Categories
इतिहास के पन्नों से

अयोध्या अपना राम स्वयं चुनती है

*************************

महाकवि कालिदास रचित महाकाव्य “रघुवंशम्” अद्भुत ग्रंथ है, इक्ष्वाकुवंशी राजाओं के वृत्त को जिस सुन्दरता से कालिदास ने गाया है वैसा अन्यत्र नहीं मिलता. इस महाकाव्य के षोडशवें सर्ग में राम और उनके भाइयों के पुत्रों का वर्णन है. राम ने अपने बड़े बेटे कुश को “कुशावती” नामक राज्य सौंपा था. रघुवंश के सभी सात भाइयों ने अलग-अलग राज्यों पर शासन तो किया पर वो सबके सब रघुकुल की रीति के अनुरूप अपने सबसे बड़े भाई कुश को अपना प्रधान और पूज्य मानतें थे.

यही “जानकीनंदन कुश” एक दिन राजकाज से निवृत होकर जब रात्रि विश्राम हेतू अपने कक्ष में गये तो आधी रात को देखा कि उनके शयन कक्ष का द्वार अंदर से बंद होने के बाबजूद एक स्त्री उनके घर के अंदर आई हुई है. वो फौरन अपनी शैय्या से उठे और उस स्त्री से कहा,

“शुभे ! तुम कौन हो और तुम्हारे पति का नाम क्या है? तुम यह समझकर ही मुंह खोलना कि हम रघुवंशियों का चित्त कभी भी पराई स्त्रियों की ओर नहीं जाता”.

उस स्त्री ने उत्तर देते हुये कहा कि मैं आपके “राम के अयोध्या की अधिष्ठात्रि देवी” हूँ जो राम के बैकुंठ गमन के बाद से ही अनाथ हूँ. राम के बिना सैकड़ों अट्टालिकाओं से युक्त होने के बाबजूद मेरी अयोध्या ऐसी उदास लगती है मानो सूर्यास्त के बाद की डरावनी संध्या. जब राम थे तो मेरी अयोध्या अपने ऐश्वर्य में कुबेर की अलकापुरी को भी मात देती थी पर राम के बिना आज अयोध्या सूनी पड़ी हुई है. पहले अयोध्या की जिन सड़कों पर चमकते और मधुर ध्वनि करते नूपुरवाली अभिसारिकायें चलती थीं वहां आजकल सियारिनें घूमतीं हैं जिनके मुख से चिल्लाते समय चिंगारियाँ निकलती है. राम से सूनी हुई अयोध्या में न तो अब मोर नाचतें हैं, न वहां मृग भ्रमण करतें हैं, कमल के ताल में खेलने वाले हाथी भी नहीं हैं. नगर की जिन बाबलियों का जल पहले जल-क्रीड़ा करने वाली सुंदरियों से संवरता था, आज वहां जंगली भैंसे दौड़तें हैं.

ये सब कहकर उस स्त्री ने कुश से निवेदन किया कि राम न सही तो कम से कम हे जानकीनंदन कुश ! आप तो अयोध्या चलें. कुश ने प्रसन्नतापूर्वक उस स्त्री की प्रार्थना स्वीकार कर ली और “राम की अयोध्या” के परित्राण के लिये अयोध्या की ओर चल पड़े.

कुश जब अयोध्या पहुँचते हैं तो उस समय का वर्णन करते हुये महाकवि कालिदास लिखतें हैं,

“अयोध्या के उपवन की वायु ने फूल से आच्छादित वृक्ष की डालियों को थोड़ा हिलाकर और सरयू के शीतल तरंगों का स्पर्श करके सेना के साथ थके हुये कुश का स्वागत किया”.

कुश ने “रघुवंशियों के अयोध्या” की कायापलट कर दी. मुनियों को बुलवाकर पहले तो पूरी अयोध्या नगरी की पूजा करवाई फिर वहां और दूसरे काम किये जिसके बाद वो नगरी ऐसी लगने लगी मानो “सारे शरीर में आभूषण घारण की हुई कोई सुंदर स्त्री” हो. वो अयोध्या ऐसी हो गई कि मिथिलेशकुमारी के पुत्र कुश को फिर न तो इन्द्र्लोक की कामना रही, न स्वर्ग के वैभव की और न ही असंख्य रत्नों वाली अलकापुरी की और इस तरह “जानकीनंदन कुश” ने खुद को भारत के इतिहास में अमर कर लिया.

“अयोध्या जिसे चुनती है समझो स्वयं सौभाग्य उसका वरण करता है” और जो अयोध्या को पूजता है उसके लिये स्वर्ग में बैठे देवता भी कहतें हैं कि देखो, इसके पूर्व जन्म के संचित कर्म कैसे उत्तम हैं कि इसे उस अयोध्या के वंदन का सौभाग्य मिला है जिसकी गोद में खेलने वालों ने “गंगा” को धरती पर अवतरित किया था, जिसकी मिट्टी को “बिष्णु अवतार श्रीराम” ने स्वर्ग से भी बढ़कर बताया था, जहाँ रघु, दिलीप और सगर और दशरथ जैसे महान कीर्ति वाले राजा हुये थे, जो वशिष्ठ और विश्वामित्र जैसे ऋषियों के आशीर्वाद से निर्मित हुई थी और जहाँ की पवित्र विश्वरम्भा ने माँ जानकी को अपनी गोद में समां लिया था.
“अयोध्या की अधिष्ठात्रि देवी” अपनी अयोध्या की दशा से विकल होकर सबके पास नहीं जाती. वो उनको ही अपनी अयोध्या के पुनः-कायाकल्प और इस पावन नगरी के पूजन का अवसर देतीं हैं जिनके अन्त:स्थ में श्रीराम से अगाध प्रेम हो और जिनके लिये प्रभु श्रीराम केवल राजनीति और सत्ता साधने मात्र का जरिया नहीं बल्कि आराध्य हों.
– ✍🏻अभिजीत सिंह

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
kolaybet giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark güncel giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
vdcasino
betgaranti
betpark giriş
betpark güncel giriş
vdcasino
vdcasino
jojobet güncel
betgaranti giriş
betgaranti güncel giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meritbet giriş
meritbet giriş
jojobet
jojobet
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet giriş
favorisen
betpark giriş
hitbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpas giriş
bettilt giriş