प्रयागराज, तीर्थराज और त्रिवेणी संगम की वास्तविकता, भाग – 3

triveni sangam
महाकुंभ को लेकर ज्योतिष पीठाधीश्वर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को शास्त्रार्थ की खुली चुनौती

‌ ‌ ‌ द्वितीय किस्त में हमने योग ऋषि पतंजलि महाराज के द्वारा रचित योग दर्शन के माध्यम से मोक्ष की प्राप्ति के विषय में संक्षेप में लिखा था। इसके अतिरिक्त वैशेषिक सूत्र ( १ -१- ४ ) में ‘धर्मविशेषप्रसूत’ पद के शब्द ‘धर्म विशेष ‘का अर्थ योगजधर्म है। योग प्रतिपादित उपाय से आत्मा में जो एक विशिष्ट सामर्थ्य आविर्भूत हो जाता है , वह योगज धर्म है । सूत्र में उसी को धर्म विशेष कहा है । इसी के द्वारा समस्त पदार्थ का वास्तविक साक्षात्कार होता है। उसी को सूत्र में इन पदों में कहा है :-

“धर्मविशेष प्रसूतात – तत्वज्ञानात निश्रेयसम्”

अर्थात उस धर्म विशेष से उत्पन्न तत्वज्ञान से नि: श्रेयस अर्थात मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस प्रकार हम देखते हैं कि इसमें भी तत्वज्ञान के लिए योग उपायों का अनुष्ठान का संकेत उपलब्ध है,। स्पष्ट लिखा है कि यदि मोक्ष चाहते हो तो योग में जाना ही पड़ेगा। सांख्य दर्शन में प्रकृति और पुरुष के भेद का ज्ञान बता दिया है। तृतीय अध्याय के 23 से लेकर 36 तक के सूत्रों में ज्ञान से मुक्ति की प्राप्ति का विवरण दिया गया है। इसमें भी ज्ञान के उपाय रूप से वृत्तिनिरोध ,आसन, धारणा ,ध्यान, अभ्यास, वैराग्य आदि का उल्लेख किया गया है। इनके प्रयोग का विवरण ‘ योग दर्शन ‘ में ही उपलब्ध नहीं है बल्कि सांख्य दर्शन काल की दृष्टि से और भी प्राचीन पुस्तक है। महर्षि पतंजलि द्वारा कृत ‘योग दर्शन’ उसकी अपेक्षा नवीन रचना है। परंतु पतंजलि मुनि ने इन उपायों का अनुशासन किया है। ‌‌ ‌ ‌ ‌ उदाहरण के तौर पर और देखिए। न्याय आदि अन्य दर्शनों के समान वेदांत दर्शन भी योग के समाधि हेतु विधानों को अंगीकार करता है । ब्रह्मसूत्रों ( ४ / ७ / ७ / ११ ) में चित्- वृत्ति -निरोध के लिए आसन, प्राणायाम ,ध्यान, एकाग्रता, आदि उन उपायों का संकेत है। जिनका विधान योग शास्त्र में किया गया। योग विधानों का विरोध ब्रह्मसूत्र में भी कहीं नहीं है। ‌

लेकिन हमारे पौराणिक संत हैं कि जो गंगाजल में डुबकी लगाने से मोक्ष की बात जनता को बता कर भरमाते हैं। सारे वैदिक वांग्मय ,आर्ष साहित्य, वेदों , उपनिषदों, दर्शनों को उपेक्षित कर देते हैं। जबकि भारतीय चिंतन में ही नहीं मानव चिंतन में भी उपनिषदों का चिंतन उल्लेखनीय स्थान रखता है। उपनिषदें भारतीयों और आर्यो के आध्यात्मिक चिंतन के विश्वसनीय स्रोत हैं। वेदों के पश्चात प्रमाणिक माने जाने वाले ग्रंथों में उपनिषद शीर्ष पर हैं। परंतु पौराणिक साधु सन्यासियों की बुद्धि पर पर्दा पड़ा हुआ है। ये एक ऐसे ड्राइवर हैं जो गलती से गाड़ी के स्टीयरिंग पर बैठा दिए गए हैं। मानो किसी गलत, अज्ञानी,अनाड़ी व्यक्ति के हाथ में स्टीयरिंग दिया हुआ होता है। ये खुद तो गड्ढे में गिरेंगे ही अपने पीछे अनुगमन करने वाले अर्थात गाड़ी बैठे हुए लोगों को भी निश्चित रूप से गहरे गर्त में धकेल देंगे । ये मोक्ष तो क्या दिलाएंगे यह पाप में डुबो देंगे। ‌

