Categories
युवा

माय बॉडी , माय चॉइस को प्रकृति वर्जित करती है

लेखक – आर्य सागर

सृष्टा ने जिसे अनिश्वरवादी प्रकृति भी कह सकते हैं स्त्री व पुरुष शरीरों की पृथक पृथक रचना की। यह भिन्नता केवल शारीरिक स्वभावगत ही नहीं आंतरिक भी है। जो हार्मोन पुरुष को सुंदर सुडोल बनाते हैं वह स्त्री को कुरूप बीमार बना सकते हैं जो हार्मोन स्त्री को सुंदर स्वस्थ बनाते हैं वही पुरुष के लिए हानिकारक भी हो सकते हैं। इसका कोई यह तात्पर्य ना निकाले कि स्त्री पुरुष में परस्पर श्रेष्ठ श्रेष्ठतर या तरतम्यता का भाव है दोनों ही विधाता की अपने आप में अनपेक्षा से संपूर्ण आदर्श रचना है लेकिन छद्म स्त्रीवादी वामपंथी वामपंथन यह कहा समझने वाले थे – 1969 के दौर में अमेरिका, यूरोप में “माय बॉडी ,माय चॉयस” अर्थात “मेरा शरीर ,मेरी पसंद” के नारे के साथ स्त्री जाति को स्वतंत्रता समता के नाम स्वच्छंद बनाकर अन्ततः स्त्री को परिणामत: हताशा निराशा में धकेलने वाले सो कॉल्ड फेमिनिस्ट मूवमेंट का सूत्रपात होता है।

जिस स्त्री को विधाता ने सृजन निर्माण का महनीय दायित्व दिया वह दायित्व मुक्ति को ही अपनी स्वतंत्रता मानने लगी यह पलायनवाद ही हो सकता है स्वतंत्रता तो होने से रही। पुरुषों के बराबर अधिकार या पुरुषों का अनुकरण ही स्त्रीवाद माना जाने लगा जबकि मूल स्त्रीवाद का आदर्श इससे भिन्न है। शिक्षा व्यापार आदि क्षेत्र में तो इस अनुकरण में कोई दोष नहीं होना चाहिए लेकिन तब क्या हो जब स्त्री शारिरिक गठन शौष्ठव के मामले में पुरुषों का अनुकरण करने लगे जिसका विभेद निषेध प्रकृति ने किया है पूरी निष्पक्षता से बगैर स्त्री पुरुष का पक्षपात किये। आज जिम जाने वाली महिलाएं विशेष तौर पर भारतीय समाज में पिछले एक दशक में तेजी से पुरुषों की तुलना में महिलाओं की जिम आदि में वर्कआउट करने की प्रवृत्ति बढी है आज अपने स्वास्थ्य शरीर के हार्मोन चक्र को बर्बाद करके जिसमें स्त्री पुरुषों की तरह सिक्स पैक्स ऐब्स आदि निकाल रही है।

आमतौर पर बॉडी फैट के 15% से कम होने पर सिक्स पैक्स ऐब्स दिखने लगती है जो की शरीर की एक महत्वपूर्ण मांसपेशी ही है। लेकिन विधाता या प्रकृति ने स्त्री व पुरुष शरीर में एसेंशियल बॉडी फैट की विभिन्न मात्रा निर्धारित की है पुरुष की पेशीय वसा यदि 4% से कम हो जाए तो उसे कोई नुकसान नहीं है लेकिन स्त्री का बॉडी फेट यदि एसेंशियल वसा पेट के आसपास की चर्बी 15% से कम हो जाए तो उसमें इनफर्टिलिटी का जोखिम हो जाता है बॉडी फैट का हमारे शरीर में आवश्यक मात्रा में महत्वपूर्ण योगदान है यह हमारे एंडोक्राइन सिस्टम को नियंत्रित करता है कुछ जरूरी हार्मोन इसके कारण उनका स्राव होता है। जो महिलाएं आज पुरुषों का अनुकरण हैवी वर्कआउट कर रही हैं उनका हार्मोनल तंत्र दुष्प्रभावित हो रहा है नतीजा Hypothalamic amanorrhea जैसी समस्या उत्पन्न हो रही है जिसमें माहवारी का चक्र अनियमित हो जाता हो जाता है। गर्भधारण हो भी जाए तो गर्भावस्था के दौरान शिशु व खुद महिलाओं को कुछ कॉम्प्लिकेशन आते हैं, यह सब एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन की कम मात्रा के होने से होता है। दुनिया के तमाम लैंसेंट , हावर्ड मेडिकल जनरल आदि इस पर अपनी मोहर लगा चुके हैं।

अति व्यायाम के कारण डिप्रेशन के भी मामले महिलाओं में नोटिस किए गए ऐसा नहीं है महिलाओं के लिए व्यायाम का निषेध है महिलाओं के लिए व्यायाम होना चाहिए लेकिन शारीरिक प्रकृति के अनुसार प्रकृति में प्रत्येक मनुष्य के लिए कुछ सीमाएं निर्धारित है वही हम प्राचीन शल्य चिकित्सक सुश्रुत की बात करें तो उन्होंने अपने ग्रंथ में महिलाओं के अति व्यायाम करने को वर्जित माना है उनको साधारण व्यायाम ही करने चाहिए अति व्यायाम के कारण वात प्रकुपित होने से गर्भ विकृति की बात महर्षि सुश्रुत ने की है। महर्षि सुश्रुत हो या मॉडर्न मेडिकल साइंस दोनों एक ही सत्य पर पहुंच रहे हैं। हम भारतीय आंख मूंदकर किसी भी पश्चिमी तौर तरीके का अनुकरण कर लेते हैं आज महिलाएं पुरुषों के मुकाबले ठीक-ठाक संख्या में जिम में जा रही हैं लेकिन विज्ञान की कसौटी पर ही कसकर हमें किसी क्रियाकलाप को अपनाना चाहिए। योग व्यायाम रनिंग जॉगिंग जैसे व्यायाम कोई भी व्यक्ति कर सकता है लेकिन विशेष मसल ट्रेनिंग के मामले में हम इन वैज्ञानिक तथ्यों की उपेक्षा नहीं कर सकते। आखिर वह कैसा महिला सशक्तिकरण जो एक महिला को बाझ या रुग्ण बना दे।

पश्चिमी समाज जो महिलाएं वर्कआउट करती हैं वह प्रोफेशनल मेडिकल गाइडलाइन या मानदंडों के अनुसार करती हैं भारत जैसे देश में जहां कोई मानदंड गाइडलाइन नहीं है जब तक गाइडलाइन बनती है तब तक तो आमजन का स्वास्थ्य चौपट हो चुका होता है वहां हमें अपने विवेक से ही काम लेना चाहिए सबक सिखने के लिए खुद गिरने की आवश्यकता नहीं होती।

महर्षि सुश्रुत्व आदि ने महिलाओं के लिए व्यायाम को पूरी तरह वर्जित नहीं माना अपितु कठोर व्यायाम को वर्जित माना है। हल्का-फुल्का व्यायाम हम अपने घर पर भी कर सकते हैं विशेष कर हमारी मातृ शक्ति। बुद्धिमान थोड़े में ही अधिक समझता है बाकी सब स्वतंत्र हैं लेकिन वह स्वतंत्रता किस काम की जो हमें एक दिन परतंत्र बना दें।

लेखक – आर्य सागर
तिलपता ग्रेटर नोएडा

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
hititbet
bettilt giriş
xslot giriş
xslot giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
betpark giriş
betnano giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
holiganbet giriş
betnano giriş
betpark giriş
betpark giriş
Betpark Giriş
Betpark Giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
Runtobet Giriş
casinolevant
casinolevant giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
jojobet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
onwin giriş
onwin giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
betkom giriş
betkom giriş
betkom giriş
onwin giriş
betgaranti
betgaranti
sahabet giriş
sahabet giriş
betgaranti
Hititbet Giriş
Runtobet Giriş
pokerklas giriş
pokerklas giriş
betparibu giriş
betparibu giriş
jokerbet giriş
jokerbet giriş
onwin giriş
onwin giriş
betkom giriş
betkom giriş
imajbet giriş
imajbet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş