राजस्थान में भ्रष्टाचार उन्मूलन की दिशा में ठोस पहल

जो सरकार प्रदेश को संवेदनशील, पारदर्शी एवं जवाबदेह प्रशासन देने को संकल्पबद्घ हो, वह लोक कल्याण के कार्यों में अनियमितता एवं भ्रष्टाचार कहां बर्दाश्त कर पायेगी। यही कारण है कि राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री अशोक गहलोत ने भ्रष्ट आचरण के दोषी लोगों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई का पक्ष लेते हुए हमेशा कत्र्तव्यनिष्ठ एवं ईमानदार अधिकारियों, कर्मचारियों की पीठ थपथपाई है। राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़े कदम उठाने के लिये भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो को प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वतंत्राता देने के साथ ही राज्य सरकार ने हर संभव संसाधन भी उपलब्ध कराये हैं। यही कारण है कि ब्यूरो ने बड़े अधिकारियों से लेकर संगठित एवं संस्थागत भ्रष्टाचार के अनेक ऐसे मामलों में कार्रवाई की है जो राष्ट्रीय मीडिया में सुर्खी बने। पिछले साढ़े तीन वर्षों में ब्यूरो ने एक के बाद एक बड़ी कार्रवाई करते हुए भ्रष्ट आचरण के दोषी लोक सेवकों के विरुद्घ कड़े कदम उठाये।
वर्ष 2009 में कुल 335 मुकदमे दर्ज हुए थे जिसमें उत्तरोत्तर वृद्धि हुई है। वर्ष 2010 में कुल 407 अपराध पंजीबद्ध हुये। इसी प्रकार वर्ष 2011 में भी 516 मुकदमे दर्ज हुए जो पूरे भारत वर्ष में भ्रष्टाचार के विरुद्ध दर्ज प्रकरणों में सर्वाधिक हैं। इस वर्ष 2012 (अगस्त,2012 तक) में कुल 348 प्रकरण दर्ज किये गए। जिनमें 211 टेऊप, 114 पद का दुरूपयोग एवं 23 आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने के पंजीबद्ध किये गए हैं जो पिछले वर्षों की तुलना में इस अवधि सर्वाधिक है। बिना पूर्ण प्रशिक्षण के व्यक्तियों को व्यवसायिक पायलट लाईसेन्स दिलाने के संबंध में 20 प्रकरण दर्ज किए गये। ये प्रकरण चीफ फ्लाईंग इन्सट्रक्टर द्वारा प्रशिक्षिणार्थियों को बिना उड़ान की पूरी टेऊनिंग दिये रिकार्ड में फर्जी उड़ान दिखाकर उन्हें व्यवसायिक पायलेट का लाइसेंस दिलाने से संबंधित थे। राजस्थान एसीबी द्वारा ये प्रकरण दर्ज कर जांच करने के उपरान्त डीजीसीए में फर्जी लाईसेंस जारी करने से संबंधित अन्य प्रकरण भी उजागर हुए जिनमें दिल्ली पुलिस द्वारा कार्यवाही की गई। इन प्रकरणों के उपरान्त डीजीसीए ने इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु अपनी व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन किया है।
भारत सरकार द्वारा अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के छात्रा छात्राओं को मिलने वाली छात्रावृत्ति में अपात्रा व्यक्तियों एवं फर्जी संस्थानों द्वारा कूटरचित दस्तावेज तैयार कर दोहरा भुगतान कर करोड़ों रुपयों का घोटाला करने से संबंधित 84 अभियोग दर्ज कर ब्यूरो द्वारा कार्यवाही की जा रही है।
इसी प्रकार नर्सिंग कॉलेज संचालकों द्वारा मिलीभगत कर फर्जी दस्तावेज के आधार पर आरएनसी व आईएनसी की ओर से निरीक्षण दल के सदस्यों से मिलीभगत कर बिना सुविधा के फर्जी अनापत्ति प्रमाण पत्रा लेकर लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड करने की शिकायत पर ब्यूरो द्वारा 87 नर्सिंग कॉलेजों में आकस्मिक चैकिंग की गई जिनमें अनियमितताएं पाये जाने पर 22 मामलों में अपराध, 12 मामलों में प्राथमिक जांच पंजीबद्ध कर अनुसंधान किया जा रहा है।
