भारत में राष्ट्र की अवधारणा और धर्मनिरपेक्षता का सिद्धांत

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भारत ने धर्मनिरपेक्षता की राह पकड़ कर आत्मघाती निर्णय लिया था। धर्मनिरपेक्षता की इसी मूर्खतापूर्ण अवधारणा को पड़कर भारत में भगवा आतंकवाद की भी परिकल्पना की गई। यह नाम उन राष्ट्रवादियों को दिया गया जो देश विरोधियों का किसी न किसी प्रकार सामना कर रहे थे या उनकी देश विरोधी मानसिकता और कार्यशैली का कहीं ना कहीं भंडाफोड़ कर रहे थे।   यद्यपि हम सभी जानते हैं कि संसार के जितने भर भी मुस्लिम राष्ट्र हैं , वे सभी अपनी मजहबी परंपराओं के प्रति पूर्णतया कट्टर हैं। अपने-अपने देश में वे किसी भी स्थिति में यह नहीं चाहते कि यहां पर दूसरे संप्रदाय के लोगों को अपना विकास करने का अवसर प्राप्त हो । इसी प्रकार संसार के ईसाई देशों की स्थिति है , परंतु भारतवर्ष इसके विपरीत कार्य करता हुआ देखा जाता है। यहां अपने बहुसंख्यक सनातनी समाज की परंपराओं को करने के लिए शासन प्रशासन में बैठे सभी लोग स्वाधीनता के पश्चात से ही कार्य करने लगे थे।              धर्मनिरपेक्षता की इसी दुष्ट भावना के चलते संसार में भारत ही एक ऐसा देश है, जहां अपने देश में बैठे उन गद्दारों पर कोई कार्यवाही नहीं की जाती जो भारत की धार्मिक परंपराओं, रीति-रिवाजों और संस्कृति को कोसते मिलते हैं। इतना ही नहीं, भारत ही संसार का एकमात्र ऐसा देश है, जहां पर अपने ही लोग अर्थात सनातन परंपरा में विश्वास रखने वाले लोग भी सनातन को ही कोसते हैं। उन्हें विधर्मियों के रीति रिवाज और परंपराएं वैज्ञानिक लगती हैं। जबकि भारत की सनातन परंपराओं में उन्हें रूढ़िवाद की गंध आती है। धर्मनिरपेक्षता की नीति पर चलते हुए हमारे देश में सांप्रदायिक नेताओं को हिंसा में लिप्त पाए जाने के उपरांत भी जेल में वे सभी सुविधाएं प्रदान की जाती हैं, जो एक राजनीतिक कैदी को दी जाती हैं। जबकि देश के विरुद्ध विद्रोह की चिंगारी जगाने वाले इन दुष्ट मानसिकता के लोगों के लिए ऐसी कोई भी सुविधा जेल में नहीं होनी चाहिए, जिससे उनके अति विशिष्ट व्यक्ति होने का बोध होता हो। हमारे देश के बारे में यह भी एक दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य है कि जो लोग अत्यंत निन्दनीय , घृणित अमानवीय अपराध करते हुए पाए जाते हैं, उन्हें पैरोल पर हर 2 महीने में छोड़ा जाता है । इसी प्रकार जो लोग भ्रष्टाचार की गहरी दल-दल में फंसे हुए मिलते हैं, उन्हें भी जेल से मुक्ति दे दी जाती है, परंतु जो वीर हमारे देश की एक सच्चे प्रहरी के रूप में सीमाओं पर खड़े होकर पहरेदारी करते हैं , उनके लिए एक-एक वर्ष तक घर जाने की अनुमति नहीं होती।
  हमारे देश में ही आतंकवादियों को भी मानव समझकर उनके लिए मानवाधिकारों की पूरी सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। चाहे एक देशभक्त निर्धन व्यक्ति को फांसी दे दी जाए, परंतु किसी भी आतंकवादी को मानव अधिकारों की सारी सुविधाएं उपलब्ध करवाने का पूरा प्रबंध किया जाता है। जबकि विधि विशेषज्ञों और न्याय शास्त्रियों की मान्यता है कि किसी भी निरपराध को फांसी नहीं मिलनी चाहिए, परंतु हमारे यहां इसके विपरीत होता है कि चाहे सौ निरपराध फांसी पर चढ़ाने पड़ जाएं, परन्तु एक भी अपराधी को फांसी नहीं होनी चाहिए। आतंकवादियों और बलात्कारियों के मानव अधिकारों के लिए लड़ने वाले केवल भारत में ही मिलते हैं। अनेक मानवाधिकारवादी संगठन इनकी रक्षा सुरक्षा के लिए सामने आ जाते हैं। कितने ही अधिवक्ता इनकी वकालत न्यायालयों के सामने खड़े होकर करते हैं।  माना कि अधिवक्ता का काम अपने व्यवहारी की बात को न्यायालय के समक्ष रखना होता है, परंतु जब आतंकवादियों और बलात्कारियों को बचाने के लिए अधिवक्ता लोग भांति- भांति के तर्क देते हैं तो लगता है कि विधि व्यवसाय में भी केवल और केवल पैसे को प्राथमिकता देने वाले लोग प्रवेश कर गए हैं। क्या ही अच्छा हो कि बलात्कारियों, आतंकवादियों, देश विरोधियों की न्यायालय के समक्ष वकालत करने वाले अधिवक्ता लोग देश के लिए आतंकवादियों की गोलियों से अपने प्राण न्यौछावर करने वाले वीर सैनिकों के परिवारों के लिए लड़ते हुए दिखाई दें। जो नवयुवक समाज में रहकर अपनी वीरता और शौर्य का परिचय देते हुए सभी विधर्मियों के भारत विरोधी विचारों और अभियानों का विरोध अपने प्राणों को दाव पर लगाकर कर रहे हैं, उनकी बातों को न्यायसंगत ठहराने के लिए अधिवक्ता लोग न्यायालय में वकालत करते हुए दिखाई दें… तो कोई बात बने। कितने दुर्भाग्य की बात है कि जो देश के लिए काम कर रहे होते हैं, समाज और अपनी सनातन परंपराओं की रक्षा के लिए काम कर रहे होते हैं, गौ माता और भारत माता की रक्षा के लिए काम कर रहे होते हैं, उन्हें कुत्ते की मौत मरने दिया जाता है और जो इन सब वैदिक परंपराओं, रीति रिवाजों , मान्यताओं के मिटाने में लगे हुए हैं, उनकी वकालत की जाती है।
धर्मनिरपेक्षता के नाम पर देश पर 60 वर्ष जिस पार्टी ने शासन किया उसके नेता आज भी सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं। ” सनातन मिटाओ अभियान ” में लगी हुई यह पार्टी आज भी अपने एक युवा नेता के नेतृत्व में पाकिस्तान और चीन की आरती उतारने में लगी हुई है। यद्यपि सारा देश ही नहीं, सारा संसार जानता है कि ये दोनों देश भारत के परंपरागत शत्रु हैं और किसी भी दृष्टि से किसी भी क्षेत्र में भारत को स्थापित होने के नितान्त विरोधी हैं। भारत के धर्मनिरपेक्ष नेता खुल्लम-खुल्ला उन आतंकवादियों का समर्थन और सम्मान करते हुए दिखाई देते हैं, जो भारत विरोधी सोच को क्रियान्वित करने में लगे हुए होते हैं। इसके विपरीत राष्ट्रवादियों को  गालियां देना भी इनके विचारों में गहराई से सम्मिलित हो गया है। हम सभी इस तथ्य से भली प्रकार परिचित हैं कि दिल्ली में अनेक उन रोहिंग्या मुसलमानों या विधर्मियों के घर-घर जाकर वोटर कार्ड बना दिए गए जो अवैध घुसपैठिए के रूप में दिल्ली की झुग्गी झोपड़ियां में आकर किसी प्रकार प्रवेश पाने में सफल हो गए थे। देश के कट्टर ईमानदार नेता केजरीवाल की पार्टी ने यह काम किया, जिस पर कांग्रेस सहित सारी धर्मनिरपेक्ष पार्टियां मौन साध गई।
  इन सब बातों को देखकर यही लगता है कि भारत में पर शाख पे उल्लू बैठा है, अंजाम ए गुलिस्ता क्या होगा ? सचमुच समय रहते जागने की आवश्यकता है।

डॉ राकेश कुमार आर्य
(  लेखक सुप्रसिद्ध इतिहासकार और भारत को समझो अभियान समिति के राष्ट्रीय प्रणेता है )

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