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—-आचार्य ज्ञान प्रकाश वैदिक

सोमरस सोम के पौधे से प्राप्त था , आज सोम का पौधा लगभग विलुप्त है ,

शराब पीने को सुरापान कहा जाता था , सुरापान असुर करते थे , ऋग्वेद में सुरापान को घृणा के तौर पर देखा गया है ,

टीवी सीरियल्स ने भगवान इंद्र को अप्सराओं से घिरा दिखाया जाता है और वो सब सोमरस पीते रहते हैं , जिसे सामान्य जनता शराब समझती है ,

सोमरस , सोम नाम की जड़ीबूटी थी जिसमे दूध और दही मिलाकर ग्रहण किया जाता था , इससे व्यक्ति बलशाली और बुद्धिमान बनता था ,

जब यज्ञ होते थे तो सबसे पहले अग्नि को आहुति सोमरस से दी जाती थी ,

ऋग्वेद में सोमरस पान के लिए अग्नि और इंद्र का सैकड़ो बार आह्वान किया गया है ,

आप जिस इंद्र को सोचकर अपने मन मे टीवी सीरियल की छवि बनाते हैं वास्तविक रूप से वैसा कुछ नही था ,

जब वेदों की रचना की गयी तो अग्नि देवता , इंद्र देवता , रुद्र देवता आदि इन्ही सब का महत्व लिखा गया है ,

मन मे वहम मत पालिये ,

कहीं पढ़ रहा था , किसी ने पोस्ट किया था कि देवता भी सोमरस पीते थे तो हम भी पियेंगे तो अचानक मन मे आया तो लिख दिया ,

आज का चरणामृत/पंचामृत सोमरस की तर्ज पर ही बनाया जाता है बस प्रकृति ने सोम जड़ीबूटी हमसे छीन ली

तो एक बात दिमाग मे बैठा लीजिये , सोमरस नशा करने की चीज नही थी ,

आपको सोमरस का गलत अर्थ पता है अगर आप उसे शराब समझते हैं।
शराब को शराब कहिए सोमरस नहीं ।
सोमरस का अपमान मत करिए ,

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