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आज का चिंतन

इस खबर या मैसेज को खूब फॉरवर्ड करें ,– क्या तुक है ऐसा लिखने का

      प्रायः प्रतिदिन ऐसे समाचार ऑडियो वीडियो आपने व्हाट्सएप या फेसबुक आदि सोशल मीडिया पर देखे होंगे, सुने होंगे, पढ़े होंगे, जिनमें लिखा रहता है, कि *"इस मैसेज को, इस वीडियो को अधिक से अधिक फॉरवर्ड करें। इसको इतना शेयर करें, कि इन लूटपाट की घटनाओं गौओं की तस्करी स्त्रियों और बच्चों पर अत्याचार आदि का यह मैसेज कल शाम तक देश के प्रत्येक मोबाइल में होना चाहिए।"*
    *"क्या अधिक से अधिक फॉरवर्ड करने पर, देश के प्रत्येक मोबाइल में उस समाचार ऑडियो वीडियो को पहुंचा देने पर, वे समस्याएं हल हो जाती हैं? अपराधियों को दंड मिल जाता है?" "केवल मैसेज फॉरवर्ड करने से यह परिणाम नहीं आता। बल्कि देश के नागरिकों का तनाव और चिंताएं तो बहुत बढ़ जाती हैं, उनकी अशांति तो बहुत बढ़ती है।" "लूटपाट की घटनाएं गौओं की तस्करी स्त्रियों और बच्चों पर अत्याचार आदि की समस्याएं उसके बाद भी खूब चलती रहती हैं। वे तो थमती नहीं।"*
     *"हां, कोई बच्चा खो गया हो, और उसकी फोटो आप फारवर्ड करें, तो वह मिल सकता है। ऐसे समाचार तो फॉरवर्ड करने में हानि नहीं दिखाई देती।"*
    *"परंतु गौओं की तस्करी, स्त्रियों और बच्चों पर अत्याचार इत्यादि जो सामाजिक स्तर की दुर्घटनाएं हैं, उनके समाचार ऑडियो वीडियो देशभर में फॉरवर्ड करने से लाभ तो कोई होता नहीं, बल्कि हानि अधिक होती है।" "इससे तो उस वीडियो ऑडियो अथवा समाचार को देखने पढ़ने सुनने वाले देश के लोगों का दुख चिंता या तनाव और अधिक बढ़ जाता है।" "जब तक उन लोगों ने यह समाचार नहीं सुना पढ़ा देखा था, तब तक वे शांत थे। और इस तरह के अत्याचार के वीडियो देखने पर उनकी शांति खो जाती है। उनका तनाव और चिंताएं आदि बहुत बढ़ जाती हैं। इसलिए ऐसा कार्य न करें।"*
   किसी को ऐसी कसम न दें, कि *"यदि तुम इस मैसेज को कम से कम पांच व्यक्तियों को फॉरवर्ड नहीं करते, तो तुम सच्चे भारतीय नहीं हो। तुम सच्चे हिंदू नहीं हो।" "क्या सच्चे हिंदू होने या सच्चे भारतीय होने का प्रमाण पत्र आप देंगे? यदि आप किसी को प्रमाणित करेंगे, तो ही वह सच्चा हिंदू या सच्चा भारतीय कहलाएगा, अन्यथा वह नकली हिंदू या नकली भारतीय माना जाएगा? क्या आपके पास ऐसा प्रमाण पत्र जारी करने का अधिकार है?" "यदि नहीं है, तो आप ऐसी अनधिकार चेष्टा क्यों करते हैं? आपकी ऐसी अनधिकृत चेष्टाओं से समाज के लोगों का क्रोध बढ़ता है, और लोग आपको मूर्ख मानते तथा कहते भी हैं। आप इस बात को क्यों नहीं समझते? ये सब व्यवहार बुद्धिमत्ता के नहीं हैं।"*
