Categories
भारतीय संस्कृति

सभ्य आचरण और समय का मूल्य

एक मनुष्य अपने जीवन में जितने कर्म एवं क्रियाएं करता है उनका संबंध इच्छा, संवेग ,भावना आदि से न रखते हुए ज्ञान, बुद्धि और विवेक से स्थापित करना चाहिए। यह सभी कर्म क्रियाएं तात्कालिक रूप से अभ्यांतर में अथवा कुछ समय पश्चात मनुष्य के जीवन में दूसरे मनुष्यों को प्रभावित करती हैं । जिनसे दूसरे मनुष्यों को या तो क्षति पहुंचती है अथवा लाभ होता है अर्थात हानिकारक एवं लाभ कारक दोनों प्रकार के विचार एवं क्रियाएं मिलकर एक मनुष्य का आचरण बनाती हैं।
अतः मनुष्य को सदा ही दूसरे व्यक्ति के कल्याण के कार्य करने चाहिए । जिनको सदाचरण अथवा सभ्य आचरण की संज्ञा दी जाती है। तभी समाज का कल्याण हो सकता है । सदा याद रखो कि समाज से हम बाहर नहीं हैं ,इसलिए हमारा कल्याण भी उसी में सम्मिलित है। जो व्यक्ति सकारात्मक सोच का होता है , उसी में सभ्य आचरण होता है।

चिंतन करो चिंता नहीं

मनुष्य को चिंता न करके चिंतन करनी चाहिए क्योंकि चिंता एक प्रकार का मनोविकार है जो धीरे-धीरे शरीर को मृत प्राय कर देता है । जिसके कारण मनुष्य की क्रियाशीलता समाप्त हो जाती है।
मनुष्य का व्यक्तित्व विचार और चिंतन से बनता है। मनुष्य का जीवन उसके चिंतन और समस्त विचारों का प्रतिफल होता है।
मनुष्य अपने विचारों के द्वारा ही उन्नति के उच्चतम लक्ष्य को प्राप्त कर सकता है। एक मनुष्य का जीवन उसी प्रकार का होता है जैसे उसके विचार होते हैं। अतः विचार को जीवन की आधारशिला भी कह सकते हैं। हम चाहे कितने ही धनवान हों , आर्थिक समृद्धि व बौद्धिक समृद्धि क्यों न हमारे पास हो , परंतु यदि हमारे चिंतन में हर समय धन प्राप्त करने की इच्छा बनी रहती है तो उस मनुष्य से अधिक गरीब और कोई नहीं होता। मनुष्य का चिंतन यदि सकारात्मक है तो वह सदा क्रियाशील बना रहता है उसके कर्म उसकी भावनाएं उसके विचार एक जैसे रहते हैं।
मनुष्य को दिव्य व्यक्तित्व प्राप्त करना चाहिए । जिसके लिए व्यवहार शालीन एवं सज्जनोचित होना आवश्यक है। मनुष्य का व्यवहार शिष्ट और शालीन होने के साथ-साथ सदाचार पूर्ण यदि होगा तो वह अनुकरणीय व्यक्तित्व का स्वामी होगा।
जिसके कारण आत्म चेतना में अभिवृद्धि होगी। शिष्टाचार के अभाव में आत्म चेतना मुरझाने लगती है। संवेदनहीनता आने लगती है । सदाचार के साथ-साथ शिष्टाचार भी दम तोड़ने लगता है । जिसके परिणाम स्वरूप जीवन अंदर और बाहर दोनों स्तरों पर रिक्त होता प्रतीत होता है । अतः सदैव एवं सतत शुभ चिंतन मनुष्य को करते रहना चाहिए ।

