बच्चों को पढ़ाई लिखाई के साथ-साथ कुछ अतिरिक्त गतिविधियां Extra Activities भी करनी चाहिएं।

download (1)
      बच्चों को पढ़ाई लिखाई के साथ-साथ कुछ अतिरिक्त गतिविधियां Extra Activities भी करनी चाहिएं। *"उनसे बच्चों का विकास उत्तम रीति से होता है। उन्हें जीवन के सभी पहलू अच्छे ढंग से समझ में आते हैं। इन सब अतिरिक्त गतिविधियों को आजकल "सांस्कृतिक कार्यक्रम" के नाम से जाना जाता है।"*
    परंतु दुर्भाग्य की बात यह है कि *"आजकल सांस्कृतिक कार्यक्रम के नाम पर बच्चों को केवल नाचना गाना ड्रामा करना और ऐसी ही कुछ छोटी-मोटी चीजें सिखाई जाती हैं। आजकल बच्चे सांस्कृतिक कार्यक्रम के नाम पर जो कुछ सीख रहे हैं, वह बहुत ही अधूरा है। केवल 10 / 20%. अभी 80% कार्यक्रम तो बचे हुए हैं, जो सिखाए जाने चाहिएं और नहीं सिखाए जा रहे। जिनके अभाव में बच्चों का विकास ठीक प्रकार से नहीं हो पा रहा। "वे मानव जीवन की समस्याओं को नहीं समझ पा रहे। उन समस्याओं का समाधान नहीं ढूंढ़ पा रहे। उन समस्याओं से लड़ना और उन्हें जीतना नहीं सीख पा रहे। बच्चों में सहनशक्ति समाप्त होती जा रही है, जिसके अभाव में वे जीवन में छोटी-छोटी घटनाओं के होने पर ही घबरा जाते हैं, और आत्महत्या की ओर चल पड़ते हैं।" आधुनिक फिल्मों आदि से उन्हें हत्या या आत्महत्या ही समस्याओं के समाधान के रूप में सीखने को मिल रहा है। यह कोई समस्याओं का समाधान नहीं है।" "सभ्यता नम्रता सेवा दान दया परोपकार सहिष्णुता आदि आदि गुण बच्चों में से लुप्त होते जा रहे हैं। क्योंकि उनके प्रशिक्षण में माता-पिता और शिक्षा विभाग की ओर से कमी है।"*
      *"भारत देश की सभ्यता और संस्कृति केवल नाचने गाने तक ही सीमित नहीं है। इसके अतिरिक्त भी बहुत से कार्य भारतीय सभ्यता और संस्कृति के अंतर्गत आते हैं, जो इस प्रकार से हैं।"* जैसे कि -- *"आस्तिकता धार्मिकता सेवा परोपकार सदाचार का पालन करना, अपने चरित्र की रक्षा करना, यज्ञ करना, ईश्वर की उपासना करना तथा नशा मुक्ति बुराइयों से लड़ना लोभ क्रोध मोह ईर्ष्या द्वेष अभिमान आदि दोषों से बचना आदि।" "ये सब कार्य नहीं सिखाए जा रहे। इनको भी सांस्कृतिक कार्यक्रम के अंतर्गत अवश्य ही सिखाया जाना चाहिए।"*
       *"मैं सभी माता-पिता गुरुजनों और भारतीय शिक्षा विभाग से यह विनम्र निवेदन करता हूं," कि "अपने सांस्कृतिक कार्यक्रमों में इन सब उत्तम गुणों तथा कार्यों के प्रशिक्षण को भी सम्मिलित करें, और बच्चों का सर्वांगीण विकास करें। उन्हें जीवन की समस्याओं से लड़ना और उन्हें जीतना सिखाएं। भ्रांतियों एवं पाखंडों से बचना सिखाएं। उनमें स्वात्मनिर्भरता आत्मविश्वास ईश्वरभक्ति देशभक्ति तथा सहनशक्ति आदि गुणों का उच्च स्तर पर विकास करें।" "बच्चे भी -- माता-पिता और देश धर्म के प्रति समर्पित हों। तभी उनका संपूर्ण विकास हो पाएगा। और तभी वे स्वस्थ एवं सुखी जीवन जी सकेंगे।"*

—- “स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक – दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात.”

Comment:

Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betpark giriş
betgaranti mobil giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betnano giriş
betgaranti giriş
betgaranti giriş
betgaranti güncel giriş
betgaranti yeni adres
betgaranti giriş güncel
betgaranti giriş
betnano giriş
betpas giriş
betpas giriş
matbet giriş
matbet giriş
betnano giriş
betnano giriş
betnano giriş
betyap giriş
savoybetting giriş
betnano giriş
betnano giriş
pumabet giriş
pumabet giriş
limanbet giriş
betebet giriş
romabet giriş
romabet giriş
ikimisli giriş
ikimisli giriş
betpipo giriş
betpipo giriş
rekorbet giriş
betlike giriş
betebet giriş