Categories
महत्वपूर्ण लेख समाज

स्वच्छ भारत का महादेव मेहतर, दक्ष भारत का शिल्पी कारीगर

सृष्टि के आदिकाल से ऋषि, महर्षि, मुनि, धर्माचार्य और विश्ववारा संस्कृति के महानायकों, लोकनायकों ने स्वच्छता और दक्षता को जीवन के प्रथम सोपान में रखा है। यही कारण था कि यज्ञ वै श्रेष्ठतम् कर्म:को आराध्य मानकर प्रत्येक मनुष्य यज्ञ से ही अपना कार्य प्रारंभ करता था। ऋषि एवं ऋषिकाओं ने मान रखा था कि संस्कृत, संस्कृति, संस्कार की रक्षा मात्र यज्ञ के द्वारा ही सुरक्षित एवं संरक्षित है। यज्ञ से पर्यावरण सुरक्षित, संरक्षित है, पर्यावरण के संरक्षण से ही संस्कृत, संस्कृति और संस्कार सुरक्षित है। महर्षियों की दृष्टि में यज्ञ से ज्ञान-विज्ञान, अनुसंधान भी सुरक्षित हैं। यज्ञ एक कर्मकाण्ड नहीं अपितु यह एक वैज्ञानिक क्रिया है। स्मृतिशेष डॉ. रामप्रकाश (पूर्व कैबिनेट मंत्री हरियाणा सरकार एवं पूर्व कुलपति गुरूकुल कांगडी विश्वविद्यालय हरिद्वार) की “यज्ञ विमर्श” रचित पुस्तक से इस वैज्ञानिक अनुसंधान को अध्ययन के द्वारा अच्छी प्रकार समझा जा सकता है। अतः महाभारत काल तक यह विधा अनवरत चलती रही। रामायण काल में भी जब स्वच्छता एवं दक्षता पर चोट की गई तब महर्षि विश्वामित्र ने दशरथनंदन श्रीराम और लक्ष्मण के माध्यम से इस स्वच्छता और दक्षता के अभियान को यज्ञ की विधा से पुनः जीवंत किया। महर्षि दयानंद भी लिखते हैं कि यज्ञोपरांत प्रत्येक मनुष्य अपनी-अपनी प्रतिभा से उद्यम के कार्य करें जिससे दक्षता बनी रहे। पुरुषार्थ के पराक्रमी और दक्षता के प्रथम सूत्रधार महर्षि विश्वकर्मा की शिल्प विद्या से समस्त भूमण्डल जगमगा रहा है। आज तो चन्द्र और मंगल के साथ-साथ सौर परिवार के मुखिया सूर्य पर सोलह लाख किलोमीटर की ऊँचाई पर आदित्य अंतरिक्ष यान परिक्रमण कर रहा है।

इसी स्वच्छता एवं दक्षता अभियान में हमारे ही भाई-बंधु जो काम कर रहे हैं वह बेजोड़ है। गाँव, क़स्बा, नगर, महानगर, प्रदेशों की राजधानी और भारत की राजधानी दिल्ली तक में इन्ही की दक्षता-स्वच्छता की श्रम साधना से हम संरक्षित है, लेकिन इनके मूल्य को आज जनमानस उपेक्षा की दृष्टि से देखता है। इनकी एक दिन की हड़ताल से भी हम एक सौ चालीस करोड़ संकट में आ जाते हैं। अतः ये हमारे वास्तविक संकट मोचक हैं।

आपको सुनकर अचम्भा होगा कि मुग़लकाल तक ये सभी लोग हमारी तरह ही, हमारे ही सगोत्री सहोदर थे। तलवार की धार के आगे भी ये लोग झुके नहीं, अपना वैदिक धर्म (सनातन) नहीं छोड़ा अर्थात् धर्म को भंग नहीं किया। आक्रान्ताओं की प्रत्येक यातना, प्रताड़ना को सहन किया, मैला तक ढोना स्वीकार किया, लेकिन धर्म को भंग नहीं होने दिया। इसी कारण ये लोग भंगी कहलाए, जिन्हें आज की लोकाचार की भाषा में मेहतर या हरिजन कहा जाता है। तलवार की धार पर जिन्होंने धर्म परिवर्तन किया आज उन्हें तो हम भाईजान या चचाजान कहकर सिराहना दे रहे हैं, और जिन्होंने स्वच्छता और दक्षता को स्वीकार कर यातनाओं को सदियों (शताब्दियों) से झेलते रहे उन्हें हम समाज में हिक़ारत (अशोभित) की दृष्टि से देखते हैं। आइए आज से इन्हें मान सम्मान दें तभी इस सनातन की रक्षा होगी। आज बहुत सारे सनातनी सनातन की गर्जना कर रहे हैं। गर्जना से काम नहीं चलेगा, भीड़ इकट्ठी करने से भी काम नहीं चलेगा, हम ससरे की ठठरी कर देंगे इस भाषा से ताली की गड़गड़ाहट से हँसाकर मनोरंजन तो कराया जा सकता है लेकिन भीड़ को संस्कारों से संलिप्त नहीं किया जा सकता।

आज से पूर्व महर्षि दयानन्द, ज्योतिबा फूले, स्वामी श्रद्धानन्द, डॉक्टर भीमराव रामजी अंबेडकर, चौधरी चरण सिंह और बाबू जगजीवन राम, कर्पूरी ठाकुर, पंडित लेखराम, महाशय राजपाल , लाला लाजपतराय, छत्रपति महाराज शिवाजी, महाराणा प्रताप, महाराजा सूरजमल, महाराजा रणजीत सिंह, गुरू गोविन्द सिंह, राजा महेंद्र प्रताप और आज के छत्रप मोदी, योगी ने इस सत्य सनातन की ओर विशिष्ट ध्यान दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तो उन्हें गंगा स्नान कराकर उनके चरणों को भी धोकर प्रेरणास्पद कार्य किया है। बहुत बड़े कवि स्मृतिशेष बलभद्र सिंह सुलभ की (२८.०६.१९६३) की मेहतर पर एक रचना है जिसका विमोचन राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने (१८.११.१९७३) किया। उस रचना को आपकी सेवा में, समय के साथ प्रेषित है। सनातन को बचाना है तो अवश्य चिंतन मनन करें।

कितने संभ्रान्त कुलीनों से भी, हो तुम लाख गुना बेहतर ।
ओ मेरे प्यारे भइया जमादार, ओ अलबेले भइया मेहतर ।।

माना तुम को कुछ तंगी है, उनकी हालत कुछ चंगी है ।
पर तुम तो तन से ही भंगी, वे तो मन से भी भंगी हैं ।।

दुनिया का तो दस्तूर यही, है जितनी ही ज़्यादा जिसमें-
क्षमता कूड़ा कर सकने की, गंदगी आदि फैलाने की।
माना जाता है आँख मूंद, उतना ही बड़ा आदमी वह
गंदगी की साफ़ करने वाला, मेहतर भंगी कहलाता है ।।

वे नीच नहीं है तो क्या है, जिनकी बन गई धारणा यह ।
मोरी के कीडों जैसी ही, आदत पड़ गयी तुम्हारी भी ।।

जन्म से नाबदानों में ही, करते करते बस यही काम ।
क्या यही तुम्हारा जीवन है, क्या यही तुम्हारा सब कुछ है।।

शायद यह नहीं कदापि नहीं, शायद औरों की जैसी ही ।
अलबेली मस्त तुम्हारी भी, अपनी कोई दुनियाँ होगी,
छोटी मोटी खुशियाँ होंगी ।।

क्या वे भी हैं मनुष्य, जो धर लेते हैं अपनी नाकों पर।
रूमाल देखते ही तुमको, परछाई से भी कटते जो ।

पर इतना सब कुछ भी तुमको, रत्ती पर भर नहीं सालता है ।
यह तो मन की विशालता है, ख़ुद की भी परवाह न कर ।।

अपनी सेवाओं के बल पर,औरों को रखते साफ़ सुथर ।
सच पूछा जाए तो भइया, कोरी सहानभूति नही,
तुम श्रद्धा के अधिकारी हो, तुम आदर के अधिकारी हो ।।

है हमें तरस आता उन पर, तुमसे जो दूर बिदकते हैं ।
विष्टा करांछते फिरते जो, उनको भी फूल महकते हैं ।।

तुम असली रोग निवारक हो, तुम दुखों के हो त्राता ।
पर्यावरण की औषध हो, तुम ही सच्चे हो भ्राता।

शुभेच्छु
गजेंद्र सिंह आर्य (वेदिक प्रवक्ता, पूर्व प्राचार्य)
धर्माचार्य जेपी विश्वविद्यालय, अनूपशहर
बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश)
चल दूरभाष – ९७८३८९७५११

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betsat giriş
betsat giriş
betgaranti giriş
betgaranti yeni giriş
betsat giriş
betsat giriş
superbetin giriş
betgaranti giriş
superbetin giriş
vdcasino giriş
superbetin giriş
superbetin giriş
vdcasino giriş
bettilt giriş
betsat giriş
betsat giriş
betpark giriş
betpark giriş
nesinecasino giriş
nesinecasino giriş
cratosroyalbet giriş
cratosroyalbet giriş
betgaranti giriş
jojobet giriş
betgaranti mobil giriş
klasbahis
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vdcasino giriş