बनवारी इस जून के मध्य में भारत के अंगरेजी अखबारों में ऐसे अनेक लेख छपे, जिनमें मैग्नाकार्टा का गुणगान किया गया था। मैग्नाकार्टा उस राजकीय घोषणापत्र को कहते हैं, जिसे 15 जून, 1215 को इंग्लैंड के राजा जॉन ने जारी किया था। अंगरेजी जानने-समझने वाले कई अन्य देशों में भी इन दिनों मैग्नाकार्टा को लेकर […]
Category: राजनीति
आपातकाल की आपदाओं की आपबीती व्यथा-कथा
हिमाचल में इससे भी ज्यादा क्रूर व्यवहार भारतीय मजदूर संघ के प्यारे लाल बेरी के साथ किया गया था। शांता कुमार, दौलतराम चौहान, कंवर दुर्गा चंद, किशोरी लाल सब सलाखों के पीछे पहुंच गए थे। उधर फिरोजपुर से जब पुलिस हमें पेशी के लिए जालंधर लेकर आती थी तो एक बुजुर्ग सिपाही हमें समझाता रहता […]
भारत में धर्म आधारित हिंसा और अमरीका
अमेरिकी विदेश विभाग की एक रिपोर्ट के मुताबिक बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और पुलिस एवं सुरक्षा बल के दुव्र्यवहार के अलावा वर्ष 2014 में भारत में धर्म आधारित सामाजिक हिंसा सबसे बड़ी मानवाधिकार समस्या रही। इसकी सालाना ‘कांग्रेसनली मैनडेटेड कंट्री रिपोर्ट ऑन ह्यूमन राइट्स प्रैक्टिसेज फॉर 2014 रिपोर्ट’ के लंबे चौड़े इंडिया सेक्शन में मनमाने […]
आज का चिंतन
सम्राट चंद्रगुप्त ने एक दिन अपने प्रतिभाशाली मंत्री चाणक्य से एक दिन कहा- “कितना अच्छा होता कि तुम अगर सुंदर भी होते।“ चाणक्य ने कुशलता पूर्वक उत्तर दिया, “महाराज रूप तो मृगतृष्णा है। आदमी की पहचान तो गुण और बुद्धि से ही होती है, रूप से नहीं।“ “क्या कोई ऐसा उदाहरण है जहाँ गुण के […]
ढोल जरा कम पीटते तो बेहतर होता
भारत-बर्मा (म्यांमार) सीमांत में छिपे नगा बागियों पर हमारी फौज ने जैसा हमला किया और हमले से भी ज्यादा उसका जैसा प्रचार किया, उससे सारा देश गद्गद् हो गया। हमारे फौजियों को तो शाबाशी मिली ही, हमारे नेताओं ने भी बहती गंगा में हाथ धो लिए। 56 इंच के सीने वाली सरकार का सीना फूलकर […]
मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना
-तनवीर जाफरी- ‘नरेंद्र मोदी सरकार के एक वर्ष के शासनकाल में देश का अल्पसंख्यक मुस्लिम समुदाय भय, आतंक, उपेक्षा तथा भेदभाव के वातावरण में रह रहा है’ -देश के अनेक राजनैतिक व सामाजिक विश्लेषकों के उक्त कथन को एक बार फिर उस समय बल मिला जबकि पिछले दिनों मुंबई के एक प्रतिष्ठित हीरा उद्योग से […]
फिर दुर्गति की ओर तीसरा मोर्चा
सुरेश हिन्दुस्थानी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के वशीभूत होकर बनाए जाने वाले तीसरे मोर्चे की उम्मीदें एक बार फिर से चकनाचूर होने की दिशा में अपने कदम बढ़ा चुकी हैं। राजनीतिक आंकलनकर्ताओं को इस बात का पूर्व भी कुछ कुछ अंदाजा था कि तीसरा मोर्चा इस बार भी आकार लेने से पहले ही बिखर जाएगा, और वर्तमान […]
देश विभाजन और राजनैतिक वातावरण
हरिशंकर राजपुरोहित गतांक से आगे….. द्वितीय महायुद्घ की समाप्ति पर सिंगापुर के ब्रिटिश सेना के सर्वोच्च कमांडर लॉर्ड माउंट बेटन, जो पचास वर्ष से कम उम्र का प्रौढ नौजवान था, को भारत का वायसराय बनाकर, इंग्लैंड की सरकार ने भारत भेजा। जिसको अंग्रेजों के इस निर्णय को, कि भारत को दो हिस्सों में विभाजित करा […]
किसानों की आत्महत्या-लोकतंत्र की असफलता
आत्महत्या किसी समस्या का समाधान नहीं, लेकिन आत्महत्या करने को कोई क्यों विवश होता है, ये सवाल उत्तर माँगता है! देश में लगातार हो रही किसानों की आत्महत्या, प्रशासन, सरकार और जनप्रतिनिधियों के निष्ठुर होने का अकाट्य प्रमाण! लोकतंत्र को सर्वश्रेष्ठ शासन व्यवस्था मानकर अपनाया गया था, लेकिन किसानों की आत्महत्याओं के चलते अब ये […]
शिव-सेना और मुसलमान
शिव सेना के मुखपत्र ‘सामना’ में उसके एक सांसद का लेख छपा है। वह जल्दबाजी में दिया गया बयान नहीं है, बल्कि एक लेख है याने उसमें जो कुछ भी कहा गया है, वह सोच-समझकर कहा गया है। उस लेख में कहा गया है कि कई नेता और पार्टियाँ मुसलमानों को वोट बैंक की तरह […]