जब सीता जी ने रावण को लताड़ते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि चाह जो हो जाए, पर वह कभी उसकी भार्या नहीं बन सकतीं तो रावण अत्यधिक क्रोध में आ गया। तब उसने सीता जी से कहा कि तुम्हारे पास दो महीने का समय है। यदि इस काल में राम तुम्हें लेने नहीं आए […]
जब सीता जी ने रावण को लताड़ते हुए यह स्पष्ट कर दिया कि चाह जो हो जाए, पर वह कभी उसकी भार्या नहीं बन सकतीं तो रावण अत्यधिक क्रोध में आ गया। तब उसने सीता जी से कहा कि तुम्हारे पास दो महीने का समय है। यदि इस काल में राम तुम्हें लेने नहीं आए […]
उस अशोक वाटिका में हनुमान जी ने एक ऊंचे उठे हुए गोलाकार भवन को देखा। यह भवन अत्यंत निर्मल था और ऊंचाई में आकाश से बातें करता था। उस भवन को देखते हुए हनुमान जी ने मैले वस्त्रों से युक्त रक्षसियों से घिरी हुई, उपवास करने से अत्यंत दुर्बल ,अत्यंत दु:खी , बार-बार लंबी सांस […]
जब हनुमान जी रावण की राजधानी लंका में पहुंच गए तो वहां उन्होंने बने हुए उत्तम राजप्रासाद के मध्य एक स्वच्छ और निर्मल विशाल भवन को देखा। अब उनकी एक ही इच्छा थी कि यहां पर सीता जी कहां हो सकती हैं ? उस भवन में इधर-उधर देखने पर हनुमान जी ने अनेक महिलाओं को […]
अब जटायु के भाई संपाति के द्वारा पूर्ण विवरण मिलने के पश्चात यह पूर्णतया स्पष्ट हो गया था कि सीता जी का अपहरण करके ले जाने वाला रावण श्रीलंका में निवास करता है । यदि सीता जी को सकुशल प्राप्त करना है तो इसके लिए समुद्र को लांघकर समुद्र के उस पार जाना अनिवार्य है। […]
लक्ष्मण ने आकर जब सुग्रीव को झकझोरा तो वह अपने कर्तव्य के प्रति सावधान और सजग होकर पूर्ण मनोयोग से सीता जी की खोज में लग गया। वानरराज ने तुरंत अपने सैनिकों को समुचित निर्देश दिए और चारों दिशाओं में उन्हें सीता जी की खोज के लिए भेज दिया। सुग्रीव राज लक्ष्मण जी के साथ […]
बाली वध के पश्चात सुग्रीव का राज्याभिषेक किया गया। तब श्री राम ने सुग्रीव से कह दिया कि इस समय चौमासा पूरे देश में फैल गया है। इस समय बीहड़ जंगलों में जाकर सीता जी की खोज करना संभव नहीं है । चौमासा व्यतीत होने के उपरांत सीता जी के खोज के अभियान में लगा […]
जब बाली का अंत हो गया तो उसकी मृत्यु की सूचना उसकी पत्नी तारा को प्राप्त हुई। तब वह विलाप करती हुई अपने पति के शव के पास आ पहुंची। तारा बहुत ही विदुषी महिला थी। उसे राजनीति का गहरा ज्ञान था। कूटनीति की वह महान पंडिता थी। उसने अपने पति को अपने भाई सुग्रीव […]
कबंध ने अपनी पराजय के पश्चात श्री राम और लक्ष्मण जी को यह बताया था कि यदि वह अपने मनोरथ में सफलता प्राप्त करना चाहते हैं तो उन्हें सुग्रीव नाम के वानर के साथ मित्रता करनी चाहिए। इंद्र पुत्र बाली ने क्रुद्ध होकर अपमानजनक ढंग से उसे राज्य से निकाल दिया है। वह वानर पंपा […]
जिस समय लंका का राजा रावण सीता जी को वायु मार्ग से अपहरण करके ले जा रहा था उस समय सीता जी विलाप करुण चीत्कार करती हुई जा रही थीं। वह मार्ग में अपना कोई कीमती आभूषण या कोई वस्त्र भी नीचे डाल रही थीं। जिससे रामचंद्र जी और लक्ष्मण जी जब उन्हें खोजते हुए […]
इसी वन में रहते हुए लंका के रावण की बहन शूर्पनखा से श्री राम, सीता जी और लक्ष्मण जी का सामना होता है। एक दिन वह राक्षसिन स्वयं ही उनके आश्रम में आ पहुंचती है। वह श्री राम और लक्ष्मण को देखते ही उन पर आसक्त हो गई। तब वह काम भावना से प्रेरित होकर […]