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राष्ट्रीय प्रेस महासंघ की ओर से लिया गया प्रस्ताव : दिल्ली का नाम किया जाए इंद्रप्रस्थ

नई दिल्ली ।( विशेष संवाददाता ) यहां स्थित राजेंद्र भवन में राष्ट्रीय प्रेस महासंघ की ओर से अपने प्रथम राष्ट्रीय अधिवेशन के अवसर पर विगत 21 अक्टूबर को आयोजित की गई एक विशेष संगोष्ठी में वक्ताओं ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि दिल्ली का नाम बदलकर इंद्रप्रस्थ किया जाए।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित हुए नासा एवं इसरो के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ ओमप्रकाश पांडे ने कहा कि भारत का ज्ञान-विज्ञान प्राचीन काल से ही संपूर्ण भूमंडल का मार्गदर्शन करता आया है । उसके गौरवपूर्ण अतीत को स्थापित करना आज की पत्रकारिता के लिए आवश्यक है । उन्होंने कहा कि पत्रकार भारत के गौरव को यदि आज की पीढ़ी के अंतर्मन में उतारने का प्रयास करेगा तो इससे भारत का सामाजिक और वैश्विक चिंतन संसार में वास्तविक शांति स्थापित करने में सहायक होगा।

राष्ट्रीय प्रेस महासंघ के प्रथम अधिवेशन में बोलते हुए राष्ट्रीय प्रेस महासभा के राष्ट्रीय संयोजक एवं मुख्य वक्ता रवि चाणक्य ने कहा कि इस समय देश के सामने राष्ट्रवादी पत्रकारिता को प्रोत्साहित करने का स्वर्णिम अवसर है । उन्होंने राष्ट्रीय प्रेस महासभा की स्थापना के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश में भारत को भारत के संदर्भ में सही प्रकार से समझाने के लिए और इसके मानवीय मूल्यों को संपूर्ण मानवता के हितार्थ प्रस्तुत करने के उद्देश्य से इस संगठन की स्थापना की गई है । उन्होंने कहा कि राष्ट्रवादी पत्रकारिता लेखन और इतिहास के दोबारा लेखन करने से ही भारत विश्वगुरु की ऊंचाई पर पहुंच सकता है ।

इस अवसर पर बोलते हुए राष्ट्रीय प्रेस महासंघ के अध्यक्ष डॉ राकेश कुमार आर्य ने कहा कि भारत का गौरवपूर्ण इतिहास लेखन तभी संभव है जब राष्ट्रवादी सोच के पत्रकार लेखक इतिहासकार कवि और साहित्यकार पैदा किए जाएंगे । उन्होंने कहा कि राष्ट्रवादी राष्ट्रीय प्रेस महासंघ का उद्देश्य भी यही है।

राष्ट्रीय प्रेस महासंघ के अध्यक्ष के रूप में डॉ आर्य ने प्रस्ताव रखा कि नई दिल्ली का नाम इंद्रप्रस्थ किया जाए । जिससे भारत के गौरवपूर्ण अतीत को समझने में हमारी युवा पीढ़ी को सहायता मिलेगी ।

उन्होंने कहा कि दिल्ली के पुराने किले को भी पांडवों की महाभारत कालीन स्मृतियों को समर्पित करने के लिए वहां पर विशेष रूप से ऐसा चित्रण किया जाए जिससे उन स्मृतियों को सजीवता प्रदान की जा सके । जिसका अनुमोदन वीर सावरकर फाउंडेशन के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष धर्मचंद पोद्दार द्वारा किया गया । श्री पोद्दार ने अपने संबोधन में कहा कि भारत को भारतीयता के गौरव बोध से भरने के लिए दिल्ली का नाम इंद्रप्रस्थ किया जाना समय की आवश्यकता है। जिसे केंद्र की मोदी सरकार ही पूरा कर सकती है। इस अवसर पर कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पंडित बाबा नंद किशोर मिश्र ने कहा कि आतंकवाद के विरुद्ध वर्तमान केंद्र सरकार जिस प्रकार कार्यवाही कर रही है उसका हम पूर्णतया समर्थन करते हैं। जिसके लिए राष्ट्रीय सोच को विकसित करने में राष्ट्रीय प्रेस महासंघ एक अच्छी भूमिका निभा रहा है ।

