विनय सीताराम यदि अटल बिहारी वाजपेयी श्यामा प्रसाद मुखर्जी के सांचे में ढले वक्ता थे तो एलके आडवाणी कराची की महानगरीय दुनिया के बाशिंदे। दीनदयाल ने आडवाणी की इस खासियत पर गौर किया था और यही वजह थी कि 1957 के चुनावों के बाद आडवाणी को दिल्ली लाया गया। उनका काम दिल्ली के लुटियंस में […]