      *"जो लोग इस तरह के सामाजिक दुर्घटनाओं के मैसेज ऑडियो वीडियो आदि को फैलाते हैं, यदि वे ऐसी दुर्घटनाओं को रोकना चाहते हैं, अपराधी व्यक्तियों को दंडित करवाना चाहते हैं," तो इसका सही उपाय यह है, कि "वे ऐसे ऑडियो वीडियो या समाचार, जो राज्य व्यवस्था के अधिकारी हैं, उन तक पहुंचाएं, अथवा उनसे मिलने के लिए उनके कार्यालय में जाएं, वहां जाकर उनसे निवेदन करें," कि "देश में बहुत अव्यवस्था चल रही है। ऐसी ऐसी दुर्घटनाएं हो रही हैं, कृपया आप इन्हें रुकवाएं और अपराधी व्यक्तियों को दंडित करें।" किन राज्य अधिकारियों के पास जाकर शिकायत करें? "जैसे प्रधानमंत्री जी हैं। देश के गृहमंत्री हैं। राज्य के मुख्यमंत्री हैं। अपने-अपने जिले के कलेक्टर साहब हैं। अपने-अपने क्षेत्र के डीएसपी साहब हैं, जो इन समस्याओं के विरुद्ध कुछ कर भी सकते हैं। यदि वे चाहें, तो इन दुर्घटनाओं को रोक सकते हैं। वे दोषियों को दंडित भी कर सकते हैं। क्योंकि उनके पास सत्ता है, अधिकार है, शक्ति है, सेना है, पुलिस है। ऐसे अधिकारी जो समस्या का समाधान कर सकते हैं, उनको जाकर अपनी शिकायत सुनाएं। उन समस्याओं का समाधान उन राजकीय अधिकारियों के पास है, जन साधारण के पास नहीं है। इसलिए केवल वहीं तक ऐसे ऑडियो वीडियो पहुंचाएं। ऐसा करने में बुद्धिमत्ता है।"*
      ""सामान्य जनता में अशांति उत्पन्न न करें। उनकी चिंताएं और तनाव न बढ़ाएं। व्यर्थ ही दूसरों का तनाव चिंता बढ़ाने में बुद्धिमत्ता नहीं, बल्कि जनता की आक्रोश भरी भाषा में यह मूर्खता कहलाती है।"*
     *"यदि आप ऐसा नहीं कर सकते, और कहीं किसी कंपनी या कार्यालय में आप बड़े अधिकारी हों, और आपकी कंपनी या कार्यालय में कोई व्यक्ति असभ्यता उच्छृंखलता या अपराध करता है, तो उसके विरुद्ध आप एक्शन ले सकते हैं। वहां अपनी शक्ति का उपयोग करके कम से कम वहां की अव्यवस्था को तो दूर कर सकते हैं, वहां की अव्यवस्था को ही दूर करें। देश की रक्षा के लिए आपका इतना योगदान भी प्रशंसनीय होगा। इसमें तो बुद्धिमत्ता है।"*
    *"अथवा यदि आप किसी कंपनी आदि में बड़े अधिकारी भी नहीं हैं। और ऑडियो वीडियो वाली देश की उस दुर्घटना को रोकने का भी आप में सामर्थ्य नहीं है, और आपके पास इन दुर्घटनाओं को रुकवाने  के लिए पर्याप्त शक्ति एवं समय भी नहीं है, तो आप इन दुर्घटनाओं की ओर ध्यान न देवें।" "देश में और भी आप जैसे बहुत से लोग हैं , जिनको इस प्रकार की दुर्घटनाओं की रोकथाम करने कराने में अधिक रुचि समय एवं सामर्थ्य होगा, वे लोग राज्य अधिकारियों को सूचना देकर इनका निवारण कराने का प्रयास कर लेंगे।" "आप तो अपने अन्य किसी सृजनात्मक कार्य में व्यस्त रहें। जिससे आपकी शांति भी बनी रहे, और आपका समय एवं शक्ति देश के लिए कुछ अच्छे निर्माण कार्य में लगे। जिससे देश को लाभ हो।"*
      *"चिंता और तनाव बढ़ाने वाले ऐसे ऑडियो वीडियो आदि को फॉरवर्ड करके, देश के लोगों का तनाव तो कृपया न ही बढ़ाएं, क्योंकि ईश्वरीय संविधान वेद के अनुसार ऐसा कार्य करना, स्वयं अपने आप में एक अपराध है। ऐसा करने पर प्रशासन शायद आपको इसका दंड न भी दे, परन्तु ईश्वर की न्याय व्यवस्था में तो आपको इसका दंड भोगना ही पड़ेगा।"*

—- “स्वामी विवेकानन्द परिव्राजक, निदेशक – दर्शन योग महाविद्यालय, रोजड़, गुजरात.”

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