सूरजपुर मखैना की कोठी का प्रांगण, कभी था स्वाधीनता का समरांगण

Oplus_131072

भारत में सर्वत्र इतिहास बिखरा पड़ा है। खोजी नजरें जब उस पर पड़ती हैं तो जैसे सोने की खान में मिट्टी के हर कण में से सोना तलाश लेने वाली नजरें सोना निकाल लेती हैं, वैसे ही अनुसंधान और तार्किक दृष्टिकोण वाले विद्वज्जन इतिहास को खोज लिया करते हैं। जलालपुर ग्राम पंचायत सूरजपुर मखैना की मिट्टी भी इतिहास के क्षेत्र में सोने की खान है। इतिहास के कई अनछुए तथ्यों को अपने अंक में समा लेने वाली इस गांव की मिट्टी से यदि वार्तालाप करके देखोगे तो कई रहस्यों से पर्दा उठता चला जाएगा। कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आएंगे। इन्हीं पर चर्चा कर रहे हैं, आर्य जगत के सुप्रसिद्ध विद्वान प्राचार्य गजेंद्र सिंह आर्य जी……

राष्ट्र का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम १८५७ अपने यौवन को स्वतंत्रता आंदोलन की प्रचण्ड ज्वाला की भट्टी में झौंक चुका था। तब राष्ट्र के रणबाँकुरे बलिदानी अपनी मातृभूमि की गोद में सो चुके थे। उस समय राष्ट्र ज्वाला की चिंगारी को पुनः प्रज्वलित करने को कालजयी ग्रंथ सत्यार्थ प्रकाश की रचना कर रचयिता महर्षि दयानन्द सरस्वती ने ऐसा शंखनाद किया कि राष्ट्र में अनेकानेक राष्ट्रभक्त गरम दल और नरम दल के रूप में पुनः खड़े हो गए और अपनी मातृभूमि की बेड़ियों को काटने के लिए बलिवेदी पर हँसते-हँसते फाँसी के फंदों को अपना हार बनाकर चूमते थे।

यहीं क्रांति धीरे-धीरे समूचे राष्ट्र की चेतना बन गई। इसी श्रृंखला में हमारे जलालपुर ग्राम पंचायत सूरजपुर मखैना में जन्मे स्व. पंडित देवदत्त शर्मा अधिवक्ता ने भी अपनी पहिचान प्रदेश एवं राष्ट्र स्तर पर बना चुके थे। कांग्रेस पार्टी में एक बड़ी पहचान थे। उस समय स्वाधीनता आंदोलन में और कांग्रेस के जलसों में भाग लेना एक गर्व की बात मानी जाती थी। पंडित देवदत्त शर्मा ने अपने गाँव के साथ-साथ स्वाधीनता आंदोलन का बीजारोपण क्षेत्र के गाँव-गाँव, घर-घर में कर चुके थे। इसी बढ़ते प्रभाव को देखकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी १९३६ में अनूपशहर गंगनहर की सूरजपुर मखैना सिंचाई विभाग की कोठी पर आए और उन्होंने अपने भाषण में जो मुख्य बात कही कि घर-घर कार्यकर्ताओं को बनाओ और तिरंगा झंडे को फहराओ। राष्ट्र प्रेम के प्रति यही आपकी शक्ति और भक्ति है। इसी प्रकार इस कोठी पर १९३९-१९४२ में क्रमशः देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू और पंडित गोविंद बल्लभ पंत ने भी आकर जनता को संबोधित कर स्वाधीनता आंदोलन को नई दिशा दी थी। उस समय १९४२ के करो और मरो के आंदोलन में हमारे गाँव के अधिकांश परिवारों ने बढ़ चढ़कर भाग लिया।

जिस समय हमारे गाँव में संभवतः बीस घर होंगे मेरे स्वयं के पिताश्री स्व. फतेह सिंह और गाँव के समकालीन बुजुर्ग (वृद्धजन) बताते थे कि प्रत्येक घर से एक आदमी स्वाधीनता आंदोलन के जलसा में भाग लेने जाता था। कई बार गिरफ्तार कर छोड़ दिया जाता था। मेरी स्वयं की माता स्व. श्रीमती चमेली देवी बताती थी कि हम स्वाधीनता आंदोलन के बैनर और झंडों को बड़ा छिपाकर रखती थीं। घर की तलाशी ली जाती थी तो पुलिस वाले और जमींदार परेशान करते थे। हमें कई बार आजादी के बैनर और झंडे बुर्जी और बिटोरा, लकड़ी के ढेरों में छिपाने पड़ते थे। कई बार जेल भेजने की धमकी देते थे क्योंकि बैनर और झंडे अधिकांशतः हमारे ही घर रखे रहते थे। जिसके कारण पुलिस की दृष्टि में हमारा परिवार स्वाधीनता आन्दोलन को अत्यधिक प्रेरित करने की श्रेणी में था। पुलिस की सूचना लगने पर कई बार घर छोड़कर खेतों में छिपना पड़ता था। ऐसी कठोर यातनाओं से घर की महिलाओं को गुजरना पड़ता था।

यह कोठी बड़े-बड़े नेताओं गांधी, नेहरू और गोविंद बल्लभ पंत जी के आने से स्वाधीनता आंदोलन का केंद्र बन चुकी थी। ब्रिटिश हुकूमत की चहल कदमी इतनी बढ़ चुकी थी कि कोठी की ओर कोई खड़े होकर देख भी नहीं सकता था। आज वही कोठी जर्जर हो चुकी है आज से पचास वर्ष पहले अच्छी देख रेख थी। वर्तमान में सरकार की अनदेखी और शिथिलता के कारण, असामाजिक तत्वों द्वारा उसके दरवाजे खिड़कियां इत्यादि चोरी कर लिए गए हैं। पचास बीघे के आस पास प्रांगण है जो कभी स्वाधीनता का समरांगण था। १९७० तक भी उस समय कोठी में भव्यता और दिव्यता थी। प्रांगण में गुलाब, गुलदाउदी, रात-रानी, गुड़हल, चाँदनी, मोरपंखड़ी आदि की कतारें आकर्षण का केंद्र थी। हम स्वयं अपने मिलने वालों रिश्तेदारों को कोठी के पार्क में घुमाने ले जाते थे। इस रमणीय स्थल को देखकर लोग कहते थे कि आपके यहाँ तो गुलाब बाग है। कोठी के पास ही पानी की छ: चक्की थी। अनाज पिसने के बाद आटा इतना ठंडा होता था कि जैसे प्रशीतक (फ़्रिज) से निकला हुआ हो। दस-दस कोस से लोग आटा पिसवाने आते थे। वही कोठी आज इन सरकारों की ओर ताक रही है। ऐसी जीर्ण शीर्ण और जर्जर अवस्था में दीन हीन होकर लावारिस हो गई कि आज मेरा कोई धनाधोरी नहीं है। क्या देश इसी के लिए स्वतंत्र हुआ था कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद अपने ऐतिहासिक धरोहरों को भूल जाएगा ?

मैं तो स्वयं इस संबंध में बहुत पहले अनूपशहर, डिबाई के उपखंड अधिकारी (SDM) से क्रमशः मिला था, पर आज भी ब्यूरोक्रेसी और लालफ़ीताशाही ऐसी अभी भी है कि कोई सीधे मुँह बात नहीं करता। ज़िले के सांसद और विधायकों प्रमुखों, प्रधानों को अपने-अपने उद्घाटन और मान सम्मान से अवकाश नहीं है, वे भी सुप्रियजनों से घिरे रहते हैं, जहाँ उनकी झूठी मान बड़ाई होती है। यह रोग विधायक, सांसद तक ही नहीं वरन् इस रोग से मंत्री, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, प्रधानमंत्री तक ग्रस्त है, और त्रस्त है। जबकि “निंदक नियरे राखिए आंगन कुटी छबाय” वाले व्यक्तित्व ही हमें सावचेत करते हैं।

राष्ट्र की अस्मिता ऐतिहासिक स्थलों के स्वरूप को निहारकर सुधारने वाली डबल इंजन की सरकारें भी यदि ध्यान देती तो अनूपशहर गंगनहर की जलालपुर सूरजपुर (मखैना) की सिंचाई विभाग की कोठी कायाकल्प हो गयी होती। यह एक दर्शनीय स्थल हो जाता। सिंचाई विभाग ने भी इसकी पूर्णतः उपेक्षा की है। कोठी खंडर बनती जा रही है, बाउंड्री की दीवारें गिरी पड़ी है, कुछ दिन बाद अवशेष ही रह जाएँगे, पता नहीं क्यों ? सिंचाई विभाग खिंचाई विभाग बन गया है। यह कोठी सिंचाई विभागों के प्रदेश अधिकारियों का कभी विश्राम गृह था, अब यह विश्राम गृह, शमशान गृह की ओर बढ़ रहा है। आशा ही नहीं, विश्वास है, लेखनी धनी सिपहसालार अपने स्तंभों से सरकार एवं समाज को सावचेत करेंगे। इस सूरजपुर मखैना कोठी की ऐतिहासिक विरासत को सुरक्षित रखने में डबल इंजन की सरकार को सावचेत करेंगे।

योगी मोदी की सरकारें, तुम्हें पुकारा रहा हूँ।
डबल इंजन की बातें वालो, तुम्हें निहार रहा हूँ।
सूरजपुर की कोठी का, कायाकल्प करो तुम।
ऐतिहासिक धरोहरों का, अब ध्यान धरो तुम।

शुभेच्छु :-
गजेंद्र सिंह आर्य (वैदिक प्रवक्ता, पूर्व प्राचार्य)
धर्माचार्य जेपी विश्वविद्यालय, अनूपशहर
बुलंदशहर (उत्तर प्रदेश)
चल दूरभाष – ९७८३८९७५११

Comment:

Latest Posts

kolaybet giriş
betpark giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark güncel giriş
betgaranti giriş
betpark giriş
vdcasino
betgaranti
betpark giriş
betpark güncel giriş
vdcasino
vdcasino
jojobet güncel
betgaranti giriş
betgaranti güncel giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş