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अपाचे अर्थात सुरक्षा का आभास

अपाचे हेलीकॉप्टरों की पठानकोट स्थित एयरबेस पर हुई नियुक्ति से सारा देश अपने आप को सुरक्षित और गौरवान्वित अनुभव कर रहा है । इसी वर्ष गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर 27 जुलाई को अपाचे हेलीकॉप्टरों की पहली खेप पहुंची थी । 3 सितम्बर को इस एयरबेस पर कुल 8 अपाचे एएच-64 हेलीकॉप्टर वायुसेना के बेड़े में सम्मिलित किए गए। पठानकोट एयरबेस पर इन हेलिकॉप्टरों को पानी की बौछार करके इनका स्वागत और अभिवादन किया गया। अपाचे भारतीय सेना में अब रूस में निर्मित बहुत पुराने हो चुके एमआई-36 हेलीकॉप्टरों का स्थान लेंगे। भारत को मार्च 2020 तक कुल 22 अपाचे हेलीकॉप्टर मिल जाएंगे और इन 22 हेलीकॉप्टरों की पूरी खेप वायुसेना में सम्मिलित होने तथा इसी माह फ्रांस से राफेल विमानों की आपूर्ति आरम्भ होने के पश्चात निश्चित रूप से भारतीय वायुसेना की शक्ति में पर्याप्त वृद्धि होगी। एएच-64 ई अपाचे गार्जियन अटैक हेलीकॉप्टर को विश्व के सबसे भयानक हेलीकॉप्टरों के रूप में जाना जाता है। यही कारण है कि अपाचे के भारत पहुंचते ही भारत के शत्रु पाकिस्तान और चीन की नींद उड़ गई है।अपाचे को उसकी प्रहारक और घातक क्षमता के कारण ‘लादेन किलर’ के नाम से भी जाना जाता है। यह एक साथ कई कार्यों को पूर्ण कर सकता है। अमेरिका, ब्रिटेन, जापान, सिंगापुर, इजरायल, नीदरलैंड, सऊदी अरब, इंडोनेशिया, मिस्र, ग्रीस, सऊदी अरब, कतर के अतिरिक्त कुछ अन्य देशों की सेनाएं भी इस हेलीकॉप्टर का प्रयोग कर रही हैं। ‘बोइंग’ अब तक विश्व में 2200 से भी अधिक अपाचे हेलीकॉप्टरों की आपूर्ति कर चुकी है और भारत विश्व का 14वां ऐसा देश है, जिसने अपनी सेनाओं के लिए इसका चयन किया है।पांच वर्षों तक अफगानिस्तान के संवेदनशील क्षेत्रों में अपाचे हेलिकॉप्टर उड़ा चुके ब्रिटिश वायुसेना में पायलट रहे एड मैकी का इस हेलीकॉप्टर के बारे में कहना है कि अपाचे विश्व की सबसे परिष्कृत किन्तु घातक मशीन है, जो अपने शत्रुओं पर बहुत निर्दयी सिद्ध होती है। मैकी के अनुसार इसके लिए सेना को एक पायलट की ट्रेनिंग पर 30 लाख डॉलर तक भी खर्च करने पड़ सकते हैं।अपाचे को दो पायलट मिलकर उड़ाते हैं। मुख्य पायलट पीछे बैठता है, जिसकी सीट थोड़ी ऊंची होती है, वही हेलीकॉप्टर को नियंत्रित करता है जबकि आगे बैठा दूसरा पायलट निशाना लगाता है और फायर करता है। वह बताते हैं कि अपाचे का निशाना बहुत सटीक है, जिसका सबसे बड़ा फायदा युद्ध क्षेत्र में होता है, जहां शत्रु पर निशाना लगाते समय आम लोगों को क्षति नहीं पहुंचती। यह सर्जिकल ऑपरेशनों को सफलतापूर्वक पूरा करने में भी वायुसेना के लिए बहुत सहायक सिद्ध हो सकता है। अपाचे की एक और विशेषता यह है कि यह युद्ध के मैदान में केवल शत्रु के परखच्चे उड़ाने का ही काम नहीं करता अपितु यह युद्धस्थल के चित्र खींचकर उन्हें अपने एयरबेस पर ट्रांसमिट भी कर देता है।इसके बड़े विंग को चलाने के लिए इसमें दो इंजन फिट हैं, जिस कारण इसकी गति बहुत अधिक है। अमेरिका की डिफेंस सिक्योरिटी कॉरपोरेशन एजेंसी का कहना है कि अपाचे एएच-64ई हेलिकॉप्टर भारतीय सेना की रक्षात्मक क्षमता को बढ़ाएगा । भारतीय वायुसेना की सामरिक आवश्यकताओं के दृष्टिकोण से अपाचे इसलिए भी बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारी वायुसेना की अपेक्षा के अनुसार ही इसमें अपेक्षित परिवर्तन किए गए हैं। ढ़ाई अरब डॉलर अर्थात् करीब साढ़े सत्रह हजार करोड़ रुपये का यह हेलीकॉप्टर सौदा लगभग चार वर्ष पहले हुआ था, जब सितम्बर 2015 में भारत ने अमेरिका से 22 अपाचे और 15 चिनूक हेलिकॉप्टर खरीदने के लिए सौदा किया था।अपाचे एक ऐसा अग्रणी बहुउद्देश्यीय लड़ाकू हेलीकॉप्टर है, जो शत्रु की नाक के नीचे किसी भी मिशन को पूरा करने में सक्षम है। इसे छिपकर वार करने के लिए जाना जाता है, इसीलिए इसका प्रयोग शत्रु के क्षेत्र में सहजता से प्रवेश करने में भी किया जाता है। हवा से जमीन में मार करने वाली मिसाइलों और बंदूकों से लैस, सिर्फ 1 मिनट में 128 टारगेट निशाना बनाने तथा दिन के अतिरिक्त रात में भी सहजता से कहीं भी जाने में सक्षम, किसी भी मौसम में उड़ान भरने तथा सहजता से टारगेट डिटेक्ट करने में सक्षम, शत्रु के रडार को सहजता से धोखा देने में कुशल इत्यादि अनेक विशेषताओं से सुसज्जित अपाचे पहली बार वर्ष 1975 में आकाश में उड़ान भरता दिखाई दिया था, जिसे 1986 में अमेरिकी सेना में सम्मिलित किया गया था। अमेरिका ने अपने इसी हेलिकॉप्टर का पनामा से लेकर अफगानिस्तान और इराक तक के साथ शत्रुओं को धूल चटाने के लिए प्रयोग किया था। इसके अतिरिक्त इजरायल भी लेबनान तथा गाजा पट्टी में अपने सैन्य ऑपरेशनों के लिए अपाचे का प्रयोग करता रहा है।इसमें सटीक मार करने और जमीन से उत्पन्न खतरों के बीच प्रतिकूल हवाईक्षेत्र में परिचालित होने की अद्भुत क्षमता है। यह आसानी से दुश्मन की किलेबंदी को भेदकर उसके क्षेत्र में प्रवेश कर बहुत सटीक हमले करने में सक्षम है और इसकी इन्हीं विशेषताओं के चलते इससे पीओके से होने वाली आतंकी घुसपैठ को रोकने और वहां के आतंकी ठिकानों को नष्ट करने में भारतीय सेना को सहायता मिलेगी, जहां लड़ाकू विमानों का प्रभावी प्रयोग संभव नहीं है। 280 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरने में सक्षम यह हेलीकॉप्टर तेज गति के कारण बड़ी आसानी से शत्रु के टैंकरों के परखच्चे उड़ा सकता है। इस हेलीकॉप्टर को रडार पर पकड़ना अत्यंत कठिन है। यह बगैर पहचान में आए चलते-फिरते या रूके हुए लक्ष्यों को सरलता से भांप सकता है। इसे इस प्रकार से डिजाइन किया गया है कि यह युद्ध क्षेत्र में किसी भी परिस्थिति में टिका रह सकता है। यह किसी भी मौसम या किसी भी स्थिति में शत्रु पर हमला कर सकता है । टारगेट को लोकेट, ट्रैक और अटैक करने के लिए इसमें लेजर, इंफ्रारेड, सिर्फ टारगेट को ही देखने, पायलट के लिए नाइट विजन सेंसर सहित कई आधुनिक तकनीकें समाहित की गई हैं।अपाचे एक बार में पौने तीन घंटे तक उड़ सकता है और इसकी फ्लाइंग रेंज करीब 550 किलोमीटर है। इसमें 360 डिग्री तक घूम सकने वाला अत्याधुनिक फायर कंट्रोल रडार तथा निशाना साधने वाला सिस्टम लगा है।दो जनरल इलैक्ट्रिक टी-700 हाई परफॉरमेंस टर्बोशाफ्ट इंजनों से लैस इस हेलीकॉप्टर में आगे की तरफ एक सेंसर फिट है, जिसके चलते यह रात के अंधेरे में भी उड़ान भर सकता है। इसका सबसे खतरनाक हथियार है 16 एंटी टैंक मिसाइल छोड़ने की क्षमता। अपाचे हेलीकॉप्टर के नीचे दोनों ओर 30 एमएम की दो ऑटोमैटिक राइफलें भी लगी हैं, जिनमें एक बार में शक्तिशाली विस्फोटकों वाली 30 एमएम की 1200 गोलियां भरी जा सकती हैं। इसका सबसे क्रांतिकारी फीचर है इसका हेल्मेट माउंटेड डिस्प्ले, इंटीग्रेटेड हेलमेट और डिस्प्ले साइटिंग सिस्टम, जिनकी मदद से पायलट हेलिकॉप्टर में लगी ऑटोमैटिक एम-230 चेन गन को अपने दुश्मन पर टारगेट कर सकता है। 17.73 मीटर लंबे, 4.64 मीटर ऊंचे तथा करीब 5165 किलोग्राम भार इस हेलीकॉप्टर में दो पायलटों के बैठने की व्यवस्था है। इसका अधिकतम भार 10400 किलोग्राम हो सकता है। डेटा नेटवर्किंग के जरिये हथियार प्रणाली से और हथियार प्रणाली तक, युद्धक्षेत्र के चित्र प्राप्त करने और भेजने की इसकी क्षमता इसकी विशेषताओं को और भी घातक बना देती है।यही वजह है कि माना जा रहा है कि वायुसेना में इनके शामिल होने से वायुसेना के साथ-साथ थल सेना की ऑपरेशनल शक्ति में भी कई गुना वृद्धि हो जाएगी। कम ऊंचाई पर उड़ने की क्षमता के कारण यह पहाड़ी क्षेत्रों में छिपकर वार करने में सक्षम हैं और इस दृष्टिकोण से यह पर्वतीय क्षेत्र में वायुसेना को महत्वपूर्ण क्षमता और शक्ति प्रदान करेगा। भारत को इस समय अपने दो पड़ोसी देशों चीन और पाकिस्तान की ओर से कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। एक ओर जहां पाकिस्तान निरंतर कश्मीर को लेकर भारत को धमकी देता रहा है और भारत में आतंकियों की घुसपैठ कराकर हिंसक घटनाओं को कराता रहा है, वहीं दूसरी ओर चीन खुलकर उसका साथ देता रहा है तथा भारत के आंतरिक मामलों में अनावश्यक टांग भी अड़ाता रहा है।ऐसी परिस्थितियों में हमारे देश की सेना का शक्तिशाली होना समय की आवश्यकता है । देश के दूरदर्शी नेतृत्व को इस समय साधुवाद देने की आवश्यकता है जो हर स्थिति परिस्थिति में देश को सुरक्षित करने का अपनी ओर से भरसक प्रयास कर रहा है । देश की बढ़ती हुई सामरिक शक्ति से भय खाए हुए पाकिस्तान और चीन दोनों ही इस समय फूंक-फूंक कर अपने कदम रख रहे हैं । पाकिस्तान कश्मीर में धारा 370 को हटाने के पश्चात बौखलाया हुआ है , परंतु भारत से युद्ध करने का साहस वह नहीं कर पा रहा है । इसका कारण यही है कि भारत के पास इस समय केवल उपदेश देने वाली कोरी बातें ही नहीं हैं , अपितु उसके हाथों में ऐसा ‘ मजबूत डंडा ‘ भी है जो शत्रु की किसी भी अप्रिय गतिविधि पर उसकी कमर तोड़ डालेगा ।हमारे राजनीतिक चिंतक मनु और चाणक्य ने यह व्यवस्था ऐसे ही नहीं की थी कि ‘ दंड: शास्ति ‘ अर्थात दंड या डंडा ही शासन करता है । अहिंसा की जंग खाई हुई हमारी बुद्धि पिछले 70 वर्ष में चाहे इस बात का अर्थ नहीं समझ पाई हो पर अब अपने शत्रुओं केकी स्थिति को देखकर तो हमें समझ ही लेना चाहिए कि हाथ में डंडा होने के अर्थ क्या होते हैं ? अब हमारे हाथ में अपाचे है तो हमारे शत्रु के दिलों पर क्या गुजर रही होगी इसे केवल वही जानते हैं।डॉ राकेश कुमार आर्यसंपादक : उगता भारत

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