वैदिक सम्पत्ति 260 – आर्य वस्त्र और वेशभूषा

arya sabhyata

(ये लेखमाला हम पं. रघुनंदन शर्मा जी की ‘वैदिक सम्पत्ति’ नामक पुस्तक के आधार पर सुधि पाठकों के लिए प्रस्तुत कर रहें हैं)

गताक से आगे ..

वर्तमान समय में वस्त्रों के अनेकों तर्ज और फैशनों से भले आदमी कहलानेवाले गृहस्थों को कितना कष्ट हो रहा है, यह किसी समझदार आदमी से छिपा नहीं है। साल की सारी कमाई कपड़ों में ही जाती है, तब भी पोशाक में कमी बनी रहती है। एक एक मनुष्य गृहस्य के घर में एक एक आदमी के लिए चार चार छै छै सन्दुक कपड़े रक्खे हुए हैं और उनको सारा दिन उन्हीं के बदलने में व्यतीत होता है। अतएव मनुष्य के लिए उतने और उसी प्रकार के वस्त्र होने चाहिए जिनको यह रक्षा और पर्दा के लिए खुद ही तैयार करले। इस दृष्टि से भी धोती और चादर का ही महत्व समझ में आता है। इस समय लहेंगा, पाजामा, पतलून और कुरता, कोट, कमीज तथा चुगा आदि जितने सिले हुए वस्त्र पाये जाते हैं, सब उन्हीं धोती चादर के ही रूपान्तर हैं। घोती से तहमत और लहंगा बना है और इन्हीं दोनों के मेल से डीला पाजमा, पाजामा, पतलून और जोधपुरी आदि बनी हैं। इसी तरह चादर से कफनी, (जिसको बीच में फाड़ कर गले में डाल लेते हैं), कफनी से कुरता और कुरता से कोट और चुगा आदि बने हैं। इसी तरह शिर के केशों से साफा की और साफा से टोपी की सृष्टि हुई है। प्राचीन मौलिक आर्य सभ्यता की पोशाक में नीचे घोती, शरीर में चादर का ओढ़ना, शिर पर केशों का मुकुट और गले में फूलों की माला है। यही फैशन सुविधाजनक भी है। किन्तु आजकल की पोशाक के कारण जरा सा कीचड़ हो जाने पर, नदी उतरते समय, लगी हुई आग को बुझाते समय अथवा और किसी दौड़ धूप के समय बड़ी ही दुर्दशा होती है। परन्तु धोती चादर में यह असुविधा नहीं है।

आर्य सभ्यता में कैशों का भी बड़ा महात्म्य है। बाल वृद्धादि असमर्थों के अतिरिक्त किसी भी आर्य को केश कटाने की आज्ञा नहीं है। बाल्यकाल में जब लड़का असमर्थ होता है, तब उसका मुण्डन कर दिया जाता है और जब अत्यन्त वृद्ध होकर अथवा शरीर रोगी होकर असमर्थ हो जाता है, तब भी मुण्डित करने की आज्ञा है। संन्यासियों का मुण्डन इसी दशा का सूचक है। इन दशाओं के अतिरिक्त आर्यों को सदैव दाड़ी, मूंछ और शिर के केशों की रक्षा करनी चाहिये । इस कठिन नियम का यह कारण है कि बालों में विद्युतग्रहण करने की अद्भुत शक्ति है। इस शक्ति के सहारे केशों के द्वारा द्यौ-तत्व मनुष्य के मस्तिष्क में ज्ञानतन्तुओं को बल पहुंचाता है। वेद में लिखा है कि ‘बृह- स्पतिः प्रथमः सूर्यायै शीर्षे केशमकल्पयत्’ अर्थात् ज्ञानाघिष्ठान बृहस्पति- आकाश-ने पहिले ही सूर्या के द्वारा शिर में केशों को उत्पन्न किया। इससे ज्ञात होता है कि ज्ञान और सूर्य का केशों के साथ अपूर्व सम्बन्ध है। क्योंकि रंग सूर्य से उत्पन्न होता है और मनुष्यशरीर के केश अपना रंग चार बार पलटते हैं।

बाल्यकाल में जब ज्ञान ग्रहण करने की शक्ति नहीं होती, तब बालक के बालों का रंग पीत लाल होता है और जब वृद्धावस्था में ज्ञान ग्रहण करने की शक्ति नहीं रह जाती, तब बालों का रंग सफेद हो जाता है। किन्तु युवावस्था में जब ज्ञान ग्रहण करने की शक्ति पूर्ण रूप से विद्यमान रहती है, तब बालों का रंग काला रहता है। काले रंग में सूर्य की किरणों का प्रभाव विशेष पड़ता है, इसीलिए काले केशवाले युवा मनुष्य ही ज्ञान ग्रहण करने की शक्ति भी रखते हैं। यह बालों के रङ्गों का परिवर्तन केवल मनुष्यों में ही देखा जाता है, पशुपक्षियों में नहीं । इससे और भी अधिक स्पष्ट हो जाता है कि, असमर्थ दशा को छोड़कर अन्य समस्त दशाओं में केशों को धारण ही किये रहना चाहिये । इसीलिए कहा गया है कि ‘जटिलो मुण्डितो वा’ अर्थात् चाहे समरत केश रक्खे और चाहे मुंडवा दे। तात्पर्य यह कि जो समर्थ हैं, वे रक्खें और जो असमर्थ हैं, वे निकलवा दें। निकलवा देना बाल, वृद्ध और रोगियों के ही लिए है। क्योंकि वेद में ब्रह्मचारी, गृहस्थ और वानप्रस्थी आदि सभी स्त्री पुरुषों के लिए केश रखने का उप- देश किया गया है। ब्रह्मचारी के लिए अथर्ववेद १११५/६ में लिखा है कि-

‘ब्रह्मचाय्यति समिधा समिद्धः काषर्ण वसानो दीक्षितो दीर्घश्मक्षुः ।

इसमें ब्रह्मचारी को दीर्घ श्मश्रुवाला अर्थात् बड़े बड़े डाड़ी मूछोंवाला कहा गया है। ब्रह्मचारी के लिए दूसरी जगह स्पष्ट लिखा है कि ‘क्षुरकृत्य वर्जय’ अर्थात् ब्रह्मचारी को बाल बनवाना मना है। जिस प्रकार ब्रह्मचारी के लिए बाल बनवाना मना है, उसी तरह गृहस्थ के लिए भी मना है।

क्रमशः

प्रस्तुतिः देवेन्द्र सिंह आर्य
(चेयरमैन ‘उगता भारत’)

Comment:

betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
holiganbet güncel giriş
holiganbet güncel
holiganbet giriş
bettilt giriş
betpark giriş
klasbahis giriş
klasbahis giriş
holiganbet güncel
imajbet güncel
holiganbet güncel giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
bettilt giriş
betpark giriş
casinolevant giriş
casinolevant giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betyap güncel
betpark giriş
betpark giriş
betyap giriş
betpark giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
vaycasino giriş
bettilt giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
casinolevant giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpuan giriş
betpuan giriş
matbet giriş
matbet giriş
betpuan giriş
betpuan giriş
matbet giriş
matbet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
sahabet giriş
holiganbet giriş