*मंत्र साधना –कष्ट निवारक या कुछ और? भ्रान्ति निवारण*

images (1) (13)

डॉ डी के गर्ग

निवेदन =अपने विचार बताये ,शेयर करे और अंधविस्वास से दूर रहने का संकल्प ले।

पौराणिक मान्यता :–मंत्र साधना क्या है ?मं‍त्र से किसी देवी या देवता को साधा जाता है। मंत्र का अर्थ है मन को एक तंत्र में लाना। मन जब मंत्र के अधीन हो जाता है तब वह सिद्ध होने लगता है। ‘मंत्र साधना’ भौतिक बाधाओं का आध्यात्मिक उपचार है। योगियों ने अपने योग बल से गुप्त साधनाएं की और मंत्रों को सिद्ध किया। तंत्र साधना व वैदिक मंत्रों को तो लिपिवद्ध करके शास्त्रों आदि में रख दिया गया लेकिन कुछ ऐसे भी मंत्र थे जिनको किसी किताब या ग्रंथ में नहीं लिखा गया। इसलिए गुरु मंत्र की बहुत महत्ता है।
ये मंत्र इतने शक्तिशाली होते थे कि इनके उच्चारण मात्र से ही रास्ते के पत्थर हट जाते थे चूर-चूर हो जाते थे, किसी भी धातु को सोने में बदल देते थे, पानी का बहाव रोक देते थे और बारिश ला देते थे।मंत्र मात्र के उच्चारण से किसी की भी किस्मत का सितारा बुलंद हो जाता था। रंक राजा बन जाता था और राजा रंक बन जाता था। कहते हैं कि चाणक्य जी ने साबर मंत्र को सिद्ध किया था। मंत्र सिद्धि के लिए आवश्यक है कि मंत्र को गुप्त रखना चाहिए, ग्रहण के समय किया गया जप शीघ्र लाभदायक होता है. ग्रहण काल में जप करने से कई सौ गुना अधिक फल मिलता है।
कुछ उदाहरण भी लेते है —
शनि देवता का मंत्र –शनि बीज मंत्र- ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः। सामान्य मंत्र- ॐ शं शनैश्चराय नमः। शनि महामंत्र- ॐ निलान्जन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम। छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम॥
बृहस्पति देवता का मन्त्र -ॐ बृ बृहस्पतये नमः”
क्लेशनाशक मंत्र : कृष्णा य वासुदेवा य हरये परमात्मने। प्रणत क्लेशना शाय गोविन्दाय नमो नम:॥
चिंता मुक्ति मंत्र : ॐ नम: शिवाय।
समृद्धि दायक मंत्र : ॐ गं गणपते नम:।
दरिद्रता नाशक मंत्र : ॐ ह्रीं ह्रीं श्री लक्ष्मी वासुदेवाय नम:।
कल्कि देवता का मंत्र–ॐ नमो कल्कि देवाय क्लीं नमः
ॐ ह्रीं श्री क्रीं क्लीं श्री लक्ष्मी मम गृहे धन पूरये, धन पूरये, चिंताएं दूरये-दूरये स्वाहा:।
नवार्ण मंत्र = ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै–यह माँ भगवती दुर्गा का सबसे शक्तिशाली मंत्र है |जो नवग्रहों को नियंत्रित करके साधक के अनुकूल करता है |
ओम ऐं ह्रीं क्लीं चामुंडायै विच्चे — देवी चामुंडा को समर्पित है।
ओम मां कलिकाए नमः — देवी काली को समर्पित है।
रक्षा मंत्र
1. ओम ऐं क्रीं क्रीं फट् — नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा के लिए।
2. ओम महामृत्युंजय – – मृत्यु और बीमारी से रक्षा के लिए।
3. ओम ह्रीं श्रीं क्लीं — सुख और समृद्धि के लिए।
४ ओम ह्रीं — – आध्यात्मिक ज्ञान के लिए।

विश्लेषण :–ये जो भी मंत्र दिए है शायद इन्ही के कारण देश में अशिक्षा ,अपराध और प्रमाद में वृद्धि हुई है। ये सभी अज्ञानियों के और चालबाज लोगो की दें है जिनके चंगुल में वो सभी मुर्ख फस जाते है जिनको ईश्वर और उसके न्याय ,कर्मफल का कोई ज्ञान नहीं होता। रातो रात धनि होने की इच्छा ,दुखो से मंत्र द्वारा मुक्ति पाने का भरोसा उनको इस तरफ धकेल देता है और देश में अधिकांश मंदिरो में पंडित नाम से प्रसिद्ध ऐसी लूट में लगे हुए है।
ये मंत्र कोई वैज्ञानिक नहीं है ,जबरन संस्कृत भाषा की तंग तोड़कर किसी ने लिखे है। इन मंत्रो से कुछ होता तो कोरोना में मंदिर पुजारी टाला बंद करके घर ना बैठते। वे बेचारे स्वयं दान दक्षिणा और अस्पताल के डॉक्टरों पर निर्भर रहते है। यदि इन मंत्रो से कुछ होता तो पूरे विश्व में कही गरीबी ,भुखमरी नहीं होती और मंत्र लेखक को नॉवल प्राइज मिल जाता। इन मंत्रो से कुछ होता तो सोमनाथ के मंदिर पर लुटेरे ५०००० निर्दोष लोगो की हत्या नहीं करते ,भारतीय मंदिर नहीं लुटे जाते और आज भी अफगानिस्तान और बांग्लादेश में यही हो रहा है।
मंत्र किसे कहते है ?-हिन्दू श्रुति ग्रंथों की कविता को पारंपरिक रूप से मंत्र कहा जाता है। इसका शाब्दिक अर्थ विचार या चिन्तन होता है मंत्रणा, और मंत्री इसी मूल से बने शब्द हैं। मन्त्र भी एक प्रकार की वाणी है, परन्तु साधारण वाक्यों के समान वे हमको बन्धन में नहीं डालते, बल्कि बन्धन से मुक्त करते हैं
मंत्र वह ध्वनि है जो अक्षरों एवं शब्दों के समूह से बनती है।. यह संपूर्ण ब्रह्माण्ड एक तरंगात्मक ऊर्जा से व्याप्त है जिसके दो प्रकार हैं – नाद (शब्द) एवं प्रकाश। आध्यात्मिक धरातल पर इनमें से शब्कोई भी एक प्रकार की ऊर्जा दूसरे के बिना सक्रिय नहीं होती। मंत्र मात्र वह ध्वनियाँ नहीं हैं जिन्हें हम कानों से सुनते हैं, यह ध्वनियाँ तो मंत्रों का लौकिक स्वरुप भर हैं।
मंत्र सिद्धि कैसे???
मंत्र नाम है विचार का । पहले हर राजा के दरबार में एक मंत्री होता था, जिसका काम होता था राजा को सलाह देने का, विचार देने का । आज भी सरकार में मंत्री होते हैं जिनका काम अपने अपने कार्य क्षेत्र में विचार रखने का है।
वेद परमात्मा द्वारा दिए गए ज्ञान का नाम है। इसमें जो कुछ भी लिखा है, वह सब परमात्मा के आदेश और निर्देश ही हैं। इसी ज्ञान को मंत्र की संज्ञा दी गई है। मंत्र की सिद्धि करने के लिए, उस मंत्र के अर्थ को ठीक प्रकार से जाने, मंत्र के एक एक शब्द और उसके अर्थ पर विचार पूर्वक मनन करें और उस मंत्र में बताए विचार को अपने जीवन में धारण करें। मंत्र के अनुसार व्यवहार को ही मंत्र सिद्धि कहते हैं।
किसी भी मंत्र को याद करने, पढ़ने या पाठ या जाप करने से आंशिक लाभ ही होता है जैसे मंत्र पाठ करने से प्राणायाम होता है जिससे कुछ स्वास्थ्य लाभ मिल सकता है, मन प्रफुल्लित हो सकता है आदि। मंत्र का पूर्ण लाभ तो मंत्र को व्यवहार में लाने से ही प्राप्त होता है।
महर्षि स्वामी दयानन्द सरस्वती जी को यह मंत्र बहुत प्रिय था क्योंकि उन्होंने इस मंत्र की सिद्धि की हुई थी। यह मंत्र है –
ओ३म विश्वानि देव सवितर्दुरितानि परा सुव।
यद् भद्रं तन्न आ सुव ।।
महर्षि स्वामी दयानन्द जी ने इस मंत्र को अपने जीवन में धारण किया था। वह जीवन पर्यन्त दुर्गुण और दुर्व्यसनों से दूर रहे और अपने गुण कर्म और स्वभाव को वेदानुकूल बनाया। यही मंत्र सिद्धि होती है।
मंत्र सिद्धि के लिए तप करना होता है इसका मतलब है की सुख- दुख, लाभ -हानि, मान- अपमान, यश- अपयश आदि में समान रूप से रहने को ही तप कहते हैं । शरीर को अकारण सजा देना तप नहीं होता है जैसे एक टांग पर खड़े रहना, पांच धूमाग्नि जलाकर उसके मध्य बैठना, हाथ उठाकर पानी में खड़े रहना आदि तप नहीं होते। द्वन्दों की परवाह न करते हुए मंत्र को अपने जीवन में धारण करना ही मंत्र सिद्धि होती है। स्पष्ट है की प्रत्येक मंत्र का कुछ भावार्थ होता है उसको हृदय में उतार ने और तदनुसार आचरण में लाना ही मंत्र या मंत्रणा या मंत्र साधना है।

Comment:

betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
kolaybet giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
betpark giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
betsilin giriş
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
hititbet giriş
meritking giriş
meritking giriş
meritking giriş
hititbet giriş
grandpashabet
grandpashabet
grandpashabet giriş
grandpashabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
grandpashabet
grandpashabet
hiltonbet giriş
hiltonbet giriş
katlabet giriş
katlabet giriş
meritking güncel giriş
bettilt giriş
bettilt giriş
betnano güncel giriş
betnano güncel giriş
betsilin giriş
betsilin giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
katlabet giriş
katlabet giriş
vaycasino giriş
vaycasino giriş
milanobet giriş
milanobet giriş
betasus giriş
betpark giriş
betasus
betasus