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आज का चिंतन

प्रधानमंत्री मोदी पर हमला करने को लेकर भी दुविधा में है कांग्रेस

संतोष पाठक

इस बार नए अध्यक्ष की कांग्रेस की तलाश खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। अशोक गहलोत समेत तमाम कांग्रेसी दिग्गजों की अपील को राहुल गांधी ने ठुकराते हुए एक बार फिर से यह साफ-साफ कह दिया है कि वो पार्टी के अध्यक्ष पद की कमान नहीं संभालेंगे।

2019 के लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के बावजूद इस सच्चाई को तो बदला नहीं जा सकता कि कांग्रेस न केवल इस देश की सबसे पुरानी पार्टी है बल्कि आज भी वो विपक्ष की सबसे बड़ी पार्टी है। 52 लोकसभा सांसदों के साथ कांग्रेस देश की मुख्य विपक्षी पार्टी है। लोकतंत्र की कामयाबी के लिए सबसे बड़ी शर्त यही होती है कि पूर्ण बहुमत वाली मजबूत सरकार होनी चाहिए और साथ ही मजबूत इच्छाशक्ति से लैस ताकतवर विपक्ष भी होना चाहिए ताकि बहुमत के बल पर सरकार अपनी मनमानी न कर सके।

संख्या बल के आधार पर निश्चित तौर पर कांग्रेस आज देश की मुख्य विपक्षी पार्टी है लेकिन जहां तक सरकार को घेरने की बात है, कांग्रेस कई बार इसमें चूकती नजर आती है। 2014 के लोकसभा चुनाव में मिली करारी हार के झटके से तो कांग्रेस उबर गई थी लेकिन ऐसा लगता है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के हार के झटके से कांग्रेस अब तक नहीं उबर पाई है। 2019 की करारी हार के बाद तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने यह कहते हुए पद से इस्तीफा दे दिया था कि किसी गैर गांधी परिवार के व्यक्ति को ही पार्टी का अगला राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना चाहिए लेकिन कई महीनों तक चली खोज-बीन और रस्सा-कस्सी के बावजूद आखिरकार कांग्रेस को फिर से अपने अतीत की तरफ ही लौटना पड़ा और अतीत में सबसे लंबे समय तक कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर रहने का रिकार्ड बनाने वाली सोनिया गांधी को ही अंतरिम अध्यक्ष बनाना पड़ा।

मंगलवार को अंतरिम राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यसमिति की वर्चुअल बैठक हुई और इस बैठक में भी कांग्रेस की दुविधा साफ-साफ उभर कर सामने आ गई। पूर्णकालिक अध्यक्ष किसे बनाया जाए, मोदी सरकार को कैसे घेरा जाए, मोदी पर नाम लेकर हमला किया जाए या नहीं… इन सवालों को लेकर कांग्रेस कार्यसमिति की वर्चुअल बैठक में तीखी बहस हुई।

कांग्रेस कार्यसमिति की वर्चुअल बैठक में एक बार फिर से राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने की मांग जोर-शोर से उठी। राजस्थान के मुख्यमंत्री और पार्टी के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने फिर से राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने की मांग करते हुए पुरजोर शब्दों में यह कहा कि राहुल को फिर से पार्टी की कमान संभालनी चाहिए। गुजरात के प्रभारी राजीव सातव सहित राहुल कैंप के कई नेताओं ने राहुल से फिर से पार्टी का अध्यक्ष बनने की मांग की।

जाहिर है कि अध्यक्ष चुनने की कवायद में लगी कांग्रेस घूम-फिरकर फिर से गांधी परिवार पर ही आकर अटक जाती है। सोनिया गांधी ने पद छोड़ा तो राहुल गांधी को बना दिया और राहुल ने पद छोड़ा तो सोनिया को अंतरिम अध्यक्ष बना दिया। लेकिन लग रहा है कि इस बार नए अध्यक्ष की कांग्रेस की तलाश खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। अशोक गहलोत समेत तमाम कांग्रेसी दिग्गजों की अपील को राहुल गांधी ने ठुकराते हुए एक बार फिर से यह साफ-साफ कह दिया है कि वो पार्टी के अध्यक्ष पद की कमान नहीं संभालेंगे। राहुल गांधी ने सबकी बात सुनने के बाद एक बार फिर से अध्यक्ष बनने से मना करते हुए यह कहा कि वो नहीं चाहते हैं कि सोनिया गांधी भी अध्यक्ष बनी रहें। राहुल के मुताबिक गांधी परिवार से बाहर के किसी व्यक्ति को ही कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाना चाहिए जैसा कि उन्होंने पद छोड़ते समय कहा था।

कांग्रेस की दुविधा सिर्फ अध्यक्ष पद को लेकर ही नहीं है बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला जाए या न बोला जाए, बोला जाए तो मोदी का नाम लेकर हमला बोला जाए या न बोला जाए जैसे सवाल भी कांग्रेस को परेशान कर रहे हैं। बैठक में प्रियंका गांधी ने तो यहां तक बोल दिया कि मोदी से राहुल गांधी अकेले ही लड़ रहे हैं, बाकी कोई भी नेता उनका साथ नहीं देता है। कई युवा नेताओं ने उनके सुर में सुर मिलाते हुए यह कहा कि पार्टी के ज्यादातर वरिष्ठ नेता मोदी के खिलाफ न तो कोई बयान देते हैं और न ही कोई ट्वीट करते हैं।

जाहिर है कि कांग्रेस दुविधाओं के ऐसे दौर से गुजर रही है जहां उसकी मुश्किलें खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। कांग्रेसी हैरान-परेशान है और यही हैरानी-परेशानी कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में भी साफ-साफ नजर आई। लेकिन देश के लिए बड़ा सवाल तो यही है कि क्या देश की मुख्य विपक्षी पार्टी की यह हालत होनी चाहिए ? स्वस्थ लोकतंत्र के लिए मजबूत विपक्ष का होना बहुत जरूरी है लेकिन लगता है कि कांग्रेस इस बात को समझ नहीं पा रही है या यूं कहा जाए कि राहुल गांधी अपनी बात को कांग्रेस के बुजुर्ग नेताओं को समझा नहीं पा रहे हैं। इसलिए तो यह कहा जाता है कि कांग्रेस में राहुल और सोनिया कैंप की लड़ाई अभी जारी है।

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