Categories
इतिहास के पन्नों से

राम सागर ,भेटिया का तालाब ,छपिया पैर से दबाते ही अथाह जल पाताल गया

आचार्य डॉ. राधेश्याम द्विवेदी

यह स्थान छपिया के भेटियां गांव की झाड़ियों में है। भेटिया का हिंदी अर्थ भेंट उपहार या नजर लाने वाला होता है। चूंकि यहां खेत से निकला सारा धान अपने बचनानुसार मोती मामा ने फसल बचाने के एवज में अपने भांजे घनश्याम बाल प्रभु को दान में भेंट कर दिया था। इसीलिए इस गांव और तालाब का नाम भेंटिया पड़ा । दान की महत्ता के कारण पवित्र इस तालाब के किनारे श्राद्ध कर्म भी होने लगे हैं। भेंटिया एक पर्वतीय जन जाति भी होती है। हो सकता है इस गांव के निवासियों का इनसे कोई संबंध रहा हो। इस गांव में छोटे मंदिर में छोटे हनुमान जी की मूर्ति है। यहां पर भोटिया का तालाब है। यहां पर घनश्याम ने अपने पैर के अंगूठे से दबाया तो पानी पाताल में चला गया था।

  एक समय की बात है वर्षा ऋतु में घनश्याम के मामा मोती ने इस तालाब में धान की फसल लगाई थी। कुछ दिन बाद अधिक वर्षा से धान डूब गया। उनके मामा चिंतित रहने लगे। एक बार कोई जरूरी काम होने के कारण धर्मदेव मोती मामा और घनश्याम महाराज उस तालाब के पास से जा रहे थे। धर्मदेव ने रोपे हुई धान के बारे में पूछा तो मामा बोले कि यह फसल बरबाद होकर सड़ जाएगा। वे उदास हो गए थे। घनश्याम महराज ने पूछा,” मामा कितना धान पैदा होगा?”

 मामा ने उत्तर दिया,”अब कुछ भी नहीं पैदा होगा। जो कुछ भी होगा वह अब सब तुम्हारा है।”

घनश्याम महराज जहां धान लगाया गया था वहां जाकर अपने दाहिने पैर के अंगूठे से धक्का दिए। धरती मां में तीव्र आवाज आई। जमीन में दरार पड़ गई। चारो तरफ के गांव वाले आ गए। वह ऊपर का सारा पानी दरार के रास्ते अन्दर चला गया। धान बाहर दिखाई देने लगा। 

एसा होने से तालाब के जीव जन्तु तथा मछ्ली विना पानी के परेशान हो गए। यह देखकर घनश्याम प्रभु को दया आ गई और उन्होने उन जीवों की मुक्ति का संकल्प लिया।

इंद्र देवता ने उन जीवों को लेने के लिए कई विमान भेज दिए। सभी जीव जो मर गए थे । घनश्याम महाराज की स्तुति करते हुए स्वर्ग को चले गए। सभी लोग घन श्याम भगवान को श्री रामचन्द्र भगवान समझ कर हाथ जोड़कर प्रणाम करने लगे।

इस घटना के बाद इस तालाब को राम सागर या धर्म तालाब के नाम से जाना जाता है। यहां पर छतरी भी बनी हुई है।

वर्ष 2019 में केन्द्र सरकार द्वारा हृदय- अमृत योजना की राशि से लाखों खर्च कर इस सरोवर का जीर्णोद्धार व जल भंडारण के लिए सौर ऊर्जा से चालित तीन बोिरंग कराया गया था।

तालाब के चारों ओर पाइप बिछा यहां लगाए गए पेड़-पौधों के लिए पटवन की भी सुविधा मुहैया करायी गई थी। जो देखरेख के अभाव में तालाब में लगाए गए सारे बोरिंग, मोटर पंप और फैंसी लाइट पुरी तरह से बंद हो गए है।

  रामसागर तालाब के चारों ओर लगे फैंसी लाइटों के मरम्मत करने व बंद पड़ी लाइटों को शुरू कराया जाना चाहिए। यह तालाब नगर वासियों के साथ-साथ देश के विभिन्न प्रांतों से श्राद्ध कर्मकांड के लिए आने वाले तीर्थयात्रियों को भी शुद्ध आवोहवा का एक प्रमुख केन्द्र बन गया है। तालाब को हरित पटरी पर लाने के लिए हर संभव प्रयास किया गया है।

लेखक परिचय

(लेखक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, में सहायक पुस्तकालय एवं सूचनाधिकारी पद से सेवामुक्त हुए हैं. वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के बस्ती नगर में निवास करते हुए सम-सामयिक विषयों, साहित्य, इतिहास, पुरातत्व, संस्कृति और अध्यात्म पर अपना विचार व्यक्त करते रहते हैं। मोबाइल नंबर +91 8630778321, वर्डसैप्प नम्बर+ 91 9412300183)

Comment:Cancel reply

Exit mobile version
Kuponbet Giriş
betgaranti giriş
Teknik Seo
ikimisli giriş
grandpashabet giriş
bonus veren siteler
grandpashabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
setrabet giriş
setrabet giriş
setrabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
setrabet giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
restbet giriş
restbet giriş
galabet giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
betnano giriş
betnano giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet
grandpashabet giriş
betlike giriş