जबकि एक मनुष्य शक्ति का केंद्र है और वह शक्ति उसी के भीतर निहित है। इन शक्तियों का विकास करने का एकमात्र उचित उपाय उचित शिक्षा है और एक मनुष्य यदि जीवन में सफलता चाहता है तो उसे अपनी आंतरिक शक्तियों का विकास करना ही होगा। इस आंतरिक शक्ति विकास का नाम ही अध्यात्म है। अध्यात्म हमारी आंतरिक शक्तियों का जागरण है। हमें भीतर से संबल देता है। परमपिता परमेश्वर से मिलने की शक्ति प्रदान करता है । आत्मा का परमात्मा से योग कराता है। हमें संसार की कीचड़ में रहकर भी कमल की भांति खिलते रहने की सात्विक प्रेरणा देता है। अध्यात्म की नगरी आनंद की नगरी है उसमें प्रत्येक प्रकार का छल और पाखंड शांत हो जाता है। प्रत्येक प्रकार का उपद्रव और उग्रवाद शांत हो जाता है। प्रत्येक प्रकार का उत्पात शांत हो जाता है। व्यक्ति प्रत्येक प्रकार की भ्रांति से मुक्त हो जाता है। यह आध्यात्मिक जीवन ही धार्मिक जीवन है संसार में मनुष्य को इसी धार्मिक जीवन की प्राप्ति कर मोक्ष की ओर बढ़ना चाहिए। परंतु ध्यान रहे कि धार्मिक जीवन की प्राप्ति भी योग से होती है। साधना, तप और त्याग से होती है।

योग कर्म में कुशलता का नाम है। जैसा कि गीता में कहा गया’ योग: कर्मसु कौशलम ‘ महर्षि पतंजलि ने तप स्वाध्याय और ईश्वर भक्ति करने से ही योग की सिद्धियां प्राप्त होने के विषय में लिखा है। इनमें सबसे पहले तप है। तप व्रत अनुष्ठान को कहते हैं। व्रत का अर्थ होता है कर्तव्य, प्रतिज्ञा, संकल्प ।लेकिन महर्षि दयानंद ने इसका अर्थ इच्छा भी कहा है। ‌‌ मोक्ष प्राप्ति करने वाले, इच्छा रखने वाले मनुष्य का प्रथम कर्तव्य है कि ईश्वर के प्रति अपने हृदय को आस्तिकता के भाव से भरना होगा, उसका दूसरा कर्तव्य है कि ईश्वर के दिए हुए पदार्थ का भोग करें। परंतु इनको ईश्वर का दिया हुआ समझकर ही भोग करें। अमुक पदार्थ मेरा है – यह नहीं होना चाहिए। तीसरा कर्तव्य है कि अपने चारों तरफ शांति का वातावरण उत्पन्न करना चाहिए। बिना शांति के वातावरण के उत्पन्न किये संसार का कोई भी काम पूरा नहीं होता। चौथा कर्तव्य है कि मनुष्य को कर्म करते हुए 100 वर्ष के जीने की इच्छा करनी चाहिए। परंतु कर्म ऐसे करने चाहिए कि उसमें लिप्त न हो, उसमें फंसे ना। उपनिषद में इस विषय में बहुत ही स्पष्ट कहा है कि मनुष्य को जीवित रहने के लिए इस कर्म योग के सिवा और कोई दूसरा मार्ग नहीं है । मनुष्य को निरंतर कर्म करने का अभ्यासी होना चाहिए और वह कर्म कर्ता को फंसाने वाले ना हो,यह दो शर्तें हैं।

पांचवा कर्तव्य है कि अपनी आत्मा के विपरीत, प्रतिकूल कार्य को न करें। यह दर्शनों की स्पष्ट शिक्षा है। परंतु दर्शनों की बात छोड़कर कपोल कल्पित बातों के आधार पर मोक्ष प्राप्त कराने की बात करने वाले उन साधु संतों से क्या अपेक्षा की जा सकती है जिनका मुख्य कर्म जनता को भ्रांतियों और पाखंडों से मुक्त करना है, परंतु जो स्वयं ही अज्ञानी होकर पाखंड और अंधविश्वासों में फंसे हुए हैं ? भगवा बाना धारण करने का अभिप्राय है – सबको परिपक्व सात्विक सोच से ओतप्रोत कर देना सबको साधुता के भावों से भर देना। सबकी वृत्तियों को सतोगुणी बना देना। सबको सात्विक आनंद में जीने का अभ्यासी बना देना। सर्व कल्याण ही इस भगवा चोले का उद्देश्य है। व्यष्टि से समष्टि तक क्रांति का सूत्रपात करना और उस क्रांति को जीवन का संगीत बनाकर ग्रहों के बीच में काम करने वाले गुरुत्वाकर्षण बल की भांति उसे प्रेम का स्रोत बनाकर सबके आकर्षण का केंद्र बना देना, इनके जीवन की साधना है। जीवन का लक्ष्य है । क्या सनातन की रक्षा के लिए कहीं ऐसा कुछ दिखाई दे रहा है ?

जीवन की सुंदर पगडंडी को,
कुछ मैं साफ करूं कुछ तू भी कर ।
मिलजुल कर आगे बढ़ने का,
कुछ मैं जतन करूं कुछ तू भी कर ।।

‌ (ईशोपनिषद के आधार पर लिखा गया है) ‌‌

– देवेंद्र सिंह आर्य
ग्रेटर नोएडा 9811838317

Comment:

Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
savoybetting giriş
ikimisli giriş
romabet giriş
betebet giriş
betpipo giriş
limanbet giriş
betebet giriş
betnano giriş
betebet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
ikimisli giriş
rekorbet giriş
betlike giriş
ikimisli giriş
romabet giriş
romabet giriş
betpipo giriş
betpipo giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
romabet giriş
romabet giriş
vaycasino giriş
nesinecasino giriş
nesinecasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betpipo giriş
Betgaranti
betebet giriş
betebet giriş
nesinecasino giriş