Categories
उगता भारत न्यूज़

नए तालाबों की खुदाई के नाम पर ऐसे होता है सरकारी धन का दुरुपयोग

दादरी । ( संवाददाता ) यहां के गांव महावड़ में गाटा संख्या 885 में लगभग 2200 मीटर ग्राम समाज की भूमि पर जिला प्रशासन और एसडीएम दादरी के द्वारा तालाब खुदवाये जाने का निर्णय लिया गया है। जब जिले का भूगर्भीय जल स्तर दिन प्रतिदिन गिरता जा रहा हो और पेयजल की समस्या लोगों को परेशान कर रही हो तब सरकारी स्तर पर ऐसे निर्णय लिए जाना सराहनीय ही माना जाएगा । परंतु इसके उपरांत भी कुछ ऐसे सवाल हैं जो प्रशासन की नियत पर संदेह पैदा करते हैं । जिन्हें विचारकर ऐसा लगता है कि यह सब केवल खानापूर्ति है । वास्तव में इसका कोई लाभ मिलने वाला नहीं है।

वैसे भी भारतवर्ष में अनेकों ऐसी योजनाएं शासन की ओर से बनती रही हैं जिन्हें प्रशासन में बैठे अधिकारियों ने मूर्खतापूर्ण ढंग से लागू किया और सरकारी धन का दुरुपयोग किया । ग्राम उपरोक्त में खुदने वाले इस तालाब की परिस्थितियों पर भी यदि विचार करें तो ऐसा ही लगता है कि यहां भी प्रशासन में बैठे अधिकारी केवल सरकारी धन का दुरुपयोग कर रहे हैं और अपनी परंपरागत गलतियों को करने की कार्यशैली का परिचय दे रहे हैं।

महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि वर्षा जल को संचय करने के दृष्टिकोण से किसी गांव में तालाब खुदवाये जाने आवश्यक ही माने जा रहे हैं तो महावड़ गांव में पहले से ही 2 तालाब हैं । जिनका काफी बड़ा रखवा भी है । यदि उन्ही तालाबों को सरकार की ओर से और गहरा करवा दिया जाए और उन में फैले हुए समंदर सोख को खत्म करवाकर उन पर कुछ पड़ोसी काश्तकारों के द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटा दिया जाए तो भूगर्भीय जल को सुरक्षित रखने के दृष्टिकोण से नए तालाब खोदने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी ।

इसके अतिरिक्त एक बात और भी है कि इस नए तालाब के खोदे जाने के लिए वर्षा जल को इसमें लाकर भरने की कहीं से भी सुविधा उपलब्ध नहीं है। नया तालाब वहां खोदा जाना चाहिए जहां पर वर्षाजल स्वाभाविक रूप से बहकर उस तालाब में आकर भर जाए । इस तालाब के खोदने के उपरांत भी कहीं से भी इस तालाब में आकर पानी अपने आप नहीं भरेगा, बल्कि यह तालाब कृत्रिम ढंग से अर्थात बोर आदि से भरना पड़ेगा ।

फिर इस नए तालाब के खोजे जाने का लाभ क्या है ? हम तो यही कहेंगे कि यदि इस गांव में पहले से ही पड़े दो तालाबों को गहरा कर दिया जाए तो उनमें वर्षाजल को संचय करने की अधिक क्षमता पैदा हो जाएगी । वह वर्षा जल सारे गांव की नालियों के माध्यम से अपने आप उनमें आकर भर जाएगा ।

कुछ भी हो उपरोक्त तालाब के खोदे जाने में प्रशासनिक अधिकारियों की परंपरागत कार्यशैली का ही पता चलता है । जिसके माध्यम से वह सरकारी धन का दुरुपयोग करते रहे हैं । यदि 1947 से लेकर आज तक अधिकारियों के द्वारा की जाती रही ऐसी गलतियों के माध्यम से सरकारी धन के किए गए दुरुपयोग का आकलन किया जाए तो पता चलेगा कि देश की बहुत बड़ी धनराशि इन मूर्खतापूर्ण नीतियों में ही व्यय हो गई है। पता नहीं प्रशासन में बैठे अधिकारियों को कब अक्ल आएगी ? – सचमुच देश राम भरोसे ही चल रहा है।

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
betsilin giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betasus giriş
betasus giriş
hititbet giriş
meritking giriş
nitrobahis
nitrobahis
meritking giriş
meritking giriş
hititbet giriş
grandpashabet
grandpashabet
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet
grandpashabet
hiltonbet giriş
hiltonbet giriş
katlabet giriş
katlabet giriş
meritking güncel giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
betnano güncel giriş
betnano güncel giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
katlabet giriş
katlabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
milanobet giriş