विश्व बाजार में भारत की उच्च शिक्षा है कमाई का जरिया पुण्य प्रसून वाजपेयी भारत की उच्च शिक्षा को दुनिया के खुले बाजार में लाने का पहला बड़ा प्रयास वाजपेयी की अगुवायी वाली एनडीए सरकार ने किया था। उस वक्त उच्च शिक्षा को डब्ल्यूटीओ और गैट्स के पटल पर रखा गया था और तभी पहली […]
Category: राजनीति
अब अनुच्छेद ३७० को लेकर छिड़ी नई बहस
जम्मू कश्मीर में जब भी चुनाव होते हैं तो संघीय संविधान के अनुच्छेद ३७० का प्रश्न सदा प्रमुख रहता है । चुनाव चाहे लोक सभा के हों या विधान सभा के,अनुच्छेद ३७० का मुद्दा कभी ग़ायब नहीं होता । जम्मू और लद्दाख के लोगों ने तो इस अनुच्छेद को हटाने के लिये १९४८ से […]
पुण्य प्रसून वाजपेयी बंधु दिल्ली में कोई हमें घर देने को तैयार नहीं है। यह ना तो मुंबई की तर्ज पर किसी मुस्लिम का कथन है और ना ही घर ढूंढने वाले किसी बेरोजगार का। जिससे किराया मिलेगा या नहीं इस डर से मकान मालिक घर देने से इंकार कर दे। यह शब्द अरविन्द केजरीवाल […]
स्वयं को छलती, देश को ठगती कांग्रेस
दिनेश परमारभारतीय राजनीति में जिस प्रकार की विकृति व विसंगति वर्तमान समय में उभर रही है वह ठिक तो कदापि नहीं, अव्यवहारिक व देश के लिए घातक भी है। राष्ट्रीय राजनीति के मुद्दों से लेकर पंचायत स्तर के चुनावों तक में उम्मीदवारों द्वारा कितनी बेतुकी व बेसिर-पैर की बयानबाजी की जाती है निकट समय के […]
दागियों पर नकेल कसने का मोदी फरमान
पुण्य प्रसून वाजपेयी बीहड़ में तो बागी रहते हैं। डकैत तो पार्लियामेंट में होते है। याद कीजिये फिल्म पान सिंह तोमर के इस डायलाग पर खूब तालियां बजी थीं। और उसी दौर में जनलोकपाल को लेकर चले आंदोलन में सड़क पर ही संसद की साख को लेकर भी सवाल उठे । दागी सांसदो को लेकर […]
हवाई किले और आम जनता
डॉ0 वेद प्रताप वैदिक राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के मुंह से यह सुनकर कितना अच्छा लग रहा था कि यह ‘मेरी सरकार’ है। प्रणब दा के अलावा कोई और व्यक्ति नरेंद्र मोदी की सरकार को ‘मेरी सरकार’ कह देता तो इतना अजूबा नहीं होता। जो प्रणब दा पिछले चालीस साल से नेहरु परिवार के सिपाही थे, […]
पुण्य प्रसून वाजपेयी आजादी के बाद पहली बार प्रचारक का आदर्शवाद प्रधानमंत्री की ताकत से टकरा रहा है। देखना यही होगा कि प्रचारक का राष्ट्वाद प्रधानमंत्री की ताकत के सामने घुटने टेकता है या फिर प्रधानमंत्री की ताकत का इस्तेमाल प्रचारक के राष्ट्रवाद को ही लागू कराने की दिशा में बढता है । नेहरु के […]
संस्कृत में सिर्फ शपथ काफी नहीं
डाॅ0 वेद प्रताप वैदिक इस बार हमारी संसद में जितने मंत्रियों और सांसदों ने संस्कृत में शपथ ली, उतनों ने पहले कभी नहीं ली। यह महत्वपूर्ण बात हैं इसका मोटा कारण तो यही है कि भाजपा के सदस्यों की संख्या इस बार सबसे ज्यादा है। भाजपा एक मात्र पार्टी है, जो अपनी संस्कृति और परंपरा […]
पुण्य प्रसून वाजपेयी हिमालय का संरक्षण, अविरल स्वच्छ गंगा और वन बंधु कार्यक्रम। संघ परिवार के यह तीन नारे आज के नहीं है पहली बार पूर्व सरसंघचालक गुरु गोलवरकर के दौर में ही सवाल आरएसएस ने उठाये थे। लेकिन पहली बार किसी सरकार के एजेंडे के प्रतीक यह मुद्दे उसी तरह बने है जैसे 15 […]
मोदी के बड़े काम
डॉ0 वेद प्रताप वैदिक प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी रोज़ ही एक-दो काम ऐसे कर रहे हैं कि जिनकी सराहना किए बिना नहीं रहा जा सकता। मोदी का निर्देश था कि मंत्री और सांसद अपने रिश्तेदारों को निजी सहायक बनाना बंद करें। इस निर्देश का तत्काल असर हुआ। बाराबंकी की सांसद प्रियंका सिंह रावत […]