भारतीय गणतंत्र के नए संकल्प

भारत की वायु सेना

– ललित गर्ग

गणतंत्र दिवस हमारा राष्ट्रीय पर्व है, इसी दिन 26 जनवरी, 1950 को हमारी संसद ने भारतीय संविधान को पास किया। इस दिन भारत एक संप्रभु, समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक गणराज्य बना। इसने ब्रिटिश शासन के भारत सरकार अधिनियम 1935 को पूरी तरह खत्म कर दिया और अपना स्वतंत्र संविधान इसी दिन लागू किया। इस वर्ष 76वें गणतंत्र दिवस समारोह में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबिआंतो मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। यह उनके राष्ट्रपति पद संभालने के बाद भारत की पहली आधिकारिक यात्रा होगी, जो दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करेगी। इस वर्ष की थीम ‘स्वर्णिम भारत- विकास के साथ विरासत’ है। यह थीम देश की विरासत को संभालते हुए भारत की प्रगति की यात्रा को दर्शाती है। किसानों, शिक्षकों, न्यायविदों, मजदूरों, वैज्ञानिकों, उद्योगपतियों, व्यापारियों और इंजीनियरों की विविध भूमिकाओं की सामूहिक शक्ति हमारे देश को ‘जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान’ की भावना के अनुरूप आगे बढ़ने में सक्षम बना रही है।

इस बार गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के साथ-साथ पूरे भारत से कई ऐसे लोगों को भी आमंत्रित किया जा रहा है जिन्होंने अपने गांव, समाज एवं राष्ट्रमें विकास के क्षेत्र में बेहतरीन कार्य किया है, इस तरह इस बार गणतंत्र दिवस समारोह ऐसे अनेक नये प्रयोगों एवं प्रदर्शनों का साक्षी बन रहा है।भारतीय संविधान दुनिया का सबसे विशिष्ट संविधान माना जाता है। भारत की संविधान सभा ने दुनिया के सभी संविधानों का अध्ययन किया और हर संविधान के विशिष्ट प्रावधानों को अपने संविधान में शामिल किया। नागरिक स्वतंत्रता के जितने अधिकार भारतीय संविधान में हैं उतने दुनिया के किसी अन्य संविधान में नहीं।

भारतीय संविधान की दूसरी विशेषता संविधान की विशालता एवं समग्रता है। भारतीय संविधान में धर्मनिरपेक्षता का प्रावधान तो है लेकिन इसमें प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्मानुसार आचरण करने की पूरी स्वतंत्रता है। इसमें नागरिकों के अधिकार और कर्तव्य की स्पष्ट विवेचना है। इसमें संघात्मकता भी है और एकात्मकता भी है। भारतीय संविधान में सत्ता चयन के लिये संसदीय प्रणाली को सुनिश्चित किया है तथा संचालन के लिये विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका जैसे तीन अंग सुनिश्चित किये। भारतीय संविधान में केंद्र और राज्य सरकार के बीच विषयों और कार्यों का स्पष्ट विभाजन है। केन्द्र सरकार को कुछ आपात अधिकार भी दिये गये हैं जिससे वह केन्द्र राज्य में हस्तक्षेप कर सकता है। इतने अनूठे, विलक्षण एवं समग्र संविधान के बावजूद छिहत्तर वर्षों में हमारा गणतंत्र कितनी ही कंटीली झाड़ियों में फँसा रहा। लेकिन अब इन राष्ट्रीय पर्वों को मनाते हुए संप्रभुता का अहसास होने लगा है। गणतंत्र का जब हम जश्न मनाते हैं, तो उसमें कुछ कर गुजरने की तमन्ना भी जागती है तो अब तक कुछ न कर पाने की बेचैनी भी दिखती है।

हमारी जागती आंखो से देखे गये स्वप्नों को आकार देने का विश्वास मुखर होता है तो जीवन मूल्यों को सुरक्षित करने एवं नया भारत निर्मित करने की तीव्र तैयारी सामने आती है। अब होने लगा है हमारी स्व-चेतना, राष्ट्रीयता एवं स्व-पहचान का अहसास। जिसमें आकार लेते वैयक्तिक, सामुदायिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, धार्मिक, राष्ट्रीय एवं वैश्विक अर्थ की सुनहरी छटाएं हैं।राष्ट्रीय पर्व गणतंत्र दिवस हमारी उन सफलताओं की ओर इशारा करता है जो इतनी लंबी अवधि के दौरान अब जी-तोड़ प्रयासों के फलस्वरूप मिलने लगी हैं। यह हमारी विफलताओं पर भी रोशनी डालता है कि हम नाकाम रहे तो आखिर क्यों! क्यों हम राष्ट्रीय एकता और अखण्डता को सुदृढ़ता नहीं दे पाये हैं? क्यों गणतंत्र के सूरज को राजनीतिक अपराधों, घोटालों और भ्रष्टाचार के बादलों ने घेरे रखा है? यह सही है और इसके लिए सर्वप्रथम जिस इच्छा-शक्ति की आवश्यकता है, वह हमारी शासन-व्यवस्था एवं शासन नायकों में सर्वात्मना नजर आनी चाहिए और ऐसा होने लगा है तो यह सुखद अहसास है।

बावजूद अभी भी देश की राजनीति अनेक विसंगतियों एवं विडम्बनाओं से घिरी है। यह विडंबना है कि आजादी की हीरक जयंती मना चुके देश में मतदाता को हम इतना जागरूक नहीं बना पाए कि वो अपने विवेक से मतदान कर सके। निस्संदेह, यदि देश में गरीबी और आर्थिक असमानता है तो हमारे नीति-नियंताओं की विफलता ही है। लेकिन हम में कम से कम इतना राष्ट्र प्रेम तो होना चाहिए कि निहित स्वार्थों के लिये हम राष्ट्रीय हितों की बलि न चढ़ाएं। दिल्ली के चुनाव में मुफ्त-मुफ्त का जो खेल विधानसभा चुनाव प्रक्रिया के दौरान चल रहा है, तीनों प्रमुख रजनीतिक दल नित नये राजनीतिक प्रलोभन देकर मतदाताओं को अपने पाले में लाने के प्रयास में जुटे हैं।एक संकल्प लाखों संकल्पों का उजाला बांट सकता है यदि दृढ़-संकल्प लेने का साहसिक प्रयत्न कोई शुरु करे। अंधेरों, अवरोधों एवं अक्षमताओं से संघर्ष करने की एक सार्थक मुहिम हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में वर्ष 2014 में शुरू हुई थी। उनके तीसरे प्रधानमंत्री के कार्यकाल में सुखद एवं उपलब्धिभरी प्रतिध्वनियां सुनाई दे रही है, कुछ समय पूर्व हमने मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम के मन्दिर के शिलान्यास का दृश्य देखा। काशी में विश्वनाथ धाम का जो विकास हुआ है, उसे देखा।

इन दिनों प्रयागराज में महाकुंभ का दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक अनुष्ठान होते हुए हम देख रहे हैं। मोदी ने अपने अब तक के कार्यकाल में जता दिया है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति वाली सरकार अपने फैसलों से कैसे देश की दशा-दिशा बदल सकती है। कैसे देश को दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर किया जा सकता है। कैसे राष्ट्र की सीमाओं को सुरक्षित रखते हुए पडौसी देशों को चेता सकती है, कैसे दुनिया की महाशक्तियों के बीच भी अडिग खड़ी रह सकती है? कैसे स्व-संस्कृति एवं मूल्यों को बल दिया जा सकता है।

गणतंत्र दिवस समारोह मनाते हुए भारत में धर्मस्थलों और तीर्थों के विकास की किसी भी पहल की भी प्रशंसा होनी ही चाहिए। महाकुंभ की एक चमत्कारपूर्ण एवं विलक्षण आभा सामने आयी है, जो हमे गर्वित कर रही है।भारत के गणतंत्र में और भी चार-चांद लग रहे हैं, जैसे प्रयागराज हो, काशी हो या अयोध्या या ऐसे ही धार्मिक एवं सांस्कृतिक क्रांति के परिदृश्य- ये अजूबे एवं चौंकाने वाले लगते हैं। इन परिदृश्यों को केवल चुनावी नफा-नुकसान के नजरिये से नहीं देखना चाहिए, बल्कि एक सशक्त होते राष्ट्र के नजरिये से देखा जाना चाहिए। सदियों की गुलामी के चलते भारत को जिस हीनभावना से भर दिया गया था, आज का भारत उससे बाहर निकल रहा है। यह स्थिति इस वर्ष का गणतंत्र दिवस समारोह मनाते हुए विशेष रूप से गौरवान्वित करेंगी। वाकई यहां अब कोई संदेह शेष नहीं है कि मोदी सरकार देश व समाज को बदल रही है, लोगों का जीवनस्तर उन्नत कर रही है।धार्मिक स्थलों को भव्य रूप ही नहीं दिया जा रहा है बल्कि उनसे देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनाया जा रहा है।

इतना ही नहीं, सीमाओं की सुरक्षा भी बेखूबी हो रही है, समुंदर में हजारों किलोमीटर ऑप्टिकल फाइबर भी बिछाया जा रहा है, हर जिले में मेडिकल कॉलेज भी बनाये जा रहे हैं, उन्नत सड़कों का जाल बिछ रहा है, गरीबों को पक्के मकान भी बनाकर दिये जा रहे हैं, रोजगार, पर्यावरण-सुरक्षा, चिकित्सा, शिक्षा की अनूठी व्यवस्थाएं भी हो रही है। मतलब वर्तमान शासन-नायकों को विरासत और विकास की समन्वित चिंता है। हिंदुत्व की चिंता है, तो विकास की भी पूरी फिक्र है। अब सुधार, सुशासन, स्व-संस्कृति, स्व-पहचान के दीपक जल उठे हैं, तो उसकी रोशनी तमाम देशवासियों को नया विश्वास, नया आश्वास, नया विकास एवं सुखद जीवनशैली दे रही है।भारत के संवैधानिक एवं संप्रभुता सम्पन्न राष्ट्र बनने की 76वीं वर्षगांठ मनाते हुए हम अब वास्तविक भारतीयता का स्वाद चखने लगे हैं, आतंकवाद, नक्सलवाद, जातिवाद, क्षेत्रीयवाद, अलगाववाद की कालिमा धूल रही है, धर्म, भाषा, वर्ग, वर्ण और दलीय स्वार्थों के राजनीतिक विवादों पर भी नियंत्रण हो रहा है। इन नवनिर्माण के पदचिन्हों को स्थापित करते हुए हम प्रधानमंत्री के मुख से नये भारत-सशक्त भारत-विकसित भारत को आकार लेने के संकल्पों की बात सुनते हैं। गणतंत्र दिवस का उत्सव मनाते हुए यही कामना है कि पुरुषार्थ के हाथों भाग्य बदलने का गहरा आत्मविश्वास सुरक्षा पाये। एक के लिए सब, सबके लिए एक की विकास गंगा प्रवहमान हो।

Comment:

kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
kolaybet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
madridbet giriş
madridbet giriş
betpipo giriş
betpipo giriş
betyap giriş
betyap giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
madridbet giriş
madridbet giriş
artemisbet giriş
artemisbet giriş
betpas giriş
milanobet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
betgaranti giriş
hititbet giriş
betgaranti giriş
artemisbet giriş
betvole giriş
betvole giriş
pusulabet giriş
betnano giriş
pusulabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
superbet giriş
vaycasino giriş
betparibu giriş
betparibu giriş
betgaranti giriş
kolaybet giriş
parmabet giriş
parmabet giriş
betpark giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
winxbet giriş
norabahis giriş
norabahis giriş
meritbet giriş
meritbet giriş