भयावह आंकड़े: मानव का विनाश निकट है ?

1990 के पश्चात वैश्विक तापवृद्घि निरंतर बढ़ती जा रही है। 2003 में तो यूरोप में ‘लू’ के प्रकोप से लगभग 35,000 लोगों की मृत्यु हो गयी थी। इस प्रकार की तापवृद्घि के परिणामस्वरूप धु्रवों की बरफ पिछल रही है और पर्वतों पर ग्लेशियर घट रहे हैं। जिससे समुद्र का जलस्तर बढ़ रहा है। समुद्री स्तर बढऩे से जनसमूहों का पलायन, खाद्य आपूत्र्ति बाधित होने के कारण कुपोषण, रोगाणुओं के प्रसार में सहायक कीटों के हमलों में वृद्घि और जल जनित रोगों में वृद्घि होती जा रही है। जिससे संपूर्ण मानवजाति ही प्रभावित हो रही है।

वैज्ञानिकों की मान्यता है कि यदि इस प्रकार की परिस्थितियों पर रोक न लगायी गयी तो स्थिति और भी अधिक भयानक हो जाएगी और मलेरिया और डेंगू जैसे रोग तीव्रता से फैलकर विश्व के बड़े भाग को अपनी गिरफ्त में ले लेंगे। अच्छी वायु और अच्छा जल न मिलने के कारण मनुष्य की रोग निरोधक क्षमता में कमी आती जाएगी जिससे छोटे-छोटे रोगों पर नियंत्रण स्थापित करना भी मनुष्य के लिए कठिन हो जाएगा। ‘विश्व स्वास्थ्य संगठन’ के लिए उस समय छोटे-छोटे रोगों पर नियंत्रण स्थापित करना भी कठिन हो जाएगा।

विश्व स्वास्थ्य संगठन इस समय छोटे-छोटे द्वीपीय देशों के अस्तित्व को लेकर बड़ी कठिन स्थिति में फंसा हुआ है। पर्यावरण असंतुलन की स्थिति से निपटने के लिए आज भी बहुत से देश मनोवैज्ञानिक रूप से तैयार नहीं हैं। विश्व के अधिकांश देश ऐसे हैं-जिनके पास किसी गंभीर महामारी से लडऩे के लिए भी कोई सक्षम तंत्र उपलब्ध नहीं है। जबकि विश्व में सांस रोगों की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। भूस्खलन और बाढ़ों का प्रकोप भी बढ़ता ही जा रहा है।

2005 में विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक अध्ययन से यह तथ्य सामने आया है कि वैश्विक जलवायु परिवर्तन प्रत्यक्ष तौर पर मलेरिया, कुपोषण और पेचिश की बढ़ती समस्याओं से जुड़ा है। अध्ययन के अनुसार जलवायु परिवर्तन हर वर्ष 1,50,000 मौतों और अनेकों रोगों का कारण बनता है। 2070 ई. तक विश्व की लगभग 60 प्रतिशत जनसंख्या ऐसे जलवायु क्षेत्र में वास कर रही होगी जो मलेरिया के विस्तार के लिए अनुकूल होगा। इस अध्ययन में यह भी कहा गया है कि कार्बन डाईऑक्साइड में वृद्घि से परागों के उत्पादन में वृद्घि होनी, जिससे भविष्य में एलर्जी संबंधी समस्याओं में वृद्घि होगी।

यद्यपि विश्व ने ‘ग्लोबल वार्मिंग’ से निपटने के लिए सम्मिलित प्रयास करने आरंभ किये हैं, परंतु इन सम्मिलित प्रयासों की गति इतनी धीमी है कि इन्हें लेकर कोई उत्साहजनक टिप्पणी नहीं की जा सकती। जिससे लगता है कि अभी सवेरा होने की कोई आशा नहीं की जानी चाहिए।

देश में जल कुप्रबंधन की स्थिति स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात से ही रही है। पूरे देश में नलकूप क्रांति करके सरकार ने चाहे एक बार लोगों की वाहवाही ले ली हो, पर अब पता चल रहा है कि नलकूप क्रांति केवल एक छलावा थी। इसने हमारे भूगर्भीय जल का स्तर भयानक स्तर तक गिरा दिया है। सरकारों ने नलकूप लगवाये और बरसाती पानी को नदियों में यूं ही बह जाने दिया और तो और जिन क्षेत्रों में वर्षा जल भर जाया करता था उनसे नाले खुदवाकर नदियों से जोड़ दिये गये, जिससे वर्षाजल की संचयन प्रक्रिया ही बाधित हो गयी। झील के क्षेत्रों में पानी एकत्र हो जाना एक प्राकृतिक प्रक्रिया थी, जिसे सरकारों ने बिना विवेक का प्रयोग किये छेड़ा और उनका जल भी समुद्र तक पहुंचा दिया। जब इतने से भी काम नहीं चला तो नदियों में कूड़ा-कचरा, मल-मूत्र आदि डालने की तैयारी की गयी। अकेली दिल्ली की ही स्थिति यह है कि लगभग 3000 मिलियन लीटर घरेलू सीवर जल लाकर यमुना को दे देती है। इसका परिणाम यह निकला है कि कोलीफार्म बैक्टीरिया जो कि एक लीटर जल में 5,000 काउंट होना चाहिए वर्तमान में यमुना के जल में प्रति लीटर एक लाख से दस लाख काउंट तक बढ़ चुका है। ऐसी ही भयानक स्थितियों से देश की अन्य नदियां गुजर रही हैं। फलस्वरूप देश में जल प्रदूषण अपने खतरनाक स्तर से भी आगे बढ़ चुका है। देश वर्तमान में सूखे की चपेट में है। कई राज्यों में भयानक विनाश मचा है लोगों को पीने का पानी उपलब्ध नहीं है।

‘टाटा एनर्जी रिसर्च इंस्टिट्यूट’ की सन 1997 की रपट बतलाती है कि जहां सन 1947 में प्रत्येक व्यक्ति को 6000 क्यूबिक मीटर जल उपलब्ध था वह उस समय 2300 क्यूबिक मीटर हो गया। अब इसकी मात्रा क्या होगी यह सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है?

अब एक हल्की सी झलक वायु प्रदूषण पर भी डाल लेते हैं। नागपुर स्थित हृश्वश्वक्रढ्ढ की सन 1981 की रिपोर्ट के अनुसार कोलकाता मेट्रोपोलिटन जिले में समस्त स्रोतों से 1305 टन प्रदूषकों का प्रतिदिन वायुमंडल में उत्सर्जन होता है। इनमें से कोलकाता की औद्योगिक मेखला से 900 टन तथा हावड़ा औद्योगिक क्षेत्र से 405 टन प्रदूषकों का प्रतिदिन उत्सर्जन होता है। कोलकाता में प्रतिदिन 560 टन निलंबित कणिकीय पदार्थ 450 टन कार्बन मोनोऑक्साइड, 123 टन सल्फर डाई ऑक्साइड, 102 टन हाइड्रोकार्बन, 70 टन नाइट्रोजन ऑक्साइड का वायुमंडल में उत्सर्जन होता है। इनमें से औद्योगिक प्रतिष्ठानों से 600 टन तथा परिवहन सेक्टर से 360 टन प्रदूषकों का प्रतिदिन उत्सर्जन होना बताया गया है।

इसी रिपोर्ट में दिल्ली की भी भयानक तस्वीर प्रस्तुत की गयी है। यहां वायु प्रदूषण मनुष्य की सहनशक्ति से बाहर हो गया है। यहां वायु प्रदूषण का 60 प्रतिशत से 70 प्रतिशत तक पंजीकृत वाहनों से होता है। 1989 में पंजीकृत वाहनों से प्रतिदिन 250 टन कार्बन मोनोक्साइड, 400 टन हाइड्रोकार्बन, 6 टन सल्फर डाइ ऑक्साइड तथा भारी मात्रा में निलंबित कणिकीय पदार्थ का प्रतिदिन उत्सर्जन होता था।

स्वचालित वाहन उस समय दिल्ली में 600 किलोग्राम सीसा प्रतिदिन उगल रहे थे। इसका अभिप्राय है कि दिल्ली देश की राजधानी होकर भी नरक स्थली बन चुकी है। दिल्ली से मिलती-जुलती तस्वीर मुंबई की भी है। इसे सर्वाधिक प्रदूषित नगर माना जाता है। विभिन्न स्रोतों से 1000 टन प्रदूषकों से प्रति चार घंटों में उत्सर्जन द्वारा महानगर की वायु प्रदूषित होती है।

केपी सिंह तथा एस सिन्हा 1983 के अनुसार उत्तर प्रदेश में 16 ताप शक्ति संयंत्रों से प्रतिदिन 8-5 मिलियन पौण्ड कणिकीय पदार्थों का उत्सर्जन होता है। इन ताप शक्ति गृहों में प्रतिदिन 22000 मिट्रिक टन कोयले का प्रयोग किया जाता है। इन ताप शक्ति गृहों से प्रतिदिन 5,20,000 पौंड सल्फर डाई ऑक्साइड, 4,50,000 पौण्ड नाइट्रोजन ऑक्साइड, 11,300 पौण्ड कार्बन मोनोक्साइड, 4500 पौण्ड हाइड्रोकार्बन तथा अल्डहाइड आदि का वायुमंडल में उत्सर्जन होता है।

विषय विस्तार के भय से हम अधिक कुछ नहीं कहना चाहते। हमारा उद्देश्य यहां देश के विभिन्न क्षेत्रों की उस भयावह तस्वीर को प्रस्तुत करना मात्र था , जिसकी स्थिति की हल्की सी झलक को देखकर यह अनुमान लगाया जा सके कि यज्ञ आदि के न करने कराने से देश किस प्रकार नरक बन चुका है ? अमृत की उपासना करने वाला आर्यावर्त आज विष की उपासना कर रहा है । इसलिए वायु , जल और पर्यावरण सभी विषाक्त हो चुके हैं । यह सारी स्थिति परिस्थितियां क्या बता रही हैं ? – यही कि मानव का विनाश निकट है ।

डॉ राकेश कुमार आर्य

संपादक : उगता भारत

Comment:

Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
ikimisli giriş
grandpashabet giriş
bonus veren siteler
grandpashabet giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betlike giriş
ikimisli giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet
betparibu giriş
vdcasino giriş
grandpashabet giriş
betlike giriş
betmarino giriş
betmarino giriş
betmarino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
ikimisli giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş