Categories
भारतीय संस्कृति व्यक्तित्व

दुनिया को नृत्य व नाटक (अभिनय) सिखाने वाले भरत मुनि

लेखक – आर्य सागर

यूनेस्को ने आज ‘मेमोरी ऑफ़ द वर्ल्ड रजिस्टर’ में भागवत गीता व भरत मुनि रचित नाट्यशास्त्र को शामिल किया है। गीता जो महाभारत का ही एक अंश है उससे अधिकांस सनातन धर्मी गीता पारायण करने जिज्ञासु जन परिचित है लेकिन नाट्य शास्त्र से आज भी बहुत कम लोगों का परिचय है। यदा-कदा इस ग्रंथ के बारे में प्रतियोगी परीक्षाओं में पूछ लिया जाता है कि नाट्यशास्त्र के रचयिता कौन है या भरत मुनि ने किस शास्त्र की रचना की आदि आदि।

नाट्यशास्त्र की रचना भरत मुनि ने की थी उन्होंने नाट्य शास्त्र को नाट्यवेद भी कहा है। 37 अध्यायों में लिखे गए इस ग्रंथ में शारीरिक मानसिक सात्विक अभिनय, श्रृंगार ,वीर आदि रस उनके भाव, वाद्य यंत्र, नाट्य सभा , रंगमंच के मंडप बनाने की कला, नाटृय को जीवंत करने के लिए सजीव वन्यजीवों का प्रयोग, नाटक मंडप का साइज क्या होना चाहिए, युद्ध के नाटक के मंडपों का कैसे बनाना चाहिए,अभिनय करने वाले नटों के परिधान से लेकर किस पात्र का प्रवेश नाटक अभिनय में कब किस दिशा से होना चाहिए कैसे उसकी वेशभूषा हावभाव हो इन सभी का सुक्ष्म गहन मनोवैज्ञानिक विश्लेषण किया गया है। इस ग्रंथ में जिस शब्दावली का प्रयोग मिलता है वह शब्दावली आज प्रचलन में नहीं है नाट्य शास्त्र के अपने ही पारिभाषिक शब्द है। भरत मुनि का काल आज तक भी कोई भारतीय या पश्चिमी विद्वान तय नहीं कर पाया है फिर भी कहा जाता है कम से कम भरत मुनि ने 2000 वर्ष पहले नाट्य शास्त्र की रचना की थी। दुर्भाग्य यह रहा यह ग्रंथ समूचे भारतवर्ष में हजारों वर्षों से उपेक्षित रहा बताया जाता है उत्तर भारत में ही पिछले 12०० वर्षों से इसकी परंपरा लुप्त हो गई। इस कारण इस ग्रंथ के विद्वान पंडित जहां थे वह इस ग्रंथ के प्रयोक्ता अर्थात अभिनय करता नहीं बन पाये जहां अभिनयकर्ता थे तो वह इस ग्रंथ से परिचित नहीं थे।

इस ग्रंथ के प्रथम अध्याय में भरत मुनि ने घोषणा की थी।

न तज्ज्ञानम् न तच्छिल्पम ना सा विद्या न सा कला।
नासौ योगो….. यत्र दृश्यते।।

अर्थात नाट्य विधा अनंत है नाट्य का पार नहीं पाया जा सकता इसमें अनंत भाव है अनंत कला शिल्प इसमें समाहित हो जाते हैं।

भरत मुनि ने घोषणा की थी दुनिया में ज्यों ज्यों शिल्प व कला विज्ञान तकनीक प्रगति करेगा उन सभी तकनीकों विज्ञान व कलाओं का प्रयोग अभिनय कला में किया जा सकता है। भरत मुनि की यह घोषणा आज सत्य सिद्ध हो रही है टेलीविजन रेडियो के अविष्कार से लेकर कंप्यूटर हाई डेफिनेशन वीएसएलआर कैमरा यहां तक की आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का भी प्रयोग डांस और ड्रामा में हो रहा है।जिन तकनीकों को वैज्ञानिक अनुसंधानों के लिए इजाद किया गया था वह आज सफलतापूर्वक सिनेमा में प्रयोग हो रही है यह सभी भरत मुनि की भविष्यवाणी को सिद्ध कर रही हैं।

भरत मुनि ने अपने ग्रंथ को रचने का प्रयोजन बताया उन्होंने कहा पश्चात के युगों में लोगों की मेधा शक्ति कमजोर पड़ जाएगी वह वेदों के गहन आध्यात्मिक वैज्ञानिक ज्ञान को आत्मसात नहीं कर पाएंगे ऐसे में नाट्य विधा के मंचन से उन्हें वेदार्थ को हाथ में पर रखें आंवले की तरह स्पष्ट कराया जाएगा इसी कारण मैंने इस ग्रंथ को रचा है।

इतना महान मनोवैज्ञानिक विज्ञान कला तकनीक को समेटने वाला शास्त्र इसकी मूल भूमि भारत में ही हजारों वर्षों तक उपेक्षित रहा। 18वीं शताब्दी में कोलकाता में सर विलियम जॉन्स मजिस्ट्रेट ने जब संस्कृत भाषा पढ़ी तो उन्हें पता चला संस्कृत में काव्यगत नाटक भी लिखे गए हैं तत्कालीन पंडितों से जब उन्होंने पूछा संस्कृत में सबसे अच्छा नाटक कौन सा है तो उन्हें कालिदास शाकुन्तल के बारे में उन्हें बताया गया। शाकुन्तल की पोथीयो को जब उन्होंने खोजना शुरू किया तो उनके संयोग से नाट्यशास्त्र की भी एक खंडित पोथी हाथ लग गई यहीं से उन्होंने नाट्य शास्त्र पर अनुसंधान शुरू कर दिया लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली सन 1865 में फ्रिटेज एडवर्ड हाल नामक अमेरिकी प्राच्य विद्याविद ने नाट्यशास्त्र की अनेक खंडित और भ्रष्ट पांडुलिपि प्राप्त करके उस पर कार्य आरंभ किया उन्होंने कुछ अध्याय भी इसके प्रकाशित कराये देखते ही देखते उन्हें भारत के विभिन्न हिस्सों से नाट्य शास्त्र की 40 से अधिक पांडुलिपियों प्राप्त हुई फिर तो पूरी कड़ी जुड़ती चली गई फ्रांस के विद्वान पाल रेनो ने 1888 में इसका संस्करण प्रकाशित किया। अंग्रेजों ने जब इस ग्रंथ का अध्ययन किया तो उन्होंने दांतों तले उंगली चबाली उससे पूर्व वह शेक्सपियर को ही फादर ऑफ ड्रामा समझते थे लेकिन नाट्य शास्त्र ने उनके इस भ्रम को तोड़ दिया । एक ही व्यक्ति अभिनय नृत्य संगीत तीनों ही विधाओं का आदि विद्वान था जिसका नाम भरत मुनि था आज भी नाट्यशास्त्र से पूर्व दुनिया में डांस ड्रामा पर लिखा गया कोई ग्रंथ उपलब्ध नहीं होता । पश्चिमी डांस एंड ड्रामा की आर्ट जहां से खत्म होती है वहां से भरत मुनि का नाट्य शास्त्र शुरू होता है। भरत मुनि ने नृत्य व नृत् का अंतर समझाया उन्होंने भाव प्रधान शरीर के अंगों व भावों के संचरण को नृत्य कहा और भावनाहीन शारीरिक गतिविधियों को उन्होंने केवल नृत् कहा है जिसे आज हाथ पांव फेकना कह दिया जाता है इंस्टाग्राम आदि पर जो आधुनिक मैनका रम्भाए धरती फाड़ डांस कर कर रील बना रही है वह नृत्य नहीं नृत् कर रही है । भरत मुनि ने हास्य रस अर्थात कॉमेडी का वर्गीकरण किया है एक अच्छे कॉमेडियन( विदुषक) में क्या गुण होने चाहिए उन सभी का उन्होंने गहन सुक्ष्म वर्णन किया है। अभिनव नृत्य में अश्लीलता व कामुकता के धुर विरोधी भरत मुनि थे।

प्राचीन काल में भरत मुनि के नाट्यशास्त्र पर अनेकों विद्वानों ने इसका भाष्य किया लेकिन आज भी इसका पूर्ण ऋषिकृत भाष्य नहीं मिलता इस सम्बन्ध में बहुत से विद्वानों ने प्रयास किया लेकिन सफलता किसी को हाथ नहीं लगी। ऐसे में यूनेस्को ने इसे वर्ल्ड मेमोरी रजिस्टर में स्थान दिया है यह कहीं ना कहीं भारत के ऋषि मुनियों की ज्ञान परंपरा के प्रति आदर के भाव का सूचक है। प्रत्येक भारतीय परंपरावादी वैदिक संस्कृति के अनुरागी को इस विषय में हर्ष होना चाहिए।

लेखक – आर्य सागर

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti güncel giriş
Kolaybet Giriş
bettilt giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
bettilt giriş
Betgaranti
betgaranti
betgaranti giriş
kolaybet
onwin
onwin
bettilt giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
betkanyon
Betgaranti Giriş
holiganbet
holiganbet
sahabet
Kolaybet Giriş
Kolaybet Giriş
Kolaybet giriş
sahabet
sahabet
onwin
onwin
sahabet
sahabet
onwin giriş
onwin giriş
betgaranti giriş
holiganbet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
bettilt giriş
perabet giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
onwin giriş
sahabet giriş
bettilt giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
bettilt giriş
onwin giriş
sahabet giriş
betnano giriş
Kolaybet
kolaybet giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
bettilt giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
marsbahis giriş
marsbahis giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betorder giriş
betorder giriş
vdcasino giriş
vdcasino giriş
betorder giriş
betorder giriş