21वी सदी में राजनीतिज्ञों के अंधविश्वास मध्यप्रदेश विधानसभा के शुरू हुए शीतकालीन सत्र का पहला दिन विधानसभा भवन में वास्तुदोष के भ्रमित मुद्दे पर उठाए गए प्रश्नों पर होम हो गया। सत्र की शुरूआत दिवगंत विद्यायकों और अन्य नेताओं को श्रद्धांजलि देते हुए शुरू हुआ। इसके तत्काल बाद कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक केपी सिंह ने […]
Category: राजनीति
नई संभावनाओं का सफर
शोभना जैन भारत यात्रा पर आए इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में दोनों देशों के शिष्टमंडलों के बीच हुई गहन मंत्रणा के बाद नेतन्याहू के सम्मान में सरस माहौल में भोज का आयोजन चल रहा था। अतिथियों के मनोरंजन के लिए लाइव बैंड मधुर संगीत की लहरियां छेड़े हुए […]
कायदे और कारगुजारी का अंतर
वीरेंद्र पैन्यूली जिस दिन से देश आजाद हुआ, हर नेता तो यही कहता आता है कि अधिकारियों को फाइलों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि जमीनी हकीकत जानने के लिए जनता के बीच जाना चाहिए। किस जिला अधिकारी की यह जिम्मेदारी नहीं थी कि वह अपने जिला में स्वास्थ्य, शिक्षा व सफाई की समस्याओं […]
बड़ी बातें नहीं, स्पष्ट इरादे चाहिए
आर्थिक हालात को ठीक करने के लिए केवल बातों की नहीं, बल्कि मजबूती के साथ धरातल पर काम करने की जरूरत है। एक समृद्ध प्रदेश के निर्माण के लिए आज से ही सरकार को कुछ ठोस निर्णय लेने की जरूरत है, ताकि आने वाले कल की बेहतरी की संकल्पना साकार की जा सके। हिमाचल प्रदेश […]
स्वयं को भारतीय संस्कृति और परम्पराओं का पोषक दल बताने वाले भारतीय जनता पार्टी के विचारकों के लिए यह आइना देखने की बात है कि उत्तर प्रदेश की योगी केबिनेट ने समाज और संविधान की मान्यता प्राप्त न्याय पंचायत सरीखे एक परम्परागत संस्थान को खत्म करने का निर्णय लिया। उत्तर प्रदेश के पंचायत प्रतिनिधियों तथा […]
वोट तक सीमित न हो लोकतंत्र
इस बार के चुनाव प्रचार में राज्य और स्थानीय महत्त्व के मुद्दे गोल कर दिए गए और राज्य के मुद्दों के साथ केंद्र के मुद्दों के घालमेल का प्रयास करके जनता को गुमराह करने का प्रयत्न किया गया। यही नहीं, मुद्दों पर बात करने के बजाय व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप पर फोकस किया गया। इसका कारण यह […]
राजनीतिक भीख नहीं तपोवन सत्र
माननीय विधायक अगर वाकआउट करें, तो खर्च का हिसाब लगाना वाजिब है, लेकिन सदन में सत्र के दिन बढ़ें तो लोकतांत्रिक प्रासंगिकता बढ़ती है। अत: तपोवन में विधानसभा का ताप बढ़ाने के लिए सत्र की अवधि में विस्तार की गुंजाइश हमेशा रहेगी। विधानसभा का तपोवन में होना या शीतकालीन सत्र के दौरान होने की आशा […]
मासूमियत से यह कैसा खिलवाड़
मोनिका शर्मा इतिहास के पन्नों पर हो रही वर्तमान की सियासत में हमारा भविष्य भी अंधकारमय हो रहा है। ऐसा ही कुछ लगता है सोशल मीडिया में वायरल हुए बच्चे का वीडियो देख कर, जो हाथ में पत्थर उठाए वही बोल रहा है जो उससे बोलवाया जा रहा है। यह मासूम वही समझ रहा है […]
असम क्यों सुलग रहा है
बहुप्रतीक्षित राष्ट्रीय नागरिक पंजी यानी एनआरसी का पहला प्रारूप आते ही सीमावर्ती राज्य असम में तनाव बढ़ गया है। सूची में घोषित आतंकी व लंबे समय से विदेश में रहे परेश बरुआ, अरुणोदय दहोटिया के नाम तो हैं लेकिन दो सांसदों व कई विधायकों के नाम इसमें नहीं हैं। अपना नाम देखने के लिए केंद्रों […]
भारत की लाचार संसदीय प्रणाली
नोटबंदी का फैसला हो, जीएसटी लागू करने की बात हो या फिर तीन तलाक का मामला, सब जगह संसद की अवहेलना की गई। कानून बनाने में विपक्ष की भूमिका सिर्फ आलोचना करने तक सीमित है। वह न कोई कानून बनवा सकता है और न रुकवा सकता है। ऐसे में यह धारणा कि संसद कानून बनाती […]