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राम मंदिर का निर्माण भारत की अखंडता का प्रतीक : नहीं भुलाया जा सकेगा हिंदू महासभा का ऐतिहासिक योगदान

5 अगस्त 2020 को श्री राम मंदिर का भूमि पूजन किया जा रहा है और उसका सीधा प्रसारण दूरदर्शन पर किया जाना तय हुआ है। कुछ सेक्युलरवादी राजनीतिक पार्टियों के लिए सियासी मुद्दा बन गया है। कुछ पार्टी के नेताओं को तो लगता है जैसे एक बहुत बड़ा सदमा लगा हो। यह वही लोग हैं और वही पार्टियां है जिन्होने पहले राम लल्ला के अस्तित्व पर ही प्रश्न चिन्ह लगाया था। सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसलों के बावजूद लेफ़्ट समाजवादी कांग्रेसी व साम्यवादी बार बार ओछेपन पर उतर आते हैं। कॉंग्रेस के बारे में तो सारा देश जानता है कि उनकी आस्था कहाँ है या कि फिर है ही नहीं।

अयोध्या में श्री राम मंदिर के भूमि पूजन का सीधा प्रसारण होगा तो भारत में रहने वाले ही नहीं पूरे विश्व में रहने वाले हिंदू और सनातन धर्म में आस्था और विश्वास रखने वाले अन्य लोग भी इसे देखेंगे। पूरा विश्व इस ऐतिहासिक क्षण में भागीदारी करने के लिए उत्सुक है और कुछ राक्षस रोड़ा अटकाने के लिए। कुछ राक्षस नहीं जानते कि कलयुग में भी राम के भक्तों की कमी नहीं है। ये मंदिर पूरे भारत की अखंडता का भी प्रतीक है एक सनातन स्मारक है और जिन्होंने इस मंदिर के लिए अपना जीवनदान दिया यह उन सब के लिए भी एक सच्ची श्रद्धांजलि का भी प्रतीक है। अखिल भारत हिंदू महासभा , निर्मोही अखाड़ा और राम लल्ला विराजमान ने स्वतंत्र भारत में पिछले 70 वर्ष से राम मंदिर निर्माण को लेकर जिस प्रकार लड़ाई लड़ी है वह भी अपने आप में बहुत ही सराहनीय और ऐतिहासिक रही है। हिंदू महासभा जैसे संगठन के इस ऐतिहासिक योगदान को इतिहास कभी भुला नहीं पाएगा ।
यह कहना ग़लत नहीं होगा आज इस विजयश्री के ठेकेदार कोई भी बने , परंतु वास्तविकता यही है कि हिंदू महासभा के इस अद्भुत प्रयास में विजय सम्पूर्ण हिंदू धर्म की है सनातन की है। शायद कुछ ही लोग जानते होंगे कि राम मंदिर के लिए अनेक साधु संतों, सनातन धर्म का पालन करने वाले परिवारों और लाखों कार्यकर्तायों ने एक बहुत लम्बी लड़ाई लड़ी है। पोलिस और अधर्मी सरकारों का अत्याचार सहा है। ५ अगस्त का दिन हर उस हिंदू के लिए किसी महापर्व से कम नहीं होगा। इस महापर्व में किसी भी माध्यम से जुड़ पाना किसी महाकुम्भ से भी बढ़कर होगा।

समूचे विश्व में भारत की आध्यात्मिक शक्ति को सम्मान मिल रहा है परंतु कुछ ज्ञानी समझते है कि इस से भारत की सेक्युलर छवि धूमिल होगी । दूरदर्शन पर सभी धर्मों के त्योहारों का नियमित रूप से प्रसारण किया जाता रहा है और किसी को कोई आपत्ति नहीं होती। जब अटल बिहारी वाजपेयी जी ने २००२ में हज का प्रसारण दूरदर्शन पर करवाया तब किसी को सम्प्रदायक नहीं लगा। ना ही तब, जब पोप या मदर टेरेसा के प्रोग्राम दूरदर्शन पर दिखाए गए। पर ८० प्रतिशत हिंदू राष्ट्र में राम मंदिर के भूमि पूजन को दूरदर्शन पर दिखाने से सेक्युलर मर जाएँगे। सेक्युलरिज़म बर्बाद हो जाएगा।