राज्य में कार्यरत औद्योगिक प्रशिक्षण केन्द्रों में भारी अनियमितताओं के आरोपों पर 42 औद्योगिक प्रशिक्षण केन्द्रों पर आकस्मिक चैकिंग की कार्यवाही कर 32 अभियोग पंजीबद्ध किए गए हैं। राजस्थान सहकारी डेयरी फैडरेशन के अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा पशुआहार में मिलावट कर रॉ मेटेरियल का फर्जी बिल लेकर घटिया डेयरी उत्पाद में अनियमितता कर पशुओं के जीवन व उपभोक्ता कृषकों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर अवैध सम्पत्ति एकत्रित करने, रिश्वत लेने के वर्ष 2009 से अब तक 18 अभियोग दर्ज किए गए हैं। इनमें से अजमेर डेयरी के उप प्रबंधक (गुणवत्ता) के विरुद्घ की गई कार्यवाही में 5 करोड रुपये नकद, 11 किलो सोना जिनमें एकद्ब्रएक किलो की 8 ईटें विदेशी मार्का की बरामद की गई । यह बरामदगी भ्रष्टाचार से संबंधित एक मामले में पूरे भारत के किसी भी राज्य के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा की गई रिकवरी में सर्वाधिक है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने गत साढे तीन वर्षों में राजपत्रित अधिकारियों के विरुद्ध भी प्रभावी कार्रवाई की है। वर्ष 2009 में टेऊप के 44, पद के दुरुपयोग के 57 तथा आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने के 14 मामले दर्ज हुए। वर्ष 2010 में कुल 151 अभियोग पंजीबद्ध किये गये तो वर्ष 2011 में यह संख्या बढ़कर 226 हो गई है। इस वर्ष 31 अगस्त तक 104 मामले दर्ज हुए हैं।
वर्ष 2010 में 03 अभियोग आईएएस अधिकारियों एवं 01 अभियोग आईएफएस अधिकारियों के विरुद्ध पंजीबद्ध किये गए हैं, जबकि वर्ष 2011 में 01 अभियोग आईएएस अधिकारी के विरुद्ध पंजीबद्ध किया गया है। इसी तरह वर्ष 2012 में 03 अभियोग आईएएस अधिकारियों एवं 03 अभियोग आईपीएस अधिकारियों के विरुद्ध पंजीबद्ध किये गए हैं।
वर्ष 2009 में 15 अभियोग आरएएस अधिकारियों एवं 03 अभियोग आरपीएस अधिकारियों के विरुद्ध पंजीबद्ध किये गए हैं। वर्ष 2010 में 09 अभियोग आरएएस अधिकारियों एवं 01 अभियोग आरपीएस अधिकारियों के विरुद्ध पंजीबद्ध किये गए हैं। वर्ष 2011 में 18 अभियोग आरएएस अधिकारियों के विरुद्ध पंजीबद्ध किये गये हैं। वर्ष 2012 में 05 अभियोग आरएएस अधिकारियों एवं 01 अभियोग आरपीएस अधिकारियों के विरुद्ध किये गए हैं।
वर्ष 2009 से 31 अगस्त,2012 तक मुख्य अभियन्ताओं के विरुद्ध 17 एवं अधीक्षण अभियन्ताओं के विरुद्ध 11 अभियोग पंजीबद्ध किये गये ।
राज्य सरकार द्वारा वर्ष 2009 में ब्यूरो की 05 नई चौकियां की स्वीकृति दी गई। इसी प्रकार ब्यूरो के तकनीकी पदों में सुधार व वृद्धि की गई। मुख्यमंत्री द्वारा वर्ष 2012द्ब्र13 में राज्य में ब्यूरो की 08 नवीन अनुसंधान इकाइयां एवं 03 इन्टेलीजेन्स यूनिटों का नवसृजन के साथ नवीन पदों, संसाधनों एवं उपकरणों की स्वीकृति प्रदान की गई । ब्यूरो के न्यायालय में लम्बित अभियोगों को देखते हुए उच्च न्यायालय के परामर्श से राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के अन्तर्गत 03 सैशन न्यायालय सृजित किए तथा और न्यायालयों के सृजन की सिद्घान्त: स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है। राज्य सरकार द्वारा ब्यूरोकर्मियों को अपना कार्य निष्पादन बेहतर तरीके से करने के लिए प्रोत्साहन स्वरूप मूल वेतन का 25 प्रतिशत अतिरिक्त दिये जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है। इसी तरह राज्य विधानसभा द्वारा आय के वैध स्रोतों से अधिक सम्पत्ति अर्जित करने वाले लोक सेवकों के विरुद्ध प्रभावी एवं त्वरित कार्यवाही करने हेतु राजस्थान विशेष न्यायालय बिल 2012 पारित कर राष्ट्रपति को अनुमोदन हेतु भिजवाया है। इस कानून के लागू होने के उपरान्त आय से अधिक सम्पत्ति के अपराधों की अन्वीक्षा हेतु विशेष न्यायालय सृजित किए जाएंगे। इस कानून में अन्वेषण के दौरान अपराधी की सम्पत्ति जब्त करने तथा मुकदमों का समयबद्घ निस्तारण करने का प्रावधान रखा गया है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के कार्य में पारदर्शिता, त्वरित एवं निष्पक्ष कार्यवाही से भ्रष्टाचार उन्मूलन की दिशा में जनता में विश्वास बढ़ा है। ब्यूरो के संसाधनों में वृद्धि एवं आधुनिकीकरण से भी जनता में जागृति आने पर भ्रष्टकर्मियों के विरुद्ध ज्यादा से ज्यादा कार्यवाही संभव हो सकी है। वर्ष 2009 में 228, वर्ष 2010 में 225, वर्ष 2011 में 258 एवं वर्ष 2012 (31 अगस्त, 2012) में 211 टेऊप के प्रकरण पंजीबद्ध कर कार्यवाही की गई जो ब्यूरो के प्रति जनता में बढ़ते विश्वास का प्रतीक है।

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