जवानों जवानी को यूं ही ना गंवाना

IMG-20200302-WA0039

प्रस्तुति : ज्ञान प्रकाश वैदिक[ब्रह्मचर्य का व्रत धारण करने से मनुष्य ऐश्वर्यशाली बनता है। आज नौजवान ब्रह्मचर्य के व्रत को भूलकर भोगवाद की ओर भाग रहे हैं। ब्रह्मचर्य के अभाव में मनुष्य शारीरिक, मानसिक और आत्मिक उन्नति से वंचित हो रहा है। आर्यसमाज के सुप्रसिद्ध विद्वान् स्व० पं० बुद्धदेव विद्यालंकार जी (स्वामी समर्पणानन्द जी) का यह लेख ‘आर्य गजट’ हिन्दी (मासिक) के मार्च १९७४ के अंक में प्रकाशित हुआ था। ब्रह्मचर्य की शक्ति को जानने के लिए नौजवानों यह लेख अवश्य पढ़ना चाहिए। -डॉ विवेक आर्य, प्रियांशु सेठ]

मूर्ख और बुद्धिमान में बड़ा अन्तर होता है। मूर्ख अच्छी बात को भी बुरा बना लेता है और बुद्धिमान बुरी चीज को भी अच्छी बना लेता है। काजल का अगर सही प्रयोग किया जाये तो आंखों में डाला हुआ सुन्दरता को चार चांद लगा देता है मगर गलत ढंग से प्रयोग किया हुआ वही काजल इधर-उधर लग जाये तो अच्छी सूरत को भी भद्दा बना देता है। एक बुद्धिमान पुरुष ने आग पर चढ़ी हुई देगची को देखा, उसने अनुभव किया कि वो पानी जो पहले चुपचाप था भाप बनकर कितना जबरदस्त बन गया है जिसने ढक्कन को धकेल कर फेंक दिया है, बुद्धिमान ने इस शक्ति को संभाला और इंजिन तैयार कर लिया- मूर्ख ने पानी और आग को इक्ट्ठा किया और हुक्का बनाकर गुड़गुड़ करता रहा और अपना समय और स्वास्थ्य खराब करता रहा, मनुष्य पर भी एक समय आता है जब उसके सामने अपनी शक्ति सम्भालने का अवसर आता है, जवानी मस्तानी बनकर आता है। जब वह चलता है तो कन्धे मारकर चलता है। पूछो तो कहेगा देखते नहीं जवानी आ रही है। स्टीम पैदा हो रही है। समझदार ने इसे संभाला और लाखों लोगों को पीछे लगा लिया लेकिन मूर्ख यह कहता रहा।
इस दिल के टुकड़े हजार हुए,
कोई यहां गिरा कोई वहां गिरा।अपनी जवानी का नाश कर लेता है, नौजवानों में ही संभलने का समय होता है लेकिन आज का नौजवान कौन-सी ऐसी खराबी है जिसको निमन्त्रण नहीं देता, मैंने एक जानकार नौजवान को जिसको शराब की लत लग गई थी कहा कि क्यों अपना नाश कर रहे हो, कहने लगा पण्डित जी, आपने कभी पी ही नहीं- शेख क्या जाने मय का मजा, पूछो कम्बख्त ने कभी पी है। पी लेते तो ऐसा न कहते। मैंने कहा पीने से क्या होता है, कहने लगा सब गम गलत हो जाते हैं। मैंने कहा और होश? तो कहने लगा कि होश रहता ही नहीं। मैंने कहा कि इससे बढ़कर और क्या बेवकूफी होगी कि मनुष्य पैसे खर्च कर अपने होश खो दे, अरे मजा तो तब है कि होश कायम हों और फिर नशा चढ़ा रहे।
नाम खुमारी नानका चढ़ी रहे दिन रात।
(लेकिन उस नानक के पुजारी आज सबसे अधिक शराब पीते हैं।)अभिमन्यु की लाश पड़ी है, सब रोते हैं। सुभद्रा का बुरा हाल है, कृष्ण आते हैं। कहते हैं कि सुभद्रा क्या कर रही हो, सुभद्रा रो पड़ती है। कहती है कि भाई तुम मुझे यह कह रहे हो कि क्या कर रही हो? मेरा जवान बेटा छिन गया है। मैं अधीर न होऊं तो क्या करूँ? कृष्ण कहते हैं कि सुभद्रा तू याद कर, तू क्षत्रिय की पुत्री है, क्षत्रिय की बहिन है, क्षत्रिय की पत्नी है और उस क्षत्रिय वीर की माता है। जो धर्म पर वीर गति को प्राप्त हुआ है क्षत्रिय का सबसे बड़ा कर्तव्य धर्म और न्याय की रक्षा के लिए मर मिटना है। तेरा पुत्र तो अमर हो गया है और तू रो रही है। सुभद्रा को होश आ जाता है। उसका चेहरा दमक उठता है। यह है वो खुमारी। पुत्र सामने मरा पड़ा है और होश कायम रखे जाते हैं। यह हालत तब आती है जब मनुष्य नाम की खुमारी में रंग जाये। ब्रह्मचारी बने। ब्रह्मचारी का मतलब है जो ब्रह्म में निवास करे, अपने सत को, वीर्य को संभाल कर रखे यह वीर्य असली रसायन है इससे बढ़कर और कोई रसायन नहीं, आज तो लोग असली रसायन को खोकर फिर इंजेक्शन लगवाने लगते हैं। मूर्खता और किसको कहोगे। आज सुन्दरता के लिए सुरखी और लिपस्टिक लगाये जाते हैं, होठों और गालों पर सुरखी और लाली लगायी जाती है। इस रहस्य को भुला दिया है कि असली खूबसूरती और लाली होठों और गालों पर कैसे आती है। आओ आपको इसका रहस्य भी बतला दें। होंठ बहुत कोमल हिस्सा होता है। वहां खून की लाली उभरती है। शरीर में खून हो और उसका दौरा ठीक हो तो होठों पर लाली खुद-ब-खुद आ जाती है। शरीर में खून हो इस तरफ ध्यान नहीं दिया जाता। नकली रंग लगाकर बाह्यप्रदर्शन किया जाता है। अच्छा भला आदमी हो, कुछ देर पानी में रहे तो खून का दौरा रुक कर होंठ नीले पड़ जाते हैं। ये खून के करिश्मे हैं, अरे अपने सत को, वीर्य को कायम रख कर तो देखो कितना आनन्द आता है? गंवाने में तो क्षणिक मजा और फिर पछतावा लगा रहता है लेकिन इसे कायम रख कर देखो कितना आनन्द आयेगा।आप कहेंगे पण्डित जी क्यों तरसा रहे हो। इसे कायम रखने के लिए कोई रास्ता तो बताओ। रास्ता सुन लो आपको ब्रह्मचारी बनना होगा और हमेशा प्रभु की याद रखनी होगी, कहा जाता है कि प्रभुभजन और प्रभु भक्ति तो बुढ़ापे की चीज है। याद रखना अगर आपने अभी से आदत न बनाई तो बुढ़ापे में कुछ न होगा।
सावन का महीना है। आमों का टोकरा सामने पड़ा है। मनुष्य आम चूस कर गुठलियों को एक थाली में सजा-सजा कर रख रहा है। मैंने पूछा ये क्यों सजाई जा रही है? कहने लगे यह भगवान की भेंट होगी। अरे मीठा रस तो शैतान के लिए और गुठलियां भगवान के लिए। जब शरीर काम का न रहेगा खाक भगवान की याद करोगे। जवानी बेकार खो दी तो बुढ़ापे में भगवान हाथ न आएगा। एक यह भी सवाल किया जाता है कि प्रभुभजन क्या करें दिल तो लगता नहीं, लगेगा पहले भूख पैदा करो। भोजन और भजन का एक ही कानून है। भोजन तभी अच्छा लगता है जब भूख हो, भूख में सूखे टुकड़े भी मजा देते हैं। परमात्मा के भजन के लिए भी भूख की जरूरत है। गीता ने चार प्रकार के भक्त कहे हैं।पहला भक्त वह होता है जो दु:खी हो। आप कहेंगे क्या हम दु:खी हो जायें? हां! आप कहोगे अच्छे उपदेश देने बैठे। माता-पिता जीवित हैं, घर में सबकुछ है, किसी चीज की कमी नहीं, खाने को खूब मिलता है। दु:खी क्यों हों? इस पर भी दु:खी हो जाओ। अपने लिए नहीं, दूसरों के दु:ख को अपना दु:ख समझ लो। अगर तुम्हारे पास कोई भूखा आये तो पहिले उसे खिलाओ। कोई दु:खी है तो उसका दु:ख दूर करो। परोपकार करो। सब कुछ रखते हुए सेवा का व्रत धारण करो। सबसे बड़ी ईश्वर भक्ति यही है। किसी के काम आकर तो देखो कितना आनन्द आता है। दुनियां में जितने दुःख और झगड़े हैं उनके तीन कारण हैं, इनमें से एक तुम ले लो। आज शिक्षा के रहस्य को लोगों ने भुला दिया है, हमारे ऋषियों ने इसे खूब समझा था। वो विद्यार्थियों को दुनिया के इन तीन प्रकारों के दु:खों को दूर करने के लिए तैयार करते थे। हमारी वैदिक शिक्षा सच्चे देश, सच्चे क्षत्रिय और सच्चे ब्राह्मण पैदा करने के लिए होती थी, जो तीन प्रकार के दु:ख दूर करने के लिए तैयार किये जाते थे।