कोरोना इस समय एक विश्वव्यापी महामारी के रूप में अपनी पहचान बना चुका है । इसके उपरांत भी भारत अपनी आत्मा को पहचान कर अर्थात यज्ञ योग के साथ स्वयं को जोड़कर बहुत मजबूती के साथ इसका सामना कर रहा है । भारत के लोग स्वाभाविक रूप से सफाई पसंद हैं और मांसाहार से बचकर रहने में ही जीवन का कल्याण समझते हैं । ऋषियों का वरदान कहिए या भारतीय संस्कृति के मूल्यों का प्रताप कि भारत के लोगों के संस्कार आज की भौतिकवादी चकाचौंध में भी बहुत बड़ी मात्रा में बने हुए हैं । यही कारण है कि हमारे देश के लोगों की रोग निरोधक क्षमता यूरोप के लोगों की अपेक्षा कहीं अधिक मजबूत है । हम सुबह उठकर पानी पीते हैं , कुल्ला करते हैं , नीम के दांतुन करते हैं , खुले में स्नान करते हैं , प्रभु का भजन करते हैं यज्ञ करते हैं, योग करते हैं , खेतों में मेहनत करते हैं , दूध ,छाछ, मक्खन का प्रयोग करते हैं । हमारी इन सब बातों पर जो पश्चिम कभी हम पर हंसा करता था ,आज वही हमें आश्चर्य की दृष्टि से देख रहा है कि भारत अपनी इन सामान्य आदतों से कैसे एक महामारी से बचने में सफल हो रहा है ?

यही कारण रहा है कि देश के करोड़ों लोगों ने स्वामी रामदेव जी के परिश्रम और पुरुषार्थ के चलते यज्ञ योग से अपने आपको जोड़कर अपनी रोग निरोधक क्षमता को मजबूत किया है। इसके अतिरिक्त कुछ अन्य सामाजिक संगठन जिनमें गायत्री परिवार या हमारे पौराणिक मंदिरों के आचार्य लोग भी अपनी सकारात्मक भूमिका निभा रहे हैं । ये सभी इस समय लोगों को यज्ञ – योग के बारे में बताते समझाते देखे जा रहे हैं । जिससे लोगों की आध्यात्मिक चेतना ‘ एक देव , एक देश ‘ – ‘एक भूषा एक भेष’ – के साथ जुड़ती दिखाई दे रही है ।

‘संगच्छ ध्वम सं वद ध्वम सं वो मनांसि जानताम ‘- का नारा एक संकल्प के रूप में परिवर्तित होता जा रहा है। हमारी चाल , हमारी वाणी , हमारे मन , इस समय एक हो गए हैं और सबने एक ही संकल्प ले लिया है कि कोरोना को हराना है । प्रधानमंत्री के आवाहन पर पहले ताली और थाली बजाकर और फिर दीप जलाकर हमने अपनी सामूहिक चेतना को उजागर किया है और संसार को यह आभास कराया है कि हम सब एक राष्ट्र हैं । हम अपने नेता के बोल पर एक दिशा में एक चाल के साथ आगे बढ़ना जानते हैं । सारा विश्व इस समय भारत की इस अंतश्चेतना की इस प्रकार होती हुई प्रस्तुति को देखकर आश्चर्य में है। सचमुच किसी भी जंग को जीतने के लिए ऐसे ही राष्ट्रीय संकल्प की आवश्यकता होती है और जैसा देश को इस समय प्रधानमंत्री मिला है ऐसे ही प्रधानमंत्री की भी आवश्यकता होती है। देश की जनता भी इस समय प्रशंसनीय भूमिका में है और देश का नेतृत्व भी प्रशंसनीय भूमिका में है । जो इस बात का पक्का और सच्चा सबूत है कि – हम होंगे कामयाब एक दिन – – – ।

यद्यपि इस सबके बीच में जमात की उल्टी सीधी बातें भी देखने को मिल रही हैं परंतु देश ने जमात को नकार दिया है । यह और भी शुभ संकेत है कि बड़ी संख्या में मुस्लिमों ने भी जमात की बातों पर ध्यान नहीं दिया है । हमारे कोरोना योद्धा या कोरोना वारियर्स की भूमिका में आए डॉक्टर्स ,नर्स , सुरक्षा बल के सभी अधिकारी , कर्मचारी और अन्य सामाजिक संगठनों के ऐसे लोग जो मैदान में उतरकर लोगों की सेवा कर रहे हैं की भूमिका भी राष्ट्र के लिए वंदनीय है। इसके अतिरिक्त वह सभी लोग जो इस समय गरीबों को भोजन बांट रहे हैं या बड़े बड़े दान देकर राष्ट्रीय यज्ञ में अपनी ओर से आहुति डाल रहे हैं भी प्रशंसा के योग्य हैं। कुल मिलाकर हमने एक ऐसा परिवेश सृजित किया है जिसमें असीम सकारात्मक ऊर्जा प्रवाहित हो रही है और सारे राष्ट्र को इस समय यह भरोसा है कि हम कोरोना को मार कर ही दम लेंगे।

मैं समझता हूं कि जो भी व्यक्ति अपने स्तर पर अपने घर में बैठा रहकर सही दिशा में सही चिंतन करते हुए राष्ट्र के नेतृत्व के साथ , अपने सुरक्षा बलों के साथ , अपने डॉक्टर और नर्सों के साथ या सुरक्षा इंतजामों में लगे लोगों के साथ अपनी सोच को सही बनाकर चल रहा है, वह भी इस यज्ञ में अपनी मौन आहुति डाल रहा है ।

कोई भी अपने आप को इस महान यज्ञ में छोटा ना समझे और ना यह समझे कि वह इस यज्ञ में कोई भी सहयोग नहीं कर पा रहा है। हर व्यक्ति का सबसे बड़ा सहयोग तो यह है कि वह स्वयं ‘लक्ष्मण रेखा’ का उल्लंघन नहीं कर रहा है और सरकार व प्रशासन के निर्देशों का पालन करते हुए अपने घर में बैठा हुआ है। इसके बाद यदि वह घर में बैठे रहकर भी यज्ञ योग से जुड़ा हुआ है और यज्ञ आदि करके पर्यावरण को शुद्ध करने का प्रयास कर रहा है तो वह घर में बैठा रहकर भी राष्ट्र की अप्रतिम सेवा कर रहा है । इस समय अधिकारों के लिए नहीं , कर्तव्य के लिए हमारी अपनी सोच विकसित होनी चाहिए । देश की सरकार से मांगने की बजाय कुछ देने का संकल्प लेना चाहिए और यदि कुछ भी नहीं दे सकते हैं तो इतना ही दें कि हम सरकार से कुछ भी नहीं लेंगे।

हमारे देश का यह इतिहास रहा है कि जब जब भी राष्ट्र के लिए बलिदानों की आवश्यकता पड़ी है तो लोगों ने बिना वेतन लिए और बिना गर्दन का मोल लिए अपने बलिदान दिये हैं । आज राष्ट्रीय संकट का समय है । इस समय हम अपना व्यवसाय छोड़कर घरों में बैठे हैं , अपनी दुकानदारी, अपना काम धंधा सब छोड़कर घरों में बैठे हैं । हो सकता है हमें कई बार यह पीड़ा होती हो कि हमारा आर्थिक नुकसान हो रहा है और सरकार या प्रशासन हमें काम धंधा आरम्भ करने की अनुमति नहीं दे रहा है , यदि ऐसा भाव कहीं हमारे भीतर आता है तो उसे पीछे धकेलने का प्रयास करें और सोचें कि हमें इस समय देश के लिए कुछ करना है ? और कुछ भी नहीं कर सकते हैं तो इतना ही करना है कि जैसे शासन-प्रशासन हम से अपेक्षा करता है हम वैसे ही अपने घरों में बैठ जाएं । परिस्थितियां सामान्य होंगी और उसके पश्चात फिर वही चहल-पहल हमारे चारों ओर लौटेगी जो अब से 20 दिन पहले थी । थोड़ा सा धैर्य रखते हुए हम अनुकूल परिस्थितियों की प्रतीक्षा करें , सब कुछ सामान्य हो जाएगा और हम सब से पहले जैसा सुख में जीवन व्यतीत कर सकेंगे।

इस समय एक ही संकल्प हो -कोरोना से जीतेगा भारत , एक ही विकल्प हो – ,कोरोना से जीतेगा भारत , एक ही नारा हो – कोरोना से जीतेगा भारत , एक ही लक्ष्य हो – कोरोना से जीतेगा भारत , एक ही सामूहिक इच्छा हो – कोराना से जीतेगा भारत , एक ही संकल्प हो – कोरोना से जीतेगा भारत।

डॉ राकेश कुमार आर्य

संपादक : उगता भारत

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