मर्यादा

मनुष्य के आचरण के लिए एक सीमा रेखा है अर्थात उस सीमा रेखा के बाहर आचरण अनुचित माना जाता है जो अक्षम्य होता है। ऐसे आचरण के कारण ही वाद विवाद और मुकदमे उत्पन्न होते हैं । जिसमें धन और समय की अनावश्यक बर्बादी होती है।
यदि इसके स्थान पर मनुष्य दूसरों के साथ प्रत्येक परिस्थिति में मर्यादित रहना सीख ले अर्थात नैतिकतापूर्ण व्यवहार को अपने जीवन का एक आवश्यक अंग बना ले तो सारी स्थिति बहुत ही सुखदाई बन सकती है । इस प्रकार के आचरण से किसी प्रकार की सीमा के उल्लंघन का या मर्यादा के तोड़ने का प्रश्न ही पैदा नहीं होता। जहां इस प्रकार का सद्भाव पूर्ण वातावरण बन जाता है वहां वाद-विवाद प्रतिवाद सब दूर होकर केवल संवाद रह जाता है।
जहां मर्यादा टूटती हैं सर्वत्र विनाश ही विनाश के गहरे बादल छा जाते हैं। ऐसी संस्थाएं , ऐसे परिवार , ऐसे समाज और ऐसे राष्ट्र सब असमय ही काल के ग्रास बन जाते हैं । यही कारण है कि समझदार लोग परिवार से लेकर राष्ट्र तक अपनी मर्यादाओं का ध्यान रखते हैं । इस बात के प्रति सदैव जागरूक रहते हैं कि मैं दूसरों के प्रति कर्तव्यशील कैसे बना रहा हूं ? वे अधिकार से अधिक अपने कर्तव्य के निर्वाह में विश्वास रखते हैं । मूर्ख लोग अधिकारों को लेकर लड़ते झगड़ते हैं । जिससे परिवार से लेकर संसार में अशांति उत्पन्न होती है । जबकि समझदार लोग एक दूसरे के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वाह करते रहते हैं। उसी से एक दूसरे के अधिकारों की रक्षा अपने आप हो जाती है। रावण ने मर्यादा थोड़ी तो उसकी लंका का विनाश हो गया और दुर्योधन ने द्रौपदी को भरी सभा में अपनी जंघा पर बैठाने का अनैतिक कार्य किया अर्थात मर्यादा का उल्लंघन किया तो उसके भी परिवार का विनाश हो गया।

सात्विकता

शाकाहारी मनुष्य का चिंतन सात्विक होने के कारण उसका आभामंडल बहुत ही तेजोमय बनता है । उसके विचारों में पवित्रता , सात्विकता और सादगी का वास होता है । जिससे उसका जीवन पुष्प की भांति खिला रहता है । जबकि मांसाहारी व्यक्ति एक अजीब से तनाव और दुखद मानसिकता को झेलता रहता है । कारण साफ है कि शाकाहारी भोजन लेने वाले के भीतर सात्विकता अधिक होती है । जब कि मांसाहार करने वाले व्यक्ति के भीतर राजसिक और तामसिक वृत्तियां पैदा हो जाती हैं । जो उसे चैन से नहीं रहने देतीं ।इसीलिए कहा जाता है कि जैसा खाओगे अन्न वैसा होगा मन ।
शाकाहारी व्यक्ति योग के माध्यम से निरोग रह सकता है । जबकि मांसाहारी व्यक्ति योग की ओर आंखें उठाकर भी नहीं देख पाता अर्थात उसमें इतना साहस नहीं होता कि वह योग के माध्यम से अपने जीवन को निरोग कर ले । वह अपनी इंद्रियों का दास हो जाता है और उनके समक्ष जीवन की जंग हार जाता है ।
मनुष्य की स्वाभाविक प्रकृति मांसाहारी नहीं है। बल्कि मनुष्य की प्रवृत्ति शाकाहारी है , इसलिए भी कि ईश्वर ने उसके दांतो का निर्माण अथवा आमाशय का निर्माण मांसाहारी जीवधारियों की तरह नहीं किया है। जीवन में शाकाहारी मनुष्य ही सात्विक जीवन व्यतीत करने में सफल होते हैं । शाकाहारी व्यक्ति ही चिरायुष्या होते हैं।
शाकाहारी मनुष्य के चारों ओर का वातावरण प्रेम शांति और आनंद पूर्ण होता है और ऐसा ही वातावरण सुखी जीवन व्यतीत करने के लिए आवश्यक है।