पहला दु:ख अभाव से पैदा होता है। देश का काम है कि वह वस्तुओं का निर्माण करे और सब लोगों को दे लेकिन आज का देश तो ब्लैक मार्कीटियों का हो रहा है। वो अपना स्टाक भर लेता है, वस्तुएं गायब हो जाती हैं, न मिलें तो सब दु:खी। अगर देश अपने धर्म पर कायम है तो ब्लैक मार्कीट और अभाव न आयेगा। बांट ठीक हो तो दु:ख न होगा।
दूसरा दुःख का कारण अन्याय है। कुछ गुण्डे उठते हैं और दूसरों की वस्तु छीन कर घर में डाल लेते हैं। क्षत्रिय का काम है ऐसे लोगों से समाज को बचाये। कोई चोर न हो, कोई डाकू न हो। कोई किसी पर अन्याय न करे, सब सुखी हो जायें। इस काम के लिए क्षत्रिय तैयार किये जाते थे जो न्याय को कायम रखने के लिए व्रत लेते थे और अन्याय को मिटाने के लिए जान पर भी खेल जाते थे।
तीसरा दु:ख अविद्या की वजह से होता है। अविद्या और अज्ञान को दूर करने का काम ब्राह्मण करता था। सारा संसार सुखी था। ये तीन प्रकार के दुनिया के दु:खों को दूर करने के लिए ही शिक्षा दी जाती थी और यही प्रभुभक्ति है। जो प्रभु को याद रखता है और सेवा और परोपकार की जिन्दगी व्यतीत करता है, वही प्रभु-भक्त है।ऐसा ब्रह्मचारी ब्रह्म में विचरता है और मृत्युन्जय हो जाता है। नौजवानों दुनिया पर और अपने आप पर विजय पानी है तो ब्रह्मचर्य-व्रत को धारण करो। प्रभु-भजन और सेवा का व्रत लो, संसार तुम्हें सर पर उठाएगा।[स्त्रोत- शांतिधर्मी मासिक पत्रिका का अप्रैल २०२० का अंक]

Comment:

kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
madridbet giriş
madridbet giriş
betpipo giriş
betpipo giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
madridbet giriş
madridbet giriş
artemisbet giriş
artemisbet giriş
betpas giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
artemisbet giriş
betvole giriş
betvole giriş
pusulabet giriş
pusulabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
betnano giriş
superbet giriş
vaycasino giriş
betparibu giriş
betparibu giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
parmabet giriş
parmabet giriş
betpark giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
winxbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
meritbet giriş
meritbet giriş
winxbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
timebet giriş
romabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
madridbet giriş
madridbet giriş
hititbet giriş
romabet giriş
timebet giriş
betnano giriş
milanobet giriş
hititbet giriş
artemisbet giriş
setrabet giriş
artemisbet giriş
betnano giriş
rinabet
betorder giriş
vaycasino giriş
betorder giriş
rinabet
betnano giriş
betvole giriş
betvole giriş
setrabet giriş