हिंदू मंदिरों से करोड़ों का चंदा और टैक्स वसूल कर खाने वाली सरकारें और नेता ही हिंदू मंदिरों के कार्यक्रम में रोड़ा अटकाते हैं। इन अधर्मी नेताओं को करारा जवाब मिल ही जाएगा क्योंकि अबसे हिंदू ना झुकेगा और ना रुकेगा।

अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण 500 बरस बाद एक भूल को सुधारने का भी कार्य है । इसमें भारत के ही नहीं विदेशों में रहने वाले हिंदुओं की भी आस्था जुड़ी हुई है। मंदिर का निर्माण सभी भारतवासियों के लिए भारत की अखंडता का भी प्रमाण है।

70 सालों से सबके दिमाग में सनातन धर्म के लिए जहर भर दिया गया था। हिंदुओं को उनको मंदिरों से दूर रखा गया और एक पूर्व नियोजित योजना के अंतर्गत सनातन हिंदू धर्म के खिलाफ एक साजिश रची गई। मीडिया और फिल्मों के जरिए सनातन धर्म को रूढ़िवादी और पिछड़ा दिखाया गया। आज़ादी से लेकर नब्बे के दशक तक आते आते आधुनिक हिंदू युवा मंदिर जाने को ढकोसला मान चुका था। कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टियों की सरकारों ने हिंदू धर्म को नीचा दिखाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। इसकॉन, जिसने सनातन धर्म का विदेशों में प्रचार किया उसे भी हिप्पी और आडंबर बताया गया। मंचो पर हिंदू देवी देवताओं का अभद्र मज़ाक़ बनाया गया। हिंदू के अस्तित्व पर बार बार कीचड़ उछाली गई। बस, बहुत हो चुका। हिंदू जागृत हो चुका है और अपनी प्राचीन सभ्यता और संस्कृति का प्रण ले चुका है।

भव्य राम मंदिर का निर्माण, अखंड़ और अतुल्य भारत के नव-निर्माण का पहला स्तम्भ है। ये सनातन धर्म के अनुयायी हर हिंदू, हर भारतवासी के लिए गर्व करने का क्षण है। ना केवल दूरदर्शन से बल्कि दुनिया के हर माध्यम से, इस आलोकिक और दिव्य निर्माण का साक्षी बनने का अवसर हर जिज्ञासु को मिलना चाहिए। यह भूमि पूजन यह मदिर यह भव्य तिथि कलियुग में सनातन का गौरव लौटाने की नई शुरुआत होगी।
सचमुच हम सब सौभाग्यशाली हैं जो इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बन रहे हैं। भारत ने नई करवट ली है और पुरातन की उस कलंकित परंपरा को मिटाने का सराहनीय और अभिनंदनीय कार्य किया है जिसके चलते इस देश के आदर्श मर्यादा पुरुषोत्तम राम ही मानो जेल में पड़े हुए थे। भविष्य के लिए उम्मीद की जाती है कि हिंदू समाज जिस जागृति का एहसास इस समय करा रहा है वह आगे भी बनी रहेगी और :राजनीति का हिंदूकरण और हिंदुओं का सैनीकीकरण’ करने के वीर सावरकर जी के संकल्प को लेकर अपनी अस्मिता की रक्षा के लिए हिंदू आगे बढ़ने का साहस करेगा।

मृदुल प्रभा

2 replies on “राम मंदिर का निर्माण भारत की अखंडता का प्रतीक : नहीं भुलाया जा सकेगा हिंदू महासभा का ऐतिहासिक योगदान”

Ase vyakti ko trust ka president nahi hona chahiye jo desh or samaaj ki sampatiyon per kabjaa kar atikraman karta he.
Gwalior me Ayodhya ke baba niratiyagopal daas per sarkari bhoomi per kabjaa kar atikraman per upper Thesildar morar ne c.no 14/16-17/A-68 and 15/16-17/A-68 me karyawahi karte huey 1crore se jyaada ka jurmana or atikraman hatane ke adesh kiya. SDM morar ne c.no 0003/17-18/apeal and 0004/17-18/apeal khaarij kar same order rakha. Upper commissioner ne 159/19-20/apeal and 160/19-20/apeal khaarij kar same order rakha. Isi se lagi humari niji bhoomi per mare huey adami ke naam ka farzi kabjaa chadvakar uski farzi vasiyat banakar hadapana chahate he jisme saasan prasaasan unki madad kar raha he.

राम मन्दिर का निर्माण ये हिन्दुओंं की अस्मिता का प्रश्न है / विजय है

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