समय की पहचान

मनुष्य को जीवन में समय थोड़ा मिला है। इस तथ्य की पहचान जिस मनुष्य को जितनी शीघ्र हो जाए उतना ही वह अपने समय का सदुपयोग करने में श्रेयस्कर मानेगा। कब बचपन बीत जाता है और कब जवानी समाप्त होकर बुढापा आ घेर लेता है ? – किसी मनुष्य को यह पता ही नहीं चलता। इस प्रकार यूं ही समय निकल गया । ईश्वर का भजन तो हो ही नहीं पाया । उसके लिए तो समय मिला ही नहीं , पहले सोचता रहा कि अभी यह काम कर लूं , उसके बाद वृद्धावस्था में भजन करेंगे ,लेकिन बहुत से लोग ऐसे होते हैं जिनको वृद्धावस्था नहीं आती और उनकी पहले ही मृत्यु हो जाती है । काल के गाल में समा जाते हैं । मनुष्य को चाहिए कि समय का सदुपयोग करे।
यह कभी नहीं सोचना चाहिए कि :–

सोचा जीवन बहुत घनेरा,
अभी भजन का काम न मेरा।
फिर अंत समय यूं ही आया रे सब बीत गया पल पल में —
तूने ओ३म नाम नहीं गाया रे कभी बैठ कहीं जंगल में।

पल पल में उम्र गुजर जाती है । इसके प्रत्येक पल का सदुपयोग करना चाहिए । वृद्धावस्था में जब हाथ पैर नहीं चलते तो ईश्वर भजन करने के लिए जिव्हा भी नहीं चलती और ईश्वर की भक्ति भी नहीं होती। अतः यौवन से थोड़ा-थोड़ा उसकी भक्ति में मन को लगाओ और जीवन को सार्थक बनाओ। धीरे-धीरे मन को प्रभु के चरणों में लगाने का अभ्यास बनेगा तो उससे संवाद स्थापित होने लगेगा। ध्यान रखो कि जब हम किसी व्यक्ति के पास नियमित रूप से बैठने लगते हैं तो एक दिन ऐसा आ ही जाता है जब उससे मित्रता हो जाती है और मित्रता में दोनों एक दूसरे के लिए ह्रदय तक सौंप देते हैं । यही परिस्थिति भक्त और भगवान की होती है । जब नियमित संवाद होने लगता है तो प्रभु की कृपा भी एक दिन प्राप्त हो ही जाती है। समय के मूल्य का ध्यान रखते हुए हम इस बात में शीघ्रता करें कि उस प्यारे प्रभु से यथाशीघ्र अपना संवाद करना स्थापित कर लें । जीवन की घड़ियां अनमोल हैं ।हाथ से निकलनी नहीं चाहिए । यदि जीवन में उस प्यारे प्रभु का सानिध्य प्राप्त कर लिया और उसकी कृपा के पात्र बन गए तो निश्चय ही यह कहा जा सकेगा कि हमारा यह जीवन सफल हो गया।

देवेंद्र सिंह आर्य
चेयरमैन : उगता भारत

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking güncel giriş
betnano güncel giriş
betnano güncel giriş
betnano giriş
meritking giriş
meybet
hititbet giriş
hititbet giriş
meritbet giriş
meritbet giriş
norabahis giriş
betpark giriş
betpark giriş
pokerklas
pokerklas
vdcasino
pokerklas
pokerklas
betnano giriş
betasus giriş
pokerklas
pokerklas giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
hititbet
hititbet
vdcasino giriş
pokerklas giriş
maritbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
maritbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betpas giriş
betpas giriş
favorisen giriş
favorisen giriş
norabahis giriş
norabahis
norabahis giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betpark
betpark
betpark giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino
vdcasino
meybet
meybet
harbiwin giriş
betnano giriş
norabahis
favorisen giriş
favorisen giriş
favorisen giriş
meybet
norabahis giriş
norabahis giriş
favorisen giriş
favorisen giriş
hazbet giriş
hazbet giriş
maritbet giriş
maritbet
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
hititbet
hititbet
vdcasino
vdcasino
hititbet giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
hititbet
hititbet giriş
hititbet giriş
vdcasino
vdcasino
betnano giriş
betoffice giriş
betoffice giriş
hititbet
hititbet
betpark giriş
betpark
betpark
norabahis giriş
norabahis giriş
betpark giriş
hititbet giriş
kavbet giriş
kavbet
norabahis giriş
norabahis giriş
betpark giriş
vdcasino
vdcasino
timebet giriş
meybet giriş
timebet giriş
meybet giriş
bettilt
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
bettilt
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
kavbet giriş
kavbet giriş
betpark giriş
bettilt