कार्यक्रम में विनोद सर्वोदय ने बोलते हुए कहा कि इस समय सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के पुनर्जागरण का काल है जिसके लिए हमें एकजुट होकर कार्य करने की आवश्यकता है ।

विशिष्ट वक्ता के रूप में अपने विचार व्यक्त करते हुए भारत स्वाभिमान ट्रस्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभारी श्री दयाशंकर आर्य ने कहा कि महर्षि दयानंद के चिंतन से ही भारत की वर्तमान सभी समस्याओं का निस्तारण किया जाना संभव है । उन्होंने कहा कि आर्य समाज और स्वामी दयानन्द जी का चिंतन पूर्णतया राष्ट्रवादी है । इसी चिंतन को पत्रकारिता के माध्यम से प्रस्तुत करने की आवश्यकता है ।

कार्यक्रम का शुभारंभ राकेश कुमार आर्य बागपत द्वारा कराया गया ।उन्होंने राष्ट्रीय प्रेस महासंघ के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला और यह स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय प्रेस महासभा महासंघ के उद्देश्यों को पूर्ण करने में उगता भारत समाचार पत्र किस प्रकार अपनी अहम भूमिका निभा रहा है।

इंद्रप्रस्थ दिल्ली का नाम इंद्रप्रस्थ करने और पुराने किले में महाभारत कालीन स्मृतियों को सजीवता प्रदान करने के डॉक्टर आर्य के प्रस्ताव पर कार्यवाही करने का आश्वासन देते हुए डॉक्टर ओम प्रकाश पांडे ने कहा कि वह इस प्रस्ताव को संबंधित मंत्रालय एवं अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करेंगे और प्रधानमंत्री श्री मोदी तक भी इस अच्छे प्रस्ताव को पहुंचाने में सहायता करेंगे।

इस अवसर पर विशिष्ट वक्ता के रूप में डॉ विजय कुमार महानिदेशक सांख्यिकी विभाग भारत सरकार ने भी अपने विचार व्यक्त किए और आज के संदर्भ में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद से ओतप्रोत पत्रकारिता को विकसित करने की भावना पर बल दिया। एक गंभीर चिंतक की भांति अपने विचार प्रस्तुत करते हुए श्री मोहनलाल ने पत्रकारिता की जिम्मेदारियों की सीमा रेखा खींचते हुए कहा कि सत्य का अनुसंधान की आवश्यक नहीं है अपितु उसका प्रचार-प्रसार भी आवश्यक है ।

इस अवसर पर राष्ट्रीय प्रेस महासंघ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष अमित कुमार , उमाकांत गिरी , कोषाध्यक्ष श्रीनिवास आर्य , महासचिव संजय प्रजापति सहित राजकुमार यादव , वेद वसु आर्य , एल एस तिवारी नीरपाल भाटी , सहित अखिल भारत हिंदू महासभा के राष्ट्रीय महामंत्री श्री एस डी विजयन , झारखंड प्रदेश से श्री धनपति सिंह , किसान महासंघ के नेता डॉक्टर नरेंद्र कुमार तंवर , श्री राकेश कुमार छोकर , आर्य निर्मात्री सभा से बासदेव आर्य फरीदाबाद , प्रभु लाल मुंबई , उड़ीसा प्रतिनिधि श्री विकास मोहंता , बिहार प्रतिनिधि श्री नवल किशोर मिश्र तथा राष्ट्रीय प्रेस महासभा के सैकड़ों पदाधिकारी व कार्यकर्ता उपस्थित थे ।

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