Categories
मुद्दा

मोदी शासक ही नही अभिभावक भी हैं, दिये जलाने के संकल्प का अर्थ समझिये

ललित गर्ग

यदि आप केवल नौ मिनट के लिए सारी इंद्रियों को विश्राम देकर बिलकुल स्थिर और एकाग्र होकर अपने भीतर झाँकना शुरू कर दें और एक दीया जलाएं तो आपको कोई ऐसी झलक मिल जाएगी कि आप रोमांचित हो जाएँगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना महामारी के संकट को परास्त करने के लिये हर व्यक्ति को एक-एक दीया जलाने का आव्हान किया है, निश्चित ही इससे प्रकाश की महाशक्ति प्रकट होगी, इससे दो सौ साठ करोड़ मुट्ठियां तन जायेंगी और इस महामारी को मात देने की लड़ाई को बल मिलेगा। भारत के लोगों को अपनी एकजुटता दिखाने के लिए यह एक सार्थक पहल है जब वे घर की सभी लाइटें बंद करके, घर के दरवाजे पर या बालकनी में खड़े होकर 9 मिनट के लिए मोमबत्ती, दीया, टॉर्च या मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाएंगे।
नरेन्द्र मोदी एक सफल शासक से अधिक एक अभिभावक हैं, जिन्होंने अपने देश की जनता में फैले कोरोना रूपी अंधकार को मात देने के लिये प्रकाश को माध्यम बनाया है, क्योंकि प्रकाश हमारी सद् प्रवृत्तियों का, सद्ज्ञान का, संवेदना एवं करुणा का, संयम एवं अनुशासन का, प्रेम एवं भाईचारे का, त्याग एवं सहिष्णुता का, सुख और शांति का, ऋद्धि और समृद्धि का, शुभ और लाभ का, श्री और सिद्धि का अर्थात् दैवीय गुणों का प्रतीक है। यही प्रकाश मनुष्य की अंतर्चेतना से जब जागृत होता है, तभी इस धरती पर कोरोना के महासंकट के खिलाफ एक महाशक्ति का प्रस्तुतिकरण होता है। यूरोप और अमेरिका की तुलना में भारत में स्थिति अपेक्षाकृत नियंत्रित है, तो इसलिये कि यहां प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व ने जनता कर्फ्यू और लॉकडाउन जैसे जरूरी कदम उठाये और सामाजिक स्तर पर लोगों से दूरी बरतने के लिये प्रेरित किया। अब उनका दीये जलाने का आह्वान भी दूरगामी एवं मनोवैज्ञानिक सोच का एक प्रभावी एवं अनूठा उपक्रम है। निश्चित ही यह रोशनी कोरोना महासंकट के समय एकजुट होकर संकट से लड़ने और उस पर विजय पाने का प्रतीक होगी। हालांकि कुछ धर्म-विशेष एवं नासमझ लोगों की नादानी एवं नासमझी की वजह से संक्रमितों की संख्या में तेजी देखने को मिल रही है। लेकिन डॉक्टरों, पुलिसकर्मियों, मीडिया एवं सफाईकर्मियों की जागरूकता एवं अपनी जान की परवाह न करते हुए देश के लोगों को इस महामारी से बचाने की जंग से हम दूसरे यूरोपीय देशों से बेहतर हैं। इसके बावजूद इस महामारी से लड़ने के लिये सजगता, संयम एवं समझ जरूरी है, इस लड़ाई के सेनानियों के प्रति कृतज्ञता और एकजुटता दिखाने की आवश्यकता भी है। हम ही नहीं दुनिया के अन्य देश भी ऐसी एकजुटता दिखाने के लिये अपने स्तर पर अपनी तरह के प्रयोग कर रहे हैं, इटली के लोगों ने भी राष्ट्रगान एवं लाइटिंग मॉब के सहारे कोरोना से लड़ाई में अपनी एकजुटता प्रदर्शित की थी। क्योंकि यह एकजुटता ही कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई में हमारी विजय का कारगर प्रयोग है।
यह बात सच है कि समूची मानवता इस समय कोरोना के अंधेरों से घिरी है। मनुष्य का रूझान हमेशा प्रकाश की ओर रहा है। कोरोना जैसे अंधेरों को उसने कभी न चाहा न कभी माँगा। ‘तमसो मा ज्योतिगर्मय’ सम्पूर्ण मानवता की अंतर भावना अथवा प्रार्थना का यह स्वर भी इसका पुष्ट प्रमाण है। अंधकार से प्रकाश की ओर ले चल इस प्रशस्त कामना की पूर्णता हेतु मोदी ने दीये जलाने की प्रेरणा देते हुए जरूर सोचा होगा कि वह कौन-सा दीप है जो इस महासंकट से मुक्ति दिलाने एवं मंजिल तक जाने वाले पथ को आलोकित कर सकता है। अंधकार से घिरा हुआ आदमी दिशाहीन होकर चाहे जितनी गति करे, सार्थक नहीं हुआ करती। आचरण से पहले ज्ञान को, चारित्र पालन से पूर्व सम्यक्त्व को आवश्यक माना है। ज्ञान जीवन में प्रकाश करने वाला होता है। शास्त्र में भी कहा गया- ‘नाणं पयासयरं’ अर्थात् ज्ञान प्रकाशकर है। निश्चित ही दीये जलाने एवं प्रकाश करने का प्रेरक उपक्रम हमारे जीवन में कोरोना से मुक्ति का माध्यम बनेगा। क्योंकि दीया दुर्बलताओं को मिटाकर नई जीवनशैली की शुरुआत का संकल्प है।
अंधेरा एवं निराशा घनी है और इसके बीच रोशनी एवं आत्मविश्वास ही हमारा संबल है। रोशनी यानी दीया। दीया प्रकाश का प्रतीक है और तमस को दूर करता है। यही दीया हमारे जीवन में रोशनी के अलावा हमारे लिये जीवन की सीख भी है, जीवन बचाव का साधन भी है, संयम की प्रेरणा एवं महासंकट से मुक्ति का पथ भी है। दीया भले मिट्टी का हो मगर वह हमारे जीने का आदर्श है, हमारे जीवन की दिशा है, संस्कारों की सीख है, संकल्प एवं संयम की प्रेरणा है और लक्ष्य तक पहुँचने का माध्यम है। दीये जलाने के इस उपक्रम की सार्थकता तभी है जब भीतर का अंधकार दूर हो, नासमझी एवं आग्रहमुक्त हो। कोरोना रूपी अंधकार जीवन की समस्या है और प्रकाश उसका समाधान। जीवन जीने के लिए सहज प्रकाश चाहिए। प्रारंभ से ही मनुष्य की खोज प्रकाश को पाने की रही।
कोरोना के कहर से मानवता चीत्कार उठी है। इस तरह के अंधकार में भटके मानव का क्रंदन सुनकर तो करुणा की देवी का हृदय भी पिघल जाता है। ऐसे समय में मनुष्य को सन्मार्ग दिखा सके, ऐसा प्रकाश स्तंभ चाहिए। इन स्थितियों में हर मानव का यही स्वर होता है कि- प्रभो, हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो। कोरोनारूपी संकट से संकटमुक्त जीवन की ओर ले चलो। मृत्यु से अमरता की ओर ले चलो—। इस प्रकार हमें प्रकाश के प्रति, सदाचार के प्रति, अमरत्व के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त करते हुए कोरोनामुक्त जीवन जीने का संकल्प करना है। प्रत्येक व्यक्ति के अंदर एक अखंड ज्योति जल रही है। उसकी लौ कभी-कभार मद्धिम जरूर हो जाती है, लेकिन बुझती नहीं है। उसका प्रकाश शाश्वत प्रकाश है। वह स्वयं में बहुत अधिक देदीप्यमान एवं प्रभामय है। हर इंसान को एक दीया जलाते हुए अपनी भीतर की सात्विक प्रवृत्तियों, सद्-इच्छाओं को प्रकट करना है। इसी संदर्भ में महात्मा कबीरदासजी ने कहा था- ‘बाहर से तो कुछ न दीसे, भीतर जल रही जोत’। भीतर की इसी जोत से कोरोना को हराना है।
नरेन्द्र मोदी का दीप जलाने का अभियान पुरुषार्थ का अवसर है। यह आत्म साक्षात्कार का भी प्रसंग है। यह अपने भीतर की सुषुप्त चेतना को जगाने का अनुपम माध्यम है। यह हमारे आभामंडल की विशुद्धि, पर्यावरण की स्वच्छता एवं कोरोना मुक्ति के प्रति जागरूकता का संदेश देने का आह्वान है। हमारे भीतर कोरोना का तमस छाया हुआ है। वह संयम एवं सद्-संकल्प के प्रकाश से ही मिट सकता है। ज्ञान दुनिया का सबसे बड़ा प्रकाश दीप है। जब प्रेरणा का दीप जलता है तब भीतर और बाहर दोनों आलोकित हो जाते हैं। कोरोनारूपी अंधकार का साम्राज्य स्वतः समाप्त हो जाता है। ज्ञान के प्रकाश की आवश्यकता केवल भीतर के अंधकार मोह-मूचर्छा को मिटाने के लिए ही नहीं, अपितु कोरोना की आपातस्थिति के परिणामस्वरूप खड़ी हुई बाहरी समस्याओं को सुलझाने के लिए भी जरूरी है। यदि आप केवल नौ मिनट के लिए सारी इंद्रियों को विश्राम देकर बिलकुल स्थिर और एकाग्र होकर अपने भीतर झाँकना शुरू कर दें और एक दीया जलाएं तो आपको कोई ऐसी झलक मिल जाएगी कि आप रोमांचित हो जाएँगे। आपको एक दिव्य प्रकाश मिलेगा। क्योंकि दीया कहीं भी जले उजाला देता है। दीए का संदेश है- हम जीवन से कभी पलायन न करें, जीवन को परिवर्तन दें, क्योंकि पलायन में मनुष्य के दामन पर बुजदिली का धब्बा लगता है, जबकि परिवर्तन में कोरोना मुक्ति की संभावनाएँ जीवन की सार्थक दिशाएँ खोज लेती हैं। असल में दीया उन लोगों के लिए भी चुनौती है जो अकर्मण्य, आलसी, निठल्ले, दिशाहीन और चरित्रहीन बनकर कोरोना को एक महामारी की बजाय षड्यंत्र के रूप में देखते हैं।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betpark
betpark giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
savoycasino giriş
savoycasino giriş
savoycasino giriş
savoycasino giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
holiganbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
Grandpashabet giriş
safirbet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
artemisbet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
grandpashabet
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betyap giriş
betyap giriş
betyap giriş
betyap giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
dedebet giriş
dedebet giriş
norabahis giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
betkanyon giriş
betkanyon giriş
dedebet giriş
dedebet giriş
holiganbet güncel giriş