स्टैचू ऑफ यूनिटी के महानायक सरदार पटेल को उनकी जयंती पर कृतज्ञ राष्ट्र की सच्ची भावांजलि

आज देश के पहले उप प्रधानमंत्री सरदार पटेल की जयंती है । राष्ट्र आज पहली बार अपने इस महानायक को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। जब जम्मू कश्मीर का पूर्ण वैधानिक विलय होते हुए हम भारत में देख रहे हैं । वहां पर आज एक विधान , एक निशान की प्रक्रिया के अंतर्गत नई सरकारें गठित हो रही हैं । 1947 से लेकर आज तक यहां फैले आतंकवाद को समाप्त करने के लिए भारत ने 1947 – 48 ,1965 , 1971 , 1999 के कारगिल युद्ध सहित 4 विनाशकारी युद्धों को झेला है । जिनमें हमारे हजारों सैनिकों का बलिदान हुआ है । इसके अतिरिक्त वहां पर तैनात हमारे सुरक्षा प्रहरी साधारण परिस्थितियों में भी अपना बलिदान देते रहे हैं । इन चार युद्धों में देश को जनधन की भारी हानि उठानी पड़ी है । इस प्रांत को अपने साथ बनाए रखने के लिए भारत ने सीमा पर तारबंदी का बहुत भारी खर्च भी झेला है।

जम्मू कश्मीर विधानसभा में जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार जम्मू कश्मीर में 34000 ऐसे मामले रहे हैं जो लापता थे यानि इतनी आतंकवादी घटनाएं हो गई और उनका कहीं कोई रिकॉर्ड नहीं , इन्हीं आंकड़ों के अनुसार 2009 की जुलाई तक जम्मू कश्मीर में पिछले 20 वर्ष में 45000 निरपराध लोग मारे गये थे । इसके अतिरिक्त भारत सरकार ने जो हजारों हजारों करोड़ के आर्थिक पैकेज इस राज्य के विकास के लिए दिए , परंतु वह बड़े बड़े पैकेज इस प्रांत के विकास पर खर्च ना होकर देश के विनाश पर खर्च किए जाते रहे और केंद्र सरकार द्वारा भेजे गए उस धन से आतंकवादी गतिविधियों को प्रोत्साहित करने में कभी वहां की अब्दुल्ला सरकारें , तो कभी आजाद की सरकारें और कभी महबूबा की सरकारें काम करती रहीं । उनके कथित लोकराज में 50,000 से अधिक हिंदू मंदिर नष्ट कर दिए गए , परंतु किसी ने भी उस ओर ध्यान नहीं दिया ।भारत का तथाकथित धर्मनिरपेक्ष स्वरूप इस प्रांत में लूटा जाता रहा , उसकी खाल को जल्लाद नोंचते रहे और शासन प्रशासन आंखें बंद किए चुप बैठा रहा।

देश को तोड़ने की गतिविधियों में संलिप्त रहने वाले 36 आतंकी संगठन इस प्रांत में सक्रिय रहे । जिन्हें अलग-अलग 36 मुस्लिम देशों के आतंकी सरगना चला रहे थे । उन पर नकेल कसने के लिए सरकारों के हाथ बंध गए । एक से बढ़कर एक पंगु सरकार भारत में आती रही और कश्मीर के स्वर्ग को दोजख बनाने में सहायता करती रहीं।

पिछले कुछ वर्षों में ही 12000 आतंकियों को कश्मीर घाटी में हमारे सुरक्षाबलों ने समाप्त करने का साहसिक कार्य किया । इनकी इतनी बड़ी संख्या के विनाश से पता चलता है कि भारत को तोड़कर इस प्रांत को सदा सदा के लिए अलग कर देने के षडयंत्र कितने बड़े पैमाने पर चल रहे थे ?

सरदार पटेल के द्वारा हैदराबाद और जूनागढ़ को जब भारत में मिलाने का ऐतिहासिक कार्य किया गया था तो उस समय वह जम्मू-कश्मीर को भी भारत में लाना चाहते थे ।परंतु नेहरू ने उन्हें जम्मू कश्मीर में हाथ लगाने से यह कहकर मना कर दिया था कि कश्मीर मेरा अपना घर है , इसलिए उससे दूर रहो ।

सरदार पटेल कश्मीर को नेहरू की ससुराल कहा करते थे । अतः वे दुखी मन से इस प्रांत का उपचार करने से अपने आप को दूर किए रहे । यद्यपि उन्होंने अपने महाप्रयाण से पूर्व जनसंघ के नेता बलराज मधोक से कहा था कि यदि वह इस बार रोगशैय्या से उठ गए तो कश्मीर के दर्द का अंतिम उपचार कर देंगे। काश ! सरदार पटेल कुछ समय और जीवित रहते और वह निरोग होकर बाहर आते तो निश्चय ही कश्मीर को लेकर हमने आज तक जितनी जनधन की हानि उठाई है वह न उठानी पड़ती और देश को अपने इस प्रांत को अपने साथ लाने के लिए जितनी लंबी प्रतीक्षा करनी पड़ी है वह भी ना करनी पड़ती।

देश आज पहली बार ‘ स्टैचू ऑफ यूनिटी ‘ का अर्थ समझ रहा है । जब वह सचमुच यूनिटी का अनुभव कर रहा है । आज पहली बार भारत का संविधान कश्मीर से कन्याकुमारी तक और कच्छ से कामरूप तक एक समान एक स्वरूप में लागू होने की स्थिति में आया है ।

सरदार पटेल के सपनों का भारत आज स्थापित हुआ है । जिसने ‘उगता भारत ‘ नहीं देखा हो वह आज के सूर्य के साथ इसको देख सकता है । इस ‘ उगता – भारत ‘ को , उदीयमान भारत को विश्व गुरु बनने के लिए अंगड़ाई लेते भारत को ‘उगता भारत ‘ की हार्दिक बधाइयां साथ ही ऐसे महान संकल्प के धनी सरदार पटेल जी को उनकी जयंती के पावन अवसर पर भी हम अपनी विनम्र भावांजलि अर्पित करते हैं जिनके सपने को साकार करते हुए आज यह महान देश स्वयं को गौरवान्वित अनुभव कर रहा है।

अंत में सरदार पटेल जी की जयंती के इस पावन अवसर पर मैं इतना ही कहना चाहूंगा :–

हर किसी के दिल में बसना

यह सहज प्राप्त नहीं ।

सरदार कहलाए भारत के

यह कम गौरव की बात नहीं।।

तेरे दिल में दर्द एक रहा

कश्मीर बनेगी कब मेरी ?

आज श्रद्धा पुष्प लिए आई है।

कश्मीर बनेगी अब तेरी।।

हो पापों का प्रक्षालन

बापू चाचा की छाती पर ।

दिए पटक कहीं गहन गह्वर में

तुझे देश चढ़ा रहा हाथी पर ।।

हम उसको बापू कहते हैं

जो देश के टुकड़ों टुकड़ों को सीता ।।

जो देश के टुकड़े टुकड़े कर दे

वह सदा अपयश का जीवन जीता ।।

डॉ राकेश कुमार आर्य

संपादक : उगता भारत

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