्वारा रामायण में वर्णित विश्वामित्र द्वारा राम लक्ष्मण को प्रदत यह विद्या असल में स्पेशल ट्रेनिंग थी जो आजकल स्पेशल फोर्स में दी जाती है जंगल की विपरीत प्रतिकूल परिस्थितियों में हालात पर नियंत्रण रखने के लिए यह प्रशिक्षण होता है| डिस्कवरी चैनल के विश्वविख्यात शो मैन वर्सेस वाइल्ड में भी ऐसा ही प्रशिक्षण दिखाया जाता है | यह प्रशिक्षण मर्यादा पुरुषोत्तम राम, लक्ष्मण के 14 वर्ष के दंडकारण्य जैसी भीषण वन क्षेत्र (आज का मध्य दक्षिण भारत नक्सल प्रभावित क्षेत्र )वनवास में काम आया]

(14) महर्षि विश्वामित्र ने राम को सिद्ध आश्रम( आज के बक्सर जनपद छत्तीसगढ़) में वन गमन के दौरान जो अस्त्र दान दिया वह इस प्रकार है| महादिव्य दंडचक्र विद्याचक्र धर्मचक्र कालचक्र विष्णुचक्र प्रचंड इंद्रास्त्र वज्र अस्त्र महादेवस्त्र ब्रह्मासिर अस्त्र, ऐसीख अस्त्र, मोदकी सिखरी नामक दो गदा| धर्मपाश कालपाश वरुणपाश शुष्क और आद्र नामक असनिया ,शिखर ,पैनाक अग्नियास्त्र, वायुअस्त्र हांसीरअस्त्र कंकाल मुसल कपाल कडून नामक शक्तियां| विषाद नंदन अस्त्र, क्रौंचअस्त्र, मानव नाम वाला गंधर्वअस्त्र, सुलाने वाला प्रस्तावन अस्त्र, प्रशमन शोषण वर्शन संतआपन विलापन (रुलाने वाला अस्त्र) कामउत्पादक दुर्दहर्ष , मोहित करने वाला मदनअस्त्र, तामस पैसासांच अस्त्र सोमन अस्त्र संवर्ग शत्रु के तेज को खींचने वाला तेज हरने वाला तेजप्रभ अस्त्र, आदि अस्त्र महर्षि विश्वामित्र ने राम को प्रदान किए| (श्लोक संख्या 1 से लेकर 35 , 16 17 सर्ग)

विशेष टिप्पणी- यह जो नाम उल्लेखित उपरोक्त अस्त्र है इन सभी का उल्लेख वाल्मीकि रामायण के बालकांड के 16 व 17 सर्ग में मिलता है| इनमें कुछ अस्त्रों का नामकरण उनके आविष्कारक ऋषि और कुछ का उन अस्त्रों की आकृति आकार के कारण हुआ है| भारत लाखो वर्ष पहले अस्त्र शस्त्रों के अनुसंधान में पूरी प्रगति कर चुका था| ऊपर बिंदु में रुलाने, सुलाने वाले अस्त्रों का उल्लेख आया है यह अस्त्र केमिकल वेपन थे| केमिकल वेपन का इस्तेमाल आधुनिक युग में प्रथम व द्वितीय विश्व युद्ध में हुआ लेकिन हमारे पूर्वज दुष्ट राक्षसों विधर्मी मनुष्यों के ऊपर इनका इस्तेमाल लाखो वर्ष पहले ही कर चुके थे|

(15) विवाह के समय भगवान श्री राम की आयु 25 वर्ष माता सीता के आयु 18 वर्ष थी यह मनगढ़ंत धारणा है कि सीता और राम का बाल विवाह हुआ था |राम के स्वयंवर की शर्त पूरा करने की जानकारी जनक के दूतों के द्वारा महाराज दशरथ को 4 दिन बाद पता चली| वैदिक काल में विवाह आचार्यों के अधीन होता था अनौपचारिकता के तौर पर माता-पिता की सहमति पश्चात में ली जाती थी|( श्लोक संख्या 1 2 3, 27 वा सर्ग)

(16) महाराज दशरथ चतुरंगनी सेना लेकर धूमधाम से चारों राजकुमारों की बरात लेकर मिथिलापुरी गए थे बरात में शामिल ऋषि वशिष्ठ वामदेव जाबालि कश्यप मार्कंडेय कात्यायन आदि थे|( श्लोक संख्या 5, 27 सर्ग)

(17) मर्यादा पुरुषोत्तम राम सहित चारों राजकुमारों का विवाह जनक के पुरोहित शतानंद ने कराया राम लक्ष्मण की पत्नी माता सीता उर्मिला महाराज जनक की पुत्री थी जबकि भारत शत्रुघ्न की पत्नी मांडवी श्रुतिकीर्ति जनक के छोटे भाई महाराज कुशध्वज की पुत्री थी शंकायपुरी का राजा था| चारों राजकुमारों के विवाह संस्कार में ननिहाल पक्ष से केवल भरत के मामा महान सम्राट अश्व पति के पुत्र युद्धजीत ही शामिल थे जो संयोगवश मिथिला पुरी में आ गए थे|( श्लोक संख्या 14 15 16 17 31 वा सर्ग)

(19) चारों राजकुमारों के विवाह संस्कार के पश्चात महाराज दशरथ ने राजकुमारों की मंगल कामना के लिए मिथिला पुरी में ही बने अपने अस्थाई डेरे पर 400000 गाय सोने कि सिंग जड़ित कांस्य धातु के दोहन पात्र सहित जरूरतमंद लोगों को दान में दी| यह विवाह के अवसर पर वर वधु दोनों पक्ष द्वारा की जाने वाली गोदान की वैदिक परंपरा थी जो महाभारत काल आते-आते लुप्तप्राय हो गई| (श्लोक संख्या 18, 19 31 वा सर्ग)

(20) मर्यादा पुरुषोत्तम राम और माता सीता ने विवाह के पश्चात सुख से 12 वर्ष एक साथ अयोध्या राज महल में विहार किया| विवाह के समय मर्यादा पुरुषोत्तम राम की आयु 25 वर्ष तथा वनवास के समय उनकी आयु 37 वर्ष थी| (वाल्मीकि रामायण बालकांड श्लोक संख्या 20 21 36 सर्ग)

उपरोक्त 20 बिंदु आत्मक तथ्य संस्कृत वाल्मीकि रामायण के बालकांड से लिए गए हैं अन्य संस्कृत रामायण के संस्करणों में श्लोक व सर्ग की संख्या आगे पीछे हो सकती है| महर्षि वाल्मीकि का बालकांड अयोध्या, अयोध्या वासियों के वर्णन से शुरू होकर राम के जन्म से लेकर राम के विवाह पर समाप्त हो जाता है| हम राम की जय उस दिन सच्चे अर्थों में बोलेंगे जब हमारे घरों में यह ऐतिहासिक अमर काव्य महर्षि वाल्मीकि रामायण के रूप में अध्ययन के लिए उपलब्ध रहेगा| बोलिए भगवान वाल्मीकि की जय, मर्यादा पुरुषोत्तम श्री रामचंद्र की जय, सत्य सनातन वैदिक धर्म की जय!

आप सभी को सादर नमस्ते!

आर्य सागर खारी ✍✍✍

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