नवजात शिशु की जीभ पर ओम क्यों लिखते हैं ?

भारत के धर्म की यह अनूठी विशेषता रही है – मोक्ष प्राप्त करना। मोक्ष प्राप्ति की साधना जीवन को उन्नति और सदगति की ओर ढालने की साधना है। जो व्यक्ति इस साधना में लग जाता है वह संसार में रहकर कोई भी ऐसा उत्पात या अन्यायपूर्ण कृत्य नहीं करता जिससे दूसरों के जीवन का हनन होता हो, या किसी के अधिकारों पर प्रभाव पड़ता हो। जब हर व्यक्ति की यह भावना हो जाती है कि हमारे किसी भी कार्य से किसी अन्य व्यक्ति या प्राणी का अहित न हो, या उसके अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े तो उस समय समझना चाहिए कि ऐसा समाज या ऐसा राष्ट्र रोग पीडि़त विश्व के संताप हरने के लिए सक्रिय और सचेत हो उठा है। इसके विपरीत जब लोगों में अपने अपने अधिकारों की आपाधापी मचती है, और दूसरे के अधिकारों का हनन और क्षरण करने की प्रवृत्ति बलवती होती है तब ऐसे समाज या राष्ट्र में हर व्यक्ति एक दूसरे के रोग-शोक और संताप में अपनी-अपनी ओर से विशेष आहुति लगाता है। ऐसी प्रवृत्ति से संसार दुखों का घर बन जाता है। जिसमें सज्जन व्यक्ति भी रहकर कष्ट का अनुभव करते हैं। हर व्यक्ति इस दुखों के सागर संसार में रहकर कष्ट का अनुभव न करे और उसे अपने जीवन को जीने का और अपनी बहुमुखी उन्नति करने का हरसंभव अवसर उपलब्ध हो इसके लिए ही हमारे ऋषि पूर्वजों ने मोक्ष की पगडंडी की परिकल्पना की। जिसके लिए उन्होंने अष्टांग योग का रास्ता भी बताया। कह दिया कि इस रास्ते पर चलते चलो, मंजिल भी मिल जाएगी और सफर भी आसान होता चला जाएगा, इतना ही नही तुम्हारे साथ चलने वाले तुम्हारे सभी साथी भी आनंद का अनुभव करेंगे।

हमारे यहां बच्चे के जन्म के समय सर्वप्रथम बच्चे के शरीर की जरायु को साफ करने के पश्चात सोने या चांदी की कोमल शलाका का अग्र भाग शहद में भिगोकर बच्चे की जीभ पर ‘ओ३म्’ लिखा जाता है। उसके पश्चात उसके दाहिने कान में एक वाक्य ‘त्वं वेदो असीति’ अर्थात ‘तू वेद है’ बोला जाता था। आपको पुन: उस ज्ञान को स्मरण करना है, अपना जीवन वेदाज्ञा के अनुरूप ढालना है, उसी के अनुसार चलाना है, अपने आपको वेद की आज्ञा के अनुरूप ईश्वर भक्त और राष्ट्रभक्त बनाना है, तभी तेरा यह जीवन सफल होगा। तुझे विद्वानों की पंक्ति में प्रथम स्थान प्राप्त करना है।

इस क्रिया का एक अर्थ यह भी है कि तुझे अपनी जिह्वा से ‘ओ३म्’ का पवित्र स्मरण करते रहना है और जैसे शहद मीठा है-वैसे ही तेरी वाणी में मिठास हो, जिसे सुनकर दूसरे लोग तुझ पर मुग्ध हो जाएं, तेरी अमृतरस भरी वाणी पर लोग झूम उठें, उन्हें लगे कि तेरे रूप में उनके सामने कोई भूसुर खड़ा है। जैसे शहद कितनी ही बीमारियों की औषधि है वैसे ही तू भी संसार में रोग पीडि़त़ लोगों के रोगों की औषधि बनना। तेरे नाम को लेने से लोगों को राहत मिले, तेरी उपस्थिति से लोग स्वयं को धन्य समझें और तेरे कुल को तेरे होने से गौरव की अनुभूति हो, जो लोग संसार में रहकर किसी भी प्रकार के कष्ट का अनुभव कर रहे हैं उन्हें तेरे रहने से अपने कष्टों के निवारण में सहायता मिले, जैसे शहद रोगों को शांत करता है और लोगों को शांति देता है-वैसे ही तू संसार के रोगों को शांत करना और लोगों को शांति प्रदान करना। ‘ओ३म्’ लिखने का अभिप्राय है कि ‘ओ३म्’ नाम का पवित्र जप ही संसार रूपी सागर से तेरी नैया पार लगाएगा और तुझे मार्ग से भटकने नही देगा। यदि तूने ‘ओ३म्’ नाम की नैया का सहारा ले लिया तो तू निश्चय ही इस भवसागर से तर जाएगा। इस नैया में बैठने वाले किसी भी व्यक्ति ने आज तक ठोकर नही खायी, ना ही उसकी नैया मजधार में डूबी। जो इस नैया पर सवार हो जाता है-उसे जीवन में अपना लक्ष्य दिखाई देने लगता है, उसे नही सूझता कि उसके पड़ोस में क्या हो रहा है? या उसका पड़ोसी क्या कर रहा है? उसे अपनी साधना दिखायी देती है और केवल अपना लक्ष्य दिखायी देता है। ऐसा जीवन दूसरों के कल्याण के लिए होता है, जो दूसरों के दुख दर्द को देखकर स्वयं दर्द अनुभव करता है और दूसरों की प्रसन्नता में अपनी प्रसन्नता का अनुभव करता है।

बात तो बड़ी छोटी सी है कि दूसरों की प्रसन्नता में अपनी प्रसन्नता अनुभव की जाए, पर यह व्यवहार में लागू करनी बड़ी कठिन है। पर जो लोग इसे व्यवहार में लागू कर लेते हैं उनके जीवन में भारी परिवर्तन आ जाते हैं। उन्हें सर्वत्र आनंद ही आनंद बिखरा हुआ दिखायी देता है, उनके अंतर्मन में आनंद का मोर नाचता रहता है। वह दूसरों के साथ अपने किये हुए को ध्यान नही रखते, ना ही दूसरों के किये को ध्यान रखते हैं, वह तो केवल अपने कत्र्तव्यकर्म पर ध्यान रखते हैं, और इसी से उनके चारों ओर का परिवेश आनंद से भर जाता है। सचमुच ऐसे लोग इस संसार में रोग पीडि़त लोगों के संताप हरने का हरसंभव प्रयास करते हैं। उनके जीवन की हर धडक़न यूं तो अपने लिए धडक़ती है, पर उस धडक़न में दूसरों के लिए कुछ भी अहितकारी नहीं होता इसलिए उसकी हर सांस दूसरों के कल्याण के लिए आती-जाती प्रतीत होने लगती है। कितनी पवित्र है अपनी वैदिक संस्कृति ? रोग पीडि़त विश्व की संताप हारिणी इस पवित्र संस्कृति को हमारा नमन।

डॉ राकेश कुमार आर्य

संपादक : उगता भारत

Comment:

hiltonbet giriş
hiltonbet giriş
hiltonbet giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
vdcasino giriş
vaycasino
vaycasino giriş
vaycasino giriş
roketbet
betpark giriş
betpark giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
norabahis giriş
betpark giriş
betpark giriş
vdcasino giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betgaranti giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betorder giriş
betorder giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betpark
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
holiganbet giriş
hititbet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
vaycasino giriş
Betgaranti Giriş
betgaranti girş
betnano giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
hititbet giriş
imajbet giriş
betasus giriş
betnano giriş
jojobet giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
betasus giriş
hititbet giriş
hititbet giriş
norabahis giriş
meritking giriş
meritking giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpark giriş
